जम्मू-कश्मीर में खेती बाड़ी का स्वरूप बदल रहा 

जम्मू-कश्मीर में खेती बाड़ी का स्वरूप बदल रहा 

जम्मू-कश्मीर। खेती बाड़ी देश में आज भी रोजगार का प्रमुख साधन है। जम्मू-कश्मीर में 75 फीसदी लोगों की रोजी रोटी का यह प्रमुख साधन है। भारत सरकार की नई कृषि नीतियों और कृषि क्षेत्र में सतत विकास के कारण केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में खेती बाड़ी का स्वरूप इन दिनों काफी बदल गया है। पिछले दिनों उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्थानीय किसानों को लिक्विड नैनो यूरिया का इस्तेमाल करने का अवसर प्रदान किया है।

जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए गुजरात से लाया गया लिक्विड नैनो यूरिया

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के आग्रह पर गुजरात से इफको निर्मित लिक्विड नैनो यूरिया जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए लाया गया है। इस पर उपराज्यपाल ने कहा कि कृषि क्षेत्र में लिक्विड नैनो यूरिया एक नयी क्रांति है। उन्होंने इफको को विश्व का पहला लिक्विड नैनो यूरिया विकसित तैयार करने के लिए बधाई दी।

नैनो यूरिया से किसानों को फसल उत्पादन की लागत में आएगी कमी

गुजरात से जम्मू कश्मीर 15,000 बोतल नैनो यूरिया, जो 675 मीट्रिक टन यूरिया के बराबर है,यहां लाया गया है। नैनो यूरिया के इस्तेमाल से किसानों को फसल उत्पादन की लागत में कमी आएगी। साथ ही वे यूरिया के इस्तेमाल को भी कम करेंगे। जानकार मानते हैं कि सरकार इस नयी क्रांति से तकरीबन 27,000 करोड़ रुपये सब्सिडी में भी बचा सकती है।

अब अन्य राज्यों में भी मिलेगी जम्मू के बासमती की महक

बासमती का कटोरा कहे जाने वाले जम्मू की बासमती 370 की महक अब देश के अन्य राज्यों में भी लोग ले सकेंगे। स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय ने 370 से तीन अन्य किस्मों के चावल को तैयार किया है। इसका स्वाद और महक 370 के जैसी होगी। साथ ही यह कम समय में तैयार भी होगी और पैदावार भी अधिक होगी। हाल ही में ये तीन किस्में 118, 123 और 138 तैयार की गई हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के किसानों को 350 का बीज दिया गया है। इन किस्मों की प्रति कनाल 2 क्विंटल और प्रति हेक्टेयर 45 क्विंटल पैदावार होने का अनुमान है।

जम्मू के बासमती चावल की पूरी दुनिया में मांग

जम्मू का बासमती 370 सबसे अच्छी क्वालिटी का चावल माना जाता है। इसकी खुशबू और स्वाद की वजह से दुनिया भर के देशों में इसकी अच्छी मांग है। इसकी मांग को देखते हुए कृषि विश्वविद्यालय ने इसी से तीन किस्में और तैयार की है, ताकि देश के अन्य हिस्सों में भी यह लगाई जाए और इसकी पैदावार बढ़े।

कश्मीर से एयरलिफ्ट कर बागवानी उपज को पहुंचाया जा रहा बड़े शहरों तक

उधर कश्मीर में बागवानी विभाग ने जल्द खराब होने वाली बागवानी उपज को कश्मीर से दिल्ली और मुंबई जैसे बाजारों के लिए एयरलिफ्ट की सेवा शुरू कर दी है। कृषि एवं बागवानी विभागों के प्रमुख सचिव नवीन कुमार चौधरी ने कश्मीर घाटी के विभिन्न विक्रेताओं की चेरी ले जाने वाली वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। श्रीनगर हवाई अड्डे से दिल्ली और मुंबई के लिए एयरलिफ्ट करके बागवानी महकमे ने किसानों में एक नयी उम्मीद पैदा की है कि किसान ट्रेन की तरह घाटी में एयरलिफ्ट कराकर उनकी फसल को बर्बाद होने से बचाया जा सकेगा।

पीएम मोदी का 2024 तक देश के किसानों की आमदनी को दोगुना करने का लक्ष्य

परम्परागत कृषि से हटकर बाजार की मांग के अनुरूप फसल उत्पादन के लिए महकमे ने किसानों को प्रोत्साहित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2024 तक देश के किसानों की आमदनी को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। एक लाख करोड़ रुपये से कृषि आधारभूत ढांचा कोष की स्थापना कृषि क्षेत्र में एक नयी क्रांति की पहल ही है। आज जम्मू-कश्मीर में मछली पालन से लेकर बागवानी और दूसरे उद्योगों में स्थानीय नौजवानों को प्रोत्साहित करके हुकूमत ने खेती बाड़ी को अब घाटे का सौदा नहीं रहने दिया है।

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