कब बनेगा वादों का भवन ?

समय भास्कर / शैलेंद्र पांडे/ मीरा भायंदर
पिछले कुछ वर्षों में सबसे अधिक चर्चा में अगर कोई विषय रहा है तो वो है उत्तर भारतीय भवन। अक्सर चुनाव के वक्त इस विषय पर चर्चा होती थी लेकिन इस बार मुद्दा विधानसभा चुनाव के एक साल बीत जाने के बाद भी गरम है। नगरपालिका चुनाव के लिए भी अभी अच्छा खासा वक्त है।
उत्तर भारतीय भवन का अब तक कुछ हुआ नहीं उसीके बीच हिंदी भाषी भवन के निर्माण की चर्चा जोरों पर है, कुछ खबरों की माने तो भूखंड भी आरक्षित किया जा चुका है। शिवसेना के नेतागण कोई मौका नही छोड़ रहे है कि उनके प्रयत्नों की वजह से यह संभव हो पाया है। खैर जब तक इमारत खड़ी नही हो जाती उस विषय पर ज्यादा कुछ लिखना उचित नही होगा।
विधायक गीता जैन जो कि अब शिवसेना का दामन थाम चुकी है उन्होंने अपनी चुनावी रैली में यह घोषणा की थी कि वो हारे या जीते उत्तर भारतीय भवन का निर्माण कराएंगी। उत्तर भारतीय समाज अब गीता जैन की तरफ टक टकी लगा कर बैठा है। खैर अभी विधयिका जी के चार साल बाकी है तो यह भी साफ हो जाएगा कि क्या वो सिर्फ एक चुनावी वादा था या फिर वाकई उत्तर भारतीयों के लिए कुछ करना चाहती है।

वादों के इस सिलसिले में अब आगरी भवन और मराठा भवन भी क्रमशः जुड़ने जा रहे है। सभागृह नेता प्रशांत दलवी ने मराठा भवन की माँग करते हुए भवन निर्माण की राजनीति में एक नया मोड़ ले दिया है। खैर देखना यह है कि क्या वादों से निकलकर भवन जमीन पर नजर आएगा या फिर बंगाली भवन, राजस्थानी भवन, दक्षिण भारतीय भवन अथवा और किसी भवन की चर्चा इस क्रम में जुड़ जाएगी।