राष्ट्रपति ने गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की रखी आधारशिला

राष्ट्रपति ने गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की रखी आधारशिला

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के मन में बनी गोरखपुर के ”सिटी ऑफ नॉलेज” की छवि को महज पौने तीन वर्ष में ही धरातल पर उतार दिया। 28 अगस्त को एक दिन में दो विश्वविद्यालयों की सौगात देने पहुंचे राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने अब मन में कल्पित गोरखपुर की ”ज्ञान की नगरी” की छवि को न सिर्फ साकार होते देखा,बल्कि उसके साक्षी भी बने।

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शनिवार को महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी। एक विश्वविद्यालय की नींव रखने और दूसरे का लोकार्पण करने पहुंचे राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने यहां एक कार्यक्रम को भी संबोधित किया। आयुष विश्वविद्यालय की आधारशिला रखने के दौरान उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा, इंद्र देव भी अपना आशीर्वाद देने के लिए हम सभी के बीच में आ गए हैं। राष्ट्रपति ने आगे जोड़ते हुए कहा, भारतीय शास्त्रों में एक मान्यता है कि कोई शुभ कार्य जब सम्पन्न हो रहा हो, उस दौरान यदि आकाश से पानी की बूंदे गिरने लगे तो उसे कहा जाता है कि यह कार्य शुभ से अत्यतम् शुभम हो गया है। बता दें, कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश के आयुष मंत्री धर्म सिंह सैनी भी मौजूद रहें।

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा, योग के माध्यम से सामाजिक जागरण की अलख जगाने वाले और भारतवर्ष में गुरुओं की महिमा को पुनर्स्थापित करने वाले गोरखनाथ जी ने कहा था कि “यद सुखम तद् स्वर्गम, यद दोखम तद् नर्कम” अर्थात जो सुख है, वही स्वर्ग है और जो दुख है, वही नरक। आगे जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि भारत वर्ष में वैदिक काल से ही आरोग्य पर विशेष बल दिया जाता रहा है। वेदों, उपनिषदों, पुराणों और अन्य प्राचीन ग्रंथों में भी आरोग्य की महत्ता का वर्णन है। कहा गया है कि “शरीर माध्यम खलू धर्म साधनम” अर्थात शरीर ही समस्त कर्तव्यों को पूरा करने का पहला साधन होता है। इसलिए शरीर को स्वस्थ रखना बेहद आवश्यक है। आप सबका तथा समस्त जनों का शरीर निरोगी रहे, स्वस्थ रहे, इस उद्देश्य को फलीभूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सफल बनाने के लिए महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। आप सभी के बीच आकर इस विश्वविद्यालय का शिलान्यास करते हुए मुझे बेहद प्रसन्नता हो रही है।

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भारत में अनेक प्रकार की चिकित्सा पद्धतियां प्रचलित रही हैं। भारत सरकार ने आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धतियों, जिन्हें सामूहिक रूप से आयुष के नाम से जाना जाता है के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। इन चिकित्सा पद्धतियों की व्यवस्थित शिक्षा और अनुसंधान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2014 में आयुष मंत्रालय का गठन किया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी वर्ष 2017 में आयुष विभाग की स्थापना की और अब राष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से युक्त आयुष विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने का सराहनीय निर्णय लिया है। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, मुझे विश्वास है कि इस विश्वविद्यालय से सम्बद्ध होकर प्रदेश के आयुष चिकित्सा संस्थान अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य कर सकेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा, मुझे बताया गया है कि पारम्परिक एवं प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों की विश्वसनीयता एवं स्वीकार्यता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्थापित किए जाने और जन स्वास्थ्य में योग की उपयोगिता को देखते हुए एक शोध संस्थान की स्थापना भी इस विश्वविद्यालय में की जाएगी। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही अनेक चिकित्सा पद्धतियां प्रचलित रही हैं। देश में सिद्ध चिकित्सा पद्धति का विकास नाथों एवं सिद्धों द्वारा किया गया। आज के समय में यह पद्धति दक्षिण भारत में लोकप्रिय है। ऐसा विश्वास है कि खनिजों और धातुओं औषधि के रूप में तैयार करके इमरजेंसी मेडिसिन के रूप में इनके प्रयोग के प्रवर्तकों में बाबा गोरखनाथ प्रमुख रहे हैं। इसलिए उत्तर प्रदेश में स्थापित किए जा रहे आयुष विश्वविद्यालय का नाम महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय रखा जाना सर्वथा उचित है।

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, गोरखनाथ जी का जीवन उदात्त था, उन्होंने सदाचरण, ईमानदारी, कथनी और करनी के मेल और वाय आडम्बरों की मुक्ति की शिक्षा दी। योग को उन्होंने दया दान का मूल कहा। उनके चरित्र, व्यक्तित्व एवं योग सिद्धि से संत कबीर इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने गुरु गोरखनाथ को कलिकाल में अमर कहकर उनकी प्रशंसा की थी। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, गोस्वामी तुलसीदास ने भी योग के क्षेत्र में गुरु गोरखनाथ की प्रतिष्ठा स्वीकार करते हुए कहा था कि “गोरख जगायो जोग” अर्थात गुरु गोरखनाथ ने जनसाधारण में योग का अभूतपूर्व प्रचार और प्रसार किया है।

राष्ट्रपति ने कहा, भारत में योग मार्ग उतना ही प्राचीन है जितनी प्राचीन भारतीय संस्कृति है। योग को प्रतिष्ठित करने वाले गुरु गोरखनाथ निश्चय ही अत्यंत महिमा में आलौकिक प्रतिभा सम्पन्न युगदृष्टा महापुरुष हुए हैं, जिन्होंने समस्त भारतीय तत्व चिंतन को आत्मसात करते साधना के एक अत्यंत निर्मल मार्ग का प्रवर्तन किया। इसलिए वे कहते थे कि “योग शास्त्रम पठ्येत नित्यम किम् अन्ययी शास्त्र विस्तरयी” अर्थात नित्य प्रति योग शास्त्र का अध्ययन करना ही पर्याप्त है,अन्य शास्त्र पढ़ने का आवश्यकता ही क्या है।

राष्ट्रपति ने कहा, भारतवर्ष विविधताओं में एकता का उत्तम उदाहरण है। जो कुछ भी लोक उपयोगी है, कल्याणकारी है, सहज उपलब्ध और सुगम है, उसे अपनाने में भारतवासी कभी संकोच नहीं करते। देश में विभिन्न प्रकार की चिकित्सा पद्धतियों का प्रचलन भी हमारी इसी सोच का परिणाम है। योग,आयुर्वेद और सिद्ध चिकित्सा विश्व को भारत को देन है। भगवान धनवतंरी को जहां आयुर्वेद का जनक माना जाता है वहीं ऋषि अगस्त को सिद्ध शिक्षा के संस्थापक के रूप में भी जाना जाता है। भारत में यूनानी चिकित्सा पद्धति भी अनेक क्षेत्रों में खूब लोकप्रिय है,जिस तरह चरक और सुश्रुत को औषधि शास्त्र एवं शल्य चिकित्सा का प्रवर्तन माना जाता है उसी प्रकार यूनानी चिकित्सा पद्धति के प्रणेता हिप्पोक्रेटिस को पश्चिमी दुनिया में चिकित्सा शास्त्र का जनक कहा जाता है।

राष्ट्रपति ने कहा ऋग्वेद के समय से योग का जुड़ाव भारत के जनमानस के साथ रहा है। सिंधु घाटी सभ्यता में मिले पुरा अवशेषों भी प्रमाणित हुआ है कि योग हमारी जीवनशैली का अंग रहा है। वर्तमान में योग की लोकप्रियता एवं महानता सर्वविदित है। योग को जीवन में उतार लेने पर व्यक्ति आरोग्य के साथ-साथ सकारात्मक उर्जा से भर जाता है और मानसिक, शारीरिक तथा भावनात्मक तौर पर मजबूत बनता है। तनाव और चिंता से भरे आधुनिक समय में मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य का मार्ग योग से उपलब्ध होता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी ने प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा दिया और स्वीकार्यता दी। कोविड में आयुष ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पिछले दो दशक में औषधीय खेती की और मांग बढ़ी है। इस विश्वविद्यालय से आयुष को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि बड़े भाग्य से मानव शरीर मिला है। इसकी सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है।

महर्षि पतंजलि ने अपने महान ग्रंथ योग शास्त्र की रचना करके समस्त मानवता को एक आदर्श जीवन पद्धति की अमूल्य शिक्षा दी है। एक अन्य आयुष चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को दुनिया की प्राचीनतम औषधीय चिकित्सा प्रणालियों में से एक माना जाता है। आयुर्वेदिक उपचार में मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन बनाए रखते हुए समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। आज इंटीग्रेटेड सिस्टम ऑफ मेडिसन अर्थात समेकित चिकित्सा पद्धति का विचार पूरी दुनिया में मान्यता प्राप्त कर रहा है। अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियां एक-दूसरे की पूरक प्रणाली के रूप में लोगों को आरोग्य प्रदान करने में सहायक सिद्ध हो रही हैं। राष्ट्रपति भवन में भी एलोपैथिक चिकित्सा क्लीनिक के साथ आयुष आरोग्य केंद्र की सुविधा उपलब्ध है। हाल ही में राष्ट्रपति भवन परिसर में एक आरोग्य वन विकसित करने का काम भी शुरू कर दिया गया है।

बताना चाहेंगे कि इससे पहले राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद 10 दिसम्बर 2018 को भी गोरखपुर आए थे। तब उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह में बतौर मुख्य अतिथि परिषद के शताब्दी वर्ष 2032 तक गोरखपुर को ”सिटी ऑफ नॉलेज” बनाने का आह्वान किया था। लगभग पौने तीन वर्ष बाद राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने गोरखपुर में को आयुष विश्वविद्यालयों की सौगात दी है। दोबारा गोरखपुर पहुंचकर शनिवार को राष्ट्रपति कोविंद उनकी मंशा के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयास का परिणाम देखकर बेहद प्रफुल्लित नजर आए।

गौरतलब हो, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उनके राजनीतिक जीवन के शुरुआत से ही शिक्षा-चिकित्सा रुचि का विषय रहा है। राष्ट्रपति से मिली प्रेरणा के बाद इसमें उनकी रुचि लगातार बढ़ती गई। शायद उसी प्रेरणा का परिणाम है कि योगी आदित्यनाथ ने महज पौने तीन वर्ष में ही राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के मन मे संजोए गए सपने को धरातल पर उतार दिया है। अब गोरखपुर बहुत तेजी से ”ज्ञान की नगरी” बनने की दिशा में बढ़ने लगा है।

गौरतलब हो गोरखपुर के भटहट ब्लॉक के पिपरी एवं तरकुलही में 52 एकड़ भूमि पर बनने जा रहे राज्य के पहले आयुष विश्वविद्यालय में एक ही परिसर में आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथी और योग चिकित्सा की पढ़ाई और उस पर शोध कार्य होगा। क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी डॉ. प्रकाश चंद्र के मुताबिक प्रदेश के आयुष विद्या के सभी 94 कॉलेज इस विश्वविद्यालय से संबद्ध होंगे। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में आयुर्वेद के 67 कॉलेज (8 सरकारी एवं 58 निजी), यूनानी के 15 कॉलेज (2 सरकारी एवं 13 निजी) तथा होम्योपैथी के 12 कॉलेज (9 सरकारी एवं 3 निजी) अलग-अलग विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं। इसके चलते इन आयुष कॉलेजों के डिग्री/डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में कुछ भिन्नता रहती है। आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध होने से सभी कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में एकरूपता रहेगी और सत्र नियमन भी संभव होगा।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आयुष विश्वविद्यालय में आयुष कॉलेजों की संबद्धता एवं अन्य प्रशासनिक कार्य सत्र 2021-22 से एवं विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य सत्र 2022-23 से प्रारंभ करने के निर्देश पहले ही दे चुके हैं। गोरखपुर में इस विश्वविद्यालय के खुलने से पूर्वांचल की छह करोड़ से अधिक जनता को चिकित्सा का एक और बेहतर विकल्प मिलेगा।

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