आरएसएस कार्यकर्ताओं ने मनाया मातृ दिवस

आरएसएस कार्यकर्ताओं ने मनाया मातृ दिवस

– संघ की कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के आह्वान पर हुए घरों में कार्यक्रम

फिरोजाबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के आवाह्न पर चंद्रनगर विभाग के कार्यकर्ताओं ने मातृ दिवस के अवसर पर उत्साह पूर्वक अपने घरों में अपनी मां का पूजन किया। इंटरनेट मीडिया पर घरों में अपनी मां का पूजन करते हुए स्वयंसेवकों ने जमकर फोटो शेयर किए गए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं उससे जुड़े अनुषांगिक संगठनों के कार्यकर्ताओं से कुटुंब प्रबोधन गतिविधि द्वारा रविवार को मातृ दिवस मनाए जाने का आह्वान किया गया था। जिसके अनुसार प्रातः सभी कार्यकर्ताओं ने अपनी जन्मदात्री माता का सनातन परंपरा के अनुसार पूजन किया।अधिकांश कार्यकर्ताओं ने माता-पिता को घरों में देवस्थान के समीप बिठा कर उनका चरण वंदन कर तिलक लगाया व मिष्ठान आदि समर्पित करने के उपरांत उनसे आशीर्वाद लिया।

मातृ दिवस की सुबह से ही माता– पिता का पूजन करते हुए पारिवारिक फोटो को बहुतायत में शेयर किया गया। किशोरों और युवाओं में अपने मां– पिताजी के साथ ली गई सेल्फी को इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट करने का खासा क्रेज रहा।
इस मौके पर चंद्रनगर विभाग प्रचारक धर्मेंद्र भारत ने बताया कि सनातन संस्कृति “मातृ प्रधान” संस्कृति है। जिसमें पुरुषों की अपेक्षा माताओं को प्रथम स्थान दिया जाता है। ईश्वर के युगल नामों में सीताराम, राधेश्याम, लक्ष्मी– नारायण प्रमुख हैं। जिनमें देवताओं से पहले देवियों का स्थान निर्धारित रहता है।

हमारे देश में हजारों साल पहले ऋषियों की तरह ही ऋषिकाएं भी त्याग– तपस्या एवं आध्यात्मिकता के शीर्ष शिखरों पर विराजमान रहती थीं। सती सावित्री ने यमराज से अपने पति के प्राणों को छुड़ाया था। वहीं माता अनुसूइया के यहां आए ब्रह्मा, विष्णु, महेश को उन्होंने अपने तपोबल से बालक रूप में परिवर्तित कर दिया था। हमारे महान आध्यात्मिक ग्रंथ रामायण में वर्णित है कि त्रिलोक विजय रावण के द्वारा माता सीता का अपरहण कर ले जाने के उपरांत भी मां सीता की सतीत्व शक्ति के कारण रावण उनको स्पर्श भी नहीं कर सका था।

मां सीता की रक्षा में राम–रावण युद्ध द्रोपदी के स्वाभिमान के लिए महाभारत का युद्ध जगत प्रसिद्ध है। भारत पर मुगलों के आक्रमण के काल में माता जीजाबाई के लालन – पालन से छत्रपति शिवाजी जैसे अजेय वीरों ने आक्रांताओं से लोहा लिया था। इसी काल में हजारों पद्मिनियों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने स्वजनों के सिर पर केसरिया पगड़ी बांधकर युद्ध में भेजा और अपने सतीत्व की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

भारत की ऐसी मातृशक्ति के नमन–वंदन और उनके महत्व को आधुनिक काल में याद दिलाने के उद्देश्य से एवं भारत के संयुक्त परिवारों की परंपरा को जीवंत रखने, माता के संस्कारों द्वारा जीवन को सार्थक बनाने के लिए मातृ पूजन का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि आगामी 15 मई को परिवारों में सामूहिक सहभोज  का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

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