दुनिया में आयुष दवाओं की उपस्थिति बढ़ेगी,अमेरिकन कंपनी के साथ समझौता

दुनिया में आयुष दवाओं की उपस्थिति बढ़ेगी,अमेरिकन कंपनी के साथ समझौता

नई दिल्ली। विश्व में आयुष चिकित्सा पद्धति पर भरोसा बढ़ाने और इसे अधिक लोकप्रिय बनाने के मकसद से भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी आयोग (पीसीआईएम-एंड-एच) ने अमेरिकन हर्बल फॉर्माकोपिया (एएचपी) के साथ 13 सितंबर, 2021 को एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है। इससे दुनिया में आयुष दवाओं की उपस्थिति बढ़ेगी और निर्यात क्षमता में भी वृद्धि होगी। इसमें अमेरिका के बाजार का विशेष स्थान है।

आयुष मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि एक यह महत्वपूर्ण कदम है। इस समझौता-ज्ञापन पर वर्चुअल माध्यम से हस्ताक्षर किये गये। आयुष मंत्रालय का उद्देश्य है कि दोनों देशों के बीच बराबरी तथा आपसी लाभ के आधार पर आयुर्वेद और अन्य भारतीय पारंपरिक औषधि प्रणालियों को प्रोत्साहित किया जाए और उनके मानकीकरण का विकास किया जाये।

इस सहयोग से आयुर्वेद,सिद्ध,यूनानी और होम्योपैथी दवाओं की निर्यात क्षमता को बढ़ाने के दूरगामी प्रयास होंगे। समझौते के तहत एक संयुक्त समिति का गठन किया जायेगा,ताकि पारंपरिक औषधि के क्षेत्र में सहयोग के हवाले से मोनोग्राफ के विकास तथा अन्य गतिविधियों के लिए समय-सीमा के साथ एक कार्य योजना भी विकसित की जाये।

आयुष मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक पीसीआईएम-एंड-एच और एएचपी, अमेरिका में आयुर्वेद दवाओं के बाजार के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों की मिलकर पहचान करेंगे। इस कदम से सहयोग के तहत विकसित होने वाले आयुर्वेद मानकों को अमेरिका के हर्बल दवाओं के निर्माता अपना लेंगे।

भारत और अमेरिका के बीच यह समझौता ऐसे समय में हुआ है,जब आयुष मंत्रालय भारत और विदेश में आयुर्वेद तथा अन्य भारतीय पारंपरिक औषधीय उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिये कई कदम उठा रहा है। आयुर्वेद और अन्य आयुष दवाओं ने गलत जीवन-शैली से पैदा होने वाली बीमारियों से निपटने में बहुत योगदान किया है। इसके अलावा,संक्रमण के खिलाफ लड़ने को शरीर की रोग विरोधी क्षमता को बढ़ाने में भी आयुर्वेद,सिद्ध,यूनानी और होम्योपैथी की अहम भूमिका है,जिसके प्रमाण सबके सामने हैं।

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