डा.आंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में आरएसएस ने की गोष्ठी

डा.आंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में आरएसएस ने की गोष्ठी

– आरएसएस के विभाग कार्यालय में जुटे गणमान्य नागरिक

फिरोजाबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधि सामाजिक समरसता द्वारा बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के जन्मदिन के उपलक्ष्य में उनके महान व्यक्तित्व पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
आरएसएस के विभाग कार्यालय चंद्र भवन में राणाजी सभागार में हुई विचार गोष्ठी में समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

चंद्रनगर विभाग प्रचारक धर्मेंद्र भारत ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा साहब ने छुआछूत को प्रत्यक्ष रूप से देखा था।विदेशी दासता के दौर में तत्कालीन समाज में फैली छुआछूत के कारण उन्हें उन्हें कक्षा के बाहर बैठा दिया जाता था। उच्च विद्यालय में भी इसी तरह का व्यवहार उनके सतह हुआ।

विद्यार्थी जीवन में बहुत यातनाएं उन्होंने झेली। विद्वानता के प्रतीक बाबा साहब का पुराना इतिहास देखा जाए तो डॉक्टर हेडगेवार जी एवं बाबा साहब के विचारों में समानता थी। क्योंकि वामपंथी संसदीय लोकतंत्र को नहीं मानते थे। बाबा साहब और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वामपंथी विचारधारा का सदैव विरोध करता था।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विचार सदैव समान नागरिक संहिता का रहा है। बाबासाहेब चाहते थे कि संस्कृत हमारी राजभाषा बने। इस संबंध में उन्होंने राजभाषा बनाने के लिए प्रस्ताव भी भेजा लेकिन वह प्रस्ताव पास नहीं हुआ।
बाबासाहेब प्रारंभ से ही भारतीय संस्कृति को मानते थे। उन्होंने कहा कि ईशाई और इस्लामियत विदेशी धर्म से निकलने वाले विचार हैं।

मेरा जन्म हिंदू धर्म में हुआ है लेकिन मेरी मृत्यु बौद्ध धर्म में होगी। हिंदू एकता के प्रबल समर्थक रहे बाबा साहब ने अपने समय में कश्मीर में धारा 370 लगाने का विरोध भी किया। उन्होंने शेख अब्दुल्लाह को पत्र लिखा। जिसमें उन्होंने कहा कि कश्मीर को भारत के समान अधिकार मिले हैं इसलिए धारा 370 की आवश्यकता नही है।बाबा साहब के विचार के अनुरूप वर्तमान समय में संघ ने भी इस पर निरंतर काम किया और वर्तमान समय में प्रत्यक्ष आपके सामने है कि कश्मीर में लोगों को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं।

14 फरवरी को डॉक्टर साहब का जन्मदिन प्रत्येक शाखाओं पर मनाया जाता है एवं उनके महान व्यक्तित्व पर चर्चा भी वर्ष होती है। डॉ हेडगेवार जी एवं बाबा साहब को मिलाकर एक पुस्तक भी लिखी गई है। जिसमें उनके दोनों की समानताएं उनके विचारों को व्यक्त किया गया है।

सह विभाग कार्यवाह बृजेश यादव ने कहा कि संविधान निर्माण में के लिए बाबासाहेब ने अथक प्रयास किया। वे सदैव समाज के लिए भी मार्गदर्शक रहे हैं। आज देश विरोधी शक्तियां हमें तोड़ने का काम कर रही हैं। लेकिन हम वसुधैव कुटुंब की भावना वाले भारतीयों को एकजुट बनकर रहना होगा।

दौरान अन्य वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि बाबा साहब ने सभी जातियों के लिए सदैव कार्य किया। जातिगत भेदभाव को समाप्त करने का काम भी वे निरंतर करते रहे। दलितों को एक नारा दिया “संघे शक्ति कलियुगे” हम संगठित रहें ।वर्तमान समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उसी कड़ी में हिंदू समाज को संगठित करने एवं सभी हिंदुओं को जोड़ने का काम कर रहा है।

गणेश सागर की अध्यक्षता में हुई कार्यक्रम में धर्मेंद्र महानगर प्रचारक, अभिषेक महानगर संपर्क प्रमुख, रमाकांत सामाजिक समरसता प्रमुख, अतुल सह सामाजिक समरसता प्रमुख, सौरव सह महानगर कार्यवाह, प्रेम चंद्र अग्निहोत्री नगर कार्यवाह, नगरों के सामाजिक समरसता प्रमुख एवं समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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