कमरुनाग मंदिर के समीप झील में पांडव वंश से इसमें अकूत सम्पति दबी हुई है, जानें इसकी विशेषता और मान्यता

नई दिल्ली।  वैसे तो भारत के हर कोने कोने पर कई देवालय मिल जायेंगे लेकिन कई बार अध्यात्म से जुडी कई घटनाएं इन स्थानों को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बना देती हैं। ऐसा ही एक आध्यात्मिक स्थान है कमरुनाग जो की हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित है। धौलाधार हिमालय एवं बल्ह घाटी के बीच स्थित इस स्थान की समुद्र तल से ऊंचाई 3334 मीटर है। हिमाचल के सुंदरनगर रोहांडा से 35 किलोमीटर की दूरी वाहन से तय करने के बाद यहाँ पहुँचने के लिए लगभग 6 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।

नजदीकी रेलवे स्टेशन जोगिन्दरनगर है जो की 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कहा जाता है कि यहाँ यक्षराज का मंदिर है जिसकी अर्चना पांडव करते थे। यहाँ मंदिर के पास ही स्थित झील है जिसमें श्रद्धालु अपनी अपनी आस्था के हिसाब से सोना चांदी आदि का चढ़ावा चढ़ाते हैं।कहा जाता है कि यहाँ अकूत सम्पति इस झील में दबी हुई है जिसे कोई निकाल नहीं सकता। आइये जानते हैं कमरुनाग एवं इसके आस पास स्थित अन्य दर्शनीय स्थानों के बारे में।

कमरुनाग-
पीरपंजाल और बल्ह घाटी में स्थित कमरुनाग को वर्षा का देवता भी माना जाता है।यहाँ पहुँचने के लिए लगभग 6 किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता है। कमरुनाग में बड़ा बाबा का मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है।कहा जाता है कि यहाँ स्थित झील को भीम ने बनाया था।

शिकारी देवी मंदिर-
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित शिकारी देवी मंदिर शिकारी चोटी पर स्थित है जो 3359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह मंडी जिले के झँझेलि से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चारों और ऊँचे ऊँचे देवदार के पेड़ इस जगह को शानदार बना देते हैं। बर्फ से ढके धौलाधार हिमालय और चारों और फैली हरियाली आपको यहां बहुत पसंद आएगी। कहा जाता है कि यह शिकारियों की आराध्य देवी हैं जिसे पांडवों द्वारा बनवाया गया था।

रिवालसर झील-
मंडी से 22 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में यह झील स्थित है जो अपनी सुंदरता के लिए जानी जाती है। यह स्थान हिंदुओं के साथ साथ बौद्ध एवं सिख मतावलंबियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। यहाँ तीन बौद्ध मोनेस्ट्रीज़ एवं तीन हिन्दू मंदिर हैं जिनमे कृष्ण, शिव एवं ऋषि लोमस का मंदिर प्रमुख हैं। कहा जाता है कि बौद्ध गुरु रिनपोचे पद्मसम्भव यहीं से तिब्बत थे।

मचियाल झील-
मण्डी जिले में स्थित यह झील चारों तरफ से हरियाली से घिरी हुई है।इस झील का नाम भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार के नाम पर रखा गया है। यह झील जोगिन्दर नगर सरकाघाट राज्य हाइवे पर जोगिन्दर नगर से 8 किलोमीटर की दूरी ओर स्थित है।

महुनाग मंदिर-
करसोग शहर से 25 किलोमीटर की दुरी पर महुनाग मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि महाभारत काल में अंगराज कर्ण ने यहाँ तपस्या की थी। एजेंसी