उपराष्ट्रपति ने किया खादी को ‘राष्ट्रीय कपड़ा’ के रूप में मानने और उपयोग करने का आह्वान

उपराष्ट्रपति ने किया खादी को ‘राष्ट्रीय कपड़ा’ के रूप में मानने और उपयोग करने का आह्वान

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने देशवासियों से खादी को ‘राष्ट्रीय कपड़ा’ के रूप में मानने और इसके उपयोग को व्यापक रूप से बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों से आगे आने और खादी के इस्तेमाल को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने का आह्वान किया।

शैक्षणिक संस्थानों से खादी के उपयोग का आह्वान

डिजिटल सवाल-जवाब प्रतियोगिता ‘खादी के साथ अमृत महोत्सव’ क्विज प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति ने शैक्षणिक संस्थानों से वर्दी के लिए खादी के उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह न केवल छात्रों को खादी के कई लाभों का अनुभव करने का अवसर देगा बल्कि उन्हें हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने में भी मदद करेगा।

खादी में शून्य कार्बन फुटप्रिंट

खादी के पर्यावरणीय लाभों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि खादी में शून्य कार्बन फुटप्रिंट है क्योंकि इसके निर्माण के लिए बिजली या किसी भी प्रकार के ईंधन की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होंने कहा, “ऐसे समय में जब दुनिया कपड़ों में स्थायी विकल्प तलाश रही है,यह याद रखना चाहिए कि खादी एक पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ कपड़े के रूप में निश्चित रूप से आवश्यकता को पूरा करती है।”

पिछले सात वर्षों में खादी के अभूतपूर्व बदलाव

उपराष्ट्रपति ने पिछले सात वर्षों में खादी के अभूतपूर्व बदलाव पर प्रसन्नता व्यक्त की और विकास में तेजी लाने के लिए सरकार, केवीआईसी और सभी हितधारकों की सराहना की। उन्होंने कहा, “मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि केवीआईसी अखिल भारतीय पहुंच स्थापित करने में सफल रहा है और देश के दूर-दराज के कोनों में भी लोगों को स्थायी स्वरोजगार गतिविधियों से जोड़ा है।”

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनता की शक्ति थी खादी

उपराष्ट्रपति ने खादी की ऐतिहासिक प्रासंगिकता को याद किया और कहा कि यह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनता के लिए एक शक्ति थी। नायडू ने उल्लेख किया कि कैसे महात्मा गांधी ने वर्ष 1918 में गरीबी से पीड़ित जनता के लिए आय का एक स्रोत उत्पन्न करने के लिए खादी आंदोलन शुरू किया और बाद में इसे विदेशी शासन के खिलाफ एक शक्तिशाली प्रतीकात्मक हथियार में बदल दिया।

 

 

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