भगवान तिरुपति बालाजी मंदिर का रहस्य

भगवान तिरुपति बालाजी मंदिर का रहस्य

समय भास्कर/ धर्म डेस्क 

क्या आपको पता है भगवान तिरुपति बालाजी मंदिर के बारे में भगवान बालाजी की चमत्कारी वरदानी मूर्ति का सच ? आखिर क्या राज है इस मूर्ति में लगे मूर्ति के असली बालों का ? और जानेंगे सैकड़ों लोगों के बाल दान करने के पीछे का रहस्य ? आइए जानते हैं तिरुपति बालाजी मंदिर के रहस्य के बारे में भारत में बहुत सारे चमत्कारी मंदिर हैं और उनमें से एक  दक्षिण भारत में त्रिरुपति मे स्थित भगवान तिरुपति बालाजी का मंदिर एक है । यह मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर  जिले में तिरुमला की पहाड़ियों पर स्थित है । लाखों लोग इस मंदिर में भगवान वेंकटेश्‍वर का आशीर्वाद लेने के लिए एकत्र होते हैं।

यहा पर भगवान श्री विष्णु के अवतार भगवान बालाजी पत्‍नी पद्मावती के साथ साक्षात विराजमान है इस मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन है ।

1- भगवान की मूर्ति है स्वयंभू

आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां पर स्थित भगवान बालाजी की मूर्ति स्वयंभू है मानव निर्मित नहीं है बल्कि स्वयं प्रकट हुई है ।मूर्ति को देखने पर यह सजीव लगती है ।

2- मूर्ति पर लगे बाल- इस मूर्ति की सबसे बड़ी खासियत है इसमें लगे रेशमी बाल जो हमेशा सुलझे साफ दिखाई देते हैं। ऐसा माना जाता है की भगवान स्वयं बिराजमान रहते है ।

3- बाल दान का है महत्व –  तिरुपति बालाजी मंदिर में बाल दान करने का बहुत महत्व है लोग यहां अपनी मन्नत पूरी होने पर बाल दान करते हैं । केश दान की परंपरा का महत्व इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां पर प्रतिदिन 20,000 से ज्यादा लोग केश  दान करने आते हैं । लोगों की ऐसी भी  मानता है कि केस दान करने से शरीर में भरी नकारात्मक ऊर्जा, असामाजिक सोच और अहंकार को यहा आकर समर्पित कर देते हैं।

4- समुद्री लहरों की आवाज –

इस मंदिर में विराजमान भगवान वेंकटेश की मूर्ति की अपनी एक और विशेषता है ध्यान से सुना जाए तो मूर्ति से समुद्री लहरों की आवाजों सुनाई देती है । वैज्ञानिक भी इस रहस्य का पता आज तक नहीं लगा पाए

5- गुप्त गाँव –

भगवान बालाजी के मंदिर से 23 किमी दूर एक गांव है, और यहां बाहरी व्‍यक्तियों का प्रवेश वर्जित है।  से लाया जाता है । मान्‍यता है कि बालाजी को चढ़ाने के लिए फल, फूल, दूध, दही और घी सब यहीं से आते हैं। इस गांव में महिलाएं सिले हुए कपड़े धारण नहीं करती हैं। मंदिर में प्रसाद के लिए लगभग तीन लाख लड्डू बनाए जाते हैं ।

6- निरंतर जलता दीपक –

आपको जानकर हैरानी होगी कि भगवान बालाजी के गर्भ गृह में जल रहा दीपक हजारों सालों से बिना घी और तेल के निरंतर चल रहा है अब यह कैसे होता है इसका पता तो आज तक नहीं चल पाया।

7- गुरवार को चन्दन – भगवान बालाजी के हृदय में महालक्ष्मी विराजमान है इसका पता तब चलता है जब हर गुरुवार को मूर्ति पर चंदन का लेप लगाया जाता है तभी लगाए गए चंदन के लिए पर मां लक्ष्मी की छवि उभर आती है।

8-  तुलसी पत्र – तुलसी पत्र का सनातन परंपरा में काफी महत्व है लेकिन यहां पर भगवान बालाजी को चढ़ाए गए तुलसी पत्र को प्रसाद के रूप में भक्तों को नहीं दिया जाता है बल्कि मंदिर में स्थित एक कुएं में डाल दिया जाता है जिसके बारे में ऐसा माना जाता है कि उसको देखना अशुभ है।

9- मंदिर के मुख्य द्वार पर छड़ी –

मंदिर के मुख्य द्वार पर जाएं और एक छड़ी है मान्यता यह है कि इस छड़ी से ही बाल अवस्था में भगवान बालाजी की पिटाई की गई थी जिसके कारण उनकी ठोढ़ी पर चोट लग गई थी । तब से आज तक उनकी ढोड़ी पर हर शुक्रवार को चंदन का लेप लगाया जाता है ताकि उनका घाव ठीक हो जाए।

10 – मूर्ति की सही स्थिति – गर्भ ग्रह में स्थित मूर्ति के दर्शन करने पर लगता है कि मूर्ति गर्भ ग्रह के बीचो-बीच स्थित है वही बाहर से मूर्ति को देखने पर मूर्ति दाई और प्रतीत होती है।

11- धोती और साड़ी –  भगवान बालाजी की मूर्ति को धोती और साड़ी से प्रतिदिन सजाया जाता है मान्यता है कि भगवान बालाजी में मां लक्ष्मी का रूप समाहित है इसी कारण ऐसा किया जाता है

12- पचाई कपूर- भगवान बालाजी की प्रतिमा पर खास तरह का पचाई कपूर लगाया जाता है। वैज्ञानिको का मानना है कि इसे किसी भी पत्‍थर पर लगाया जाता है तो वह कुछ समय के बाद ही चटक जाता है। लेकिन भगवान की प्रतिमा पर कोई असर नहीं होता।

13- मूर्ति को पसीना – भगवान बालाजी की मूर्ति के बारे में आपको जानकर आश्चर्य होगा की मूर्ति का तापमान 110 फॉरेनहाइट रहता है जिससे मूर्ति पर हमेशा पसीना बना रहता है और मंदिर के पुजारी उसको पोछते रहते हैं । इस मूर्ति का तापमान भी अपने आप में लोगों के लिए एक और कौतूहल का विषय है।

14- सबसे अमीर मंदिर –  यह मंदिर दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में शुमार होता है पर यहां प्रतिदिन लाखों करोड़ों रुपए का दान चढ़ाया जाता है । इस  प्राचीन मंदिर की सबसे अद्भुत बात यह है कि यहां पर मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।

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