आयुर्वेद के क्लीनिकल ट्रायल के पंजीयन पोर्टल की शुरुआत

आयुर्वेद के क्लीनिकल ट्रायल के पंजीयन पोर्टल की शुरुआत

नई दिल्ली। केन्द्रीय आयुष मंत्री किरण रिजिजू ने आज भारत में क्लीनिकल परीक्षणों के पंजीयन के तहत आयुर्वेद के आंकड़ों के पोर्टल-सीटीआरआई की शुरुआत की। इस दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है,जिससे आयुर्वेद आधारित क्लीनिकल परीक्षणों की जानकारी विश्वभर में मिल सकेगी। पोर्टल की शुरुआत करते हुए केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि आयुर्वेद और योग भारत की समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत हैं और आयुर्वेद और भारतीय पारंपरिक ज्ञान के बारे में मानसिकता को बदलने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि लोगों की यह सोच गलत है कि आयुर्वेद वैज्ञानिक नहीं है।

राष्‍ट्रीय डिजिटल स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के बारे में बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आयुष मंत्रालय इस मिशन में अहम भूमिका निभायेगा। भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद और आयुष मंत्रालय के तहत आने वाले केन्द्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद ने मिलकर सीटीआरआई पोर्टल विकसित किया है। इस दौरान केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने चार और पोर्टलों-अमर, साही, र्ई-मेधा और आरएमआईएस का भी लोर्कापण किया।

उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुसार मानवों पर दवा,उपचार आदि का किसी भी तरह का क्लीनिकल ट्रायल सार्वजनिक रूप की किसी भी रजिस्ट्री में दर्ज किया जाना जरूरी है और भारत में यह काम विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से प्रमाणित सीटीआर-इंडिया पोर्टल पर किया जा रहा है।

ऐसा नहीं है कि आयुर्वेद में अभी तक क्लीनिकल ट्रायल नहीं हो रहे थे। आयुर्वेद में क्लीनिकल ट्रायल लगातार हो रहे हैं। आयुर्वेद की अपनी चिकित्सा पद्धति है और उसमें चिकित्सीय परीक्षण की अपनी शब्दावली है। यह शब्दावली अभी तक सीटीआरआई का हिस्सा नहीं बन पाई थी। इस वजह से आयुर्वेद में क्लीनिकल ट्रायल करने वालों को अनुवाद और ऐलोपैथी की चिकित्सीय शब्दावली का सहारा लेना पड़ता था,लेकिन अब भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान-राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान सांख्यिकी संस्थान ने सीटीआरआई पोर्टल में आयुर्वेद की चिकित्सीय शब्दावाली को शामिल कर लिया है। इसके लिए आयुष मंत्रालय की ओर से पूर्व में विकसित किए गए नमस्ते, (एनएएमएएसटीई) पोर्टल का सहारा लिया गया। इस पोर्टल में आय़ुष मंत्रालय की ओर से आर्युवेद शास्त्र में दर्ज रोगों को इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन आफ डिजीज के मानकों के हिसाब से कोड कर दर्ज किया गया है।सीटीआरआई रजिस्ट्री में नमस्ते पोर्टल से 3866 कोड इस तरह के लिए गए हैं। मतलब यह कि आयुर्वेद के तहत क्लीनिकल ट्रायल में अब ट्रायल की जानकारी,परिणाम आदि की जानकारी आयुर्वेद की शब्दावली में ही उपलब्ध हो सकेगी।

क्या होते हैं क्लीनिकल ट्रायल?

किसी भी दवा, उपचार आदि को सार्वजनिक रूप से लोगों को उपलब्ध कराने से पहले यह देखा जाना जरूरी होता है कि दवा, उपचार आदि का मानव पर प्रभाव क्या है। इसका परीक्षण खुद को प्रस्तुत करने वालों पर वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है। यह ठीक ऐसे ही है जैसे की कोविड की वैक्सीन को बाजार में उतारने से पहले कुछ लोगों से आग्रह किया गया था कि वे वैक्सीन लगाकर देखें। इन लोगों को विशेषज्ञों की निगरानी में यह टीका लगाया गया था और टीके के आशाजनक परिणाम सामने आने पर अन्य लोगों के लिए टीका उपलब्ध कराया गया।

क्यों जरूरी है क्लीनिकल रजिस्ट्री

दुनिया में नई दवा की खोज, रोगों के इलाज आदि के लिए क्लीनिकल ट्रायल लगातार किए जा रहे हैं। परेशानी यह है कि इन परीक्षणों के परिणाम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हो पाते और इस कारण ट्रायल की सही जानकारी उपलब्ध न होने की आशंका बनी रहती है। इसी को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने क्लीनिकल ट्रायल की ऑनलाइन रजिस्ट्री बनाना अनिवार्य किया है। भारत में यह काम सीटीआरआई के माध्यम से किया जा रहा है और यह रजिस्ट्री विश्व स्वास्थ्य संगठन की रजिस्ट्री का भी हिस्सा है।

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