आपसी विवाद में प्रधानाध्यापक एवं सहायक अध्यापिका सस्पेंड

निलंबन पत्र में दोनों टीचरो पर लगाए समान आरोप

बीएसए ने मूल शिकायतकर्ता शिक्षिका को 70 किलोमीटर दूर किया संबद्ध

मथुरा। संविलियत विद्यालय जचौंदा ब्लॉक मथुरा के प्रधानाध्यापक ज्ञानेश शर्मा एवं सहायक अध्यापिका रागिनी अग्रवाल के मध्य विवाद के कारण जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दोनों को निलंबित करते हुए ब्लॉक नौहझील के अलग-अलग पूमा विद्यालयों में उपस्थिति हेतु संबंद्ध किया है।

प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मथुरा महेंद्र सिंह यादव द्वारा जारी किए गए प्रधानाध्यापक एवं सहायक अध्यापिका दोनों के निलंबन आदेश में समान आरोप लगाते हुए कहा गया है,कि खंड शिक्षा अधिकारी मथुरा से प्रकरण की जांच कराई गई। जांच में कहां है कि पूर्वाग्रह से ग्रसित होने के कारण ज्ञानेश शर्मा एवं रागिनी अग्रवाल के मध्य विवाद होता रहता है। इन दोनों के आपसी विवाद के कारण विद्यालय में अशांति,शिक्षण कार्य में बाधा,विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के आचरण पर प्रतिकूल प्रभाव,विद्यालय में किसी प्रकार की अप्रिय घटना घटित होना,दोनों के द्वारा शिक्षक गरिमा के प्रतिकूल व्यवहार करना,आपसी विवाद से विभाग की छवि धूमिल होना की पुष्टि की गई है।

खंड शिक्षा अधिकारी मथुरा की दिनांक 16 जून की जांच आख्या के आधार पर ज्ञानेश शर्मा प्रधानाध्यापक संविलियत विद्यालय जचौंदा को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक नियमावली 1999 के नियम- 4 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके विरुद्ध नियम-7 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए जांच हेतु खण्ड शिक्षा अधिकारी ब्लॉक मथुरा एवं खण्ड शिक्षा अधिकारी नगर क्षेत्र मथुरा को पदेन जांच अधिकारी बनाया गया है।निलंबन अवधि में उपस्थिति के लिए प्रधानाध्यापक ज्ञानेश शर्मा को ब्लॉक नौहझील के पूर्व माध्यमिक विद्यालय भिदौनी में संबद्ध किया गया है।

बीएसए ने उक्त आरोपों में शिकायतकर्ता रागिनी अग्रवाल, सहायक अध्यापिका संविलियत विद्यालय जचौंदा को भी निलंबित करते हुए ब्लॉक नौहझील के एकल विद्यालय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अहमदपुर में उपस्थिति के लिए सम्बद्ध किया है।विभागीय सूत्र बताते हैं ,कि इस प्रकरण में बीएसए ने मूल शिकायतकर्ता रागिनी अग्रवाल को भी निलंबित कर शासन के आदेश के विपरीत महिला होते हुए भी निवास स्थान से 80 किमी दूर नौहझील ब्लॉक के विद्यालय में संबंद्ध किया गया है। जबकि शासन और विभागीय आदेश हैं,कि महिलाओं को उनकी सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए उनके उनके निवास स्थान के समीपस्थ और सार्वजनिक आवागमन के साधन की पहुंच वाले विद्यालयों में नियुक्त किया जाए। उक्त प्रकरण को लेकर शिक्षकों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

 

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