रामप्रसाद गोटियां के लोकगीतों के माध्यम से टीकाकरण जागरूकता अभियान

 रामप्रसाद गोटियां के लोकगीतों के माध्यम से टीकाकरण जागरूकता अभियान

कटनी। वैश्विक महामारी का सामना करने हुए,इस लड़ाई से जीतने के लिए,सभी अपने हिस्से का योगदान दे रहे हैं। कोरोना से बचाव के उपायों का पालन करने के साथ,वर्तमान में अधिकाधिक लोगों को वैक्सीन लगवाने की जरूरत है। टीकाकरण को लेकर सजगता बढ़ाने के क्रम में कटनी के रामप्रसाद गोटियां ने लोकगीतों का सहारा लिया है। उनके गीत ग्रामीण अंचलों में जहां लोगों के मन को भा रहे हैं,वहीं उन्हें कोरोना की वैक्सीन लगवाने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।

जनजागरण का माध्यम बने लोकगीत

जन चेतना जागृत करने में लोकगीतों का महत्तम योगदान है। चाहे स्वतंत्रता संग्राम हो या अन्य कोई सामाजिक आंदोलन,गीतों के माध्यम से लोग सहज ही जुड़ जाते हैं। स्वास्थ्य-शिक्षा संबंधी जागरूकता उत्पन्न करने के लिए गीत बेहद सुंदर माध्यम हैं। लोकगीतों को आधार बनाकर कटनी के रामप्रसाद गोंटिया ऐसे ही एक प्रयास में जुटे हैं। उन्होंने कोरोना टीकाकरण के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से,तीन गीतों की रचना की है। वे स्वयं कार्यस्थलों पर जाकर मजदूरों को,अपने प्रेरक गीतों के माध्यम से टीकाकरण के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जिले भर के ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी कला के माध्यम से कोरोना को लेकर जागृति ला रहे हैं। रामप्रसाद गोंटिया पहले भी साक्षरता,स्वच्छता अभियान के लिए गीत लिख चुके हैं।

शब्द साधना को बनाया हथियार

रामप्रसाद ने कोरोना से लड़ाई के लिए अस्त्र के रूप में शब्दों को चुना। वे कहते हैं कि, ” मैं भी कोरोनो से संक्रमित हुआ। जिला अस्पताल में उपचार कराया। इसके बाद ग्रामवासियों को कोरोना के प्रति सतर्कता बरतने और टीकाकरण कराने के लिये प्रेरित करने का संकल्प लिया।” इसके बाद ही रामप्रसाद ने अपनी शब्द साधना को हथियार बनाया और गीतों की रचना की। वे अब ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को यह गीत सुनाकर टीकाकरण का महत्व बता रहे हैं। उनके ग्राम पंचायत में अब तक 598 लोगों ने कोरोना का टीका लगवा लिया है। गांव के युवा भी टीका लगवाने के लिए प्रेरित हुए हैं।

ऐसे हैं रामप्रसाद के गीत

राम प्रसाद के गीत आज सभी को बेहद पसंद आ रहे हैं। उनके एक गीत का बोल है –

”बस इतना ही कहना था,यह सब से हमारा
सुन लो भाई-बहना,भ्रम ना कोई रखना
18 से ऊपर को दोनो डोज हैं लगना
तभी सुरक्षित हो, घर परिवार हमारा”

वैक्सीनेशन के लिए अलख जगा रहे,रामप्रसाद के इस प्रयास से कई लोग लाभान्वित हुए हैं। आज यह आवश्यक है कि,हर व्यक्ति एक-दूसरे को टीकाकरण का महत्व बताए। रामप्रसाद का मानना है कि, जब एक छोटे से गांव में रहने के बाद मैं आगे आ सकता हूं,तब अन्‍य लोग भी इस प्रकार के अभियान में आगे आएं। अपने घर,गांव और समाज की जिम्मेदारी हम सबको लेनी होगी,तभी हम कोरोना के विरुद्ध लड़ाई जीत सकेंगे।

 

 

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