‘योग’ मन और शरीर दोनों से करता है मजबूत

‘योग’ मन और शरीर दोनों से करता है मजबूत

-योग के अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित होते ही बदली परिस्थितियां

नई दिल्ली। वे कहती हैं कि उन्होंने सबसे पहले वर्ष 2004 में ‘योग’ के बारे में सार्वजनिक रूप से बात की थी,तब कोई भी योग से वाकिफ नहीं था। लोगों के बीच यह नया विषय था, फिर 2006 में योग को कानूनी रूप से मान्यता दिए जाने के लिए प्रयास किया गया, लेकिन उन्हें कोई भी सफलता नहीं मिल पाई थी बल्कि सऊदी में जब महिलाओं के खेलों और योग को लेकर कुछ स्वतंत्रता दी गई तब बहुत कठिनाई आने लगी थी, किंतु 11 दिसंबर 2014 को 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से ‘योग के अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ के रूप में 21 जून को मंजूरी दे दी तब स्‍थ‍ितियां बदले लगीं। उस दिन हमने जेद्दाह में आधिकारिक रूप से सार्वजनिक तौर पर पहला ‘योग’ उत्सव मनाया। इसके बाद हर साल हमें योग को प्रचारित करने का मौका मिल गया।

‘योग’ मन और शरीर दोनों से करता है मजबूत

उन्होंने कहा कि फरवरी 2017 में राजकुमारी रीमा बंत बंदार अल सऊद से मुलाकात के बाद से बहुत कुछ तेजी से बदलता हुआ दिखा देने लगा। मुझे अपने देश में सभी को योग के स्वास्थ्य लाभ के बारे में बताना था। मैं ऑटो इम्यून डिजीज के साथ पैदा हुई थी और बहुत कुछ सहा था। मैं एक सामान्य जीवन शैली जीने में असमर्थ थी। एक बार किसी ने मुझे योग के बारे में बताया और फिर मैंने इसके बारे में पढ़ना शुरू किया। जितना अधिक मैंने इसके बारे में जाना मेरी रुचि और अधिक बढ़ती गई।

आयुर्वेद और योग से कठिन बीमारी पर भी पाई जा सकती है विजय

वे कहती हैं कि ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई पूरी करने के बाद मैं भारत चली आई, अब तक मेरी बीमारी ने किडनी पर असर करना शुरू कर दिया था। ऐसे में भारत आकर मैं सबसे पहले केरल गई जहां आयुर्वेदिक चिकित्‍सकों से मिलकर अपना इलाज शुरू किया। उसके बाद मैंने देखा शरीर में बहुत तेजी के साथ सुधार हो रहा है, चिकित्सा में योग करना भी एक भाग था। यहां से मैं योग के साथ और बहुत गहरे से जुड़ गई। उसके बाद भारत में कई स्‍थानों पर जाकर योग के बारे में जानने का प्रयास किया। इस विषय में जितना अध्ययन किया, उतना ही अधिक ज्ञान बढ़ा।

इस्‍लामिक देशों में आज योग एक सफल उद्योग

मारवाई बताती हैं, कि योग को मान्यता मिलने के कुछ महीने के भीतर ही मक्का, मदीना सहित देश के कई शहरों में योगा स्टूडियो और योग प्रशिक्षकों का एक नया उद्योग खड़ा हो गया है। सऊदी अरब के माध्यम से योग का अभ्यास किया जा रहा है। मक्का, रियाद मदीना और जेद्दा जैसे शहरों में योग केंद्र और योग शिक्षक हैं। सऊदी अरब में योग की मांग है क्योंकि लोग जानते हैं कि योग आपको स्वस्थ बनाता है। इसने शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर मदद मिलती है।

नर्वस सिस्‍टम और मानसिक संतुलन को बनाए रखने का बल देता है ‘योग’

नौफा मारवाई का इस कोरोना महामारी के वक्त में कहना है कि हम सभी जानते हैं कि इस वक्त पूरा विश्‍व कोरोना संकट में जी रहा है, ऐसे वक्त में हमारे सामने नर्वस सिस्‍टम एवं मानसिक संतुलन को बनाए रखना बहुत जरूरी है। हमारे मस्तिष्क में खुश रहने वाले हार्मोन बनते हैं। ऐसे हार्मोन बनाने में योग बहुत कारगर है। वे कहती हैं कि यदि हम प्रतिदिन योग को अपने जीवन में शामिल कर लें तो हमारी क्वालिटी ऑफ लाइफ बेहतर हो जाती है।
आपको बता दें कि आज यदि सऊदी अरब में योग के शिक्षण और अभ्यास को जो मंजूरी मिली है उसका पूरा श्रेय सऊदी अरब और खाड़ी में योग और आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए समर्पित योगचारिणी नौफा मारवाई को जाता है, जिसके बाद कहना होगा कि वे सच्चे अर्थों में महर्षि पतंजलि की योग कन्‍या हैं।

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