ऑस्ट्रेलिया के विदेश और रक्षा मंत्रियों से प्रधानमंत्री ने की मुलाकात

 ऑस्ट्रेलिया के विदेश और रक्षा मंत्रियों से प्रधानमंत्री ने की मुलाकात

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रविवार शाम को ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मारिस पायने और रक्षा मंत्री पीटर डटन ने मुलाकात की। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई। भारत और ऑस्ट्रेलिया के विदेश और रक्षा मंत्रियों की ‘टू प्लस टू’ बैठक प्रक्रिया में भाग लेने के बाद मेहमान नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी से शिष्टाचार मुलाकात की। मुलाकात के दौरान पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने पर बनी सहमति को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।इसके पूर्व मेहमान नेताओं ने अपने समकक्ष रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ ‘टू प्लस टू’ प्रक्रिया के तहत द्विपक्षीय,क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर व्यापक विचार-विमर्श किया। अफगानिस्तान का घटनाक्रम और हिन्द-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर विशेष रूप से चर्चा हुई।

भारत और ऑस्ट्रेलिया कर रहे करीबी सहयोग
पीएम मोदी से मुलाकात के बाद विदेश मंत्री मारिस पायने ने एक ट्वीट में कहा कि हमने नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, मुक्त एवं समावेशी हिन्द-प्रशांत क्षेत्र, द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों पर विचार-विमर्श किया। भारत और ऑस्ट्रेलिया एक दूसरे के दीर्घकालीक साझेदार हैं। पायने ने ‘टू प्लस टू’ बैठक के बारे में कहा कि हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में अपने साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया करीबी सहयोग कर रहे हैं।

विचार-विमर्श में अफगानिस्तान का घटनाक्रम रहा मुख्य मुद्दा
बैठक के बाद चारों नेताओं ने एक साझा प्रेसवार्ता को संबोधित किया। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि विचार-विमर्श में अफगानिस्तान का घटनाक्रम मुख्य मुद्दा था। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पारित प्रस्ताव 2,593 के अनुरूप साझा रुख अपनाना चाहिए।

आतंकवाद का केन्द्र भारत के निकट पड़ोस में
न्यूयार्क में ट्वीन टावर पर हुए आतंकवादी हमले की 20वीं सालगिरह का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने कहा कि यह उन्हें आतंकवाद से किसी भी तरह का समझौता किए बिना कार्रवाई करने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का केन्द्र भारत के निकट पड़ोस में है,इसलिए हमें इससे उत्पन्न खतरे तथा इसका सामना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विशेष ध्यान देना है।

‘क्वाड’ को ‘नाटो’ बताया जाना शीत युद्ध की मानसिकता का परिचायक
भारत-अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त मंच क्वाड का उल्लेख करते हुए डॉ.जयशंकर ने इसके बारे में चीन की आपत्तियों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि क्वाड को ‘एशिया के नाटो’ का बताना गलत है। उन्होंने कहा कि क्वाड चार देशों के सहयोग का एक मंच है। इसका लक्ष्य सदस्य देशों के साथ ही दुनिया का कल्याण करना है। उन्होंने कहा कि चीन द्वारा क्वाड को नाटो बताया जाना शीत युद्ध की मानसिकता का परिचायक है। जहां तक हमारा संबंध है, हमारा ध्यान अतीत नहीं बल्कि भविष्य पर केन्द्रित है। क्वाड वैश्वीकरण और परस्पर निर्भरता की हकीकत को उजागर करता है। विदेश मंत्री ने कहा कि क्वाड ने अपना ध्यान कोरोना वैक्सीन के उत्पादन और वितरण तथा दुनिया में आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने पर केन्द्रित किया है। इन गतिविधियों का नाटो या किसी अन्य सैन्य गठबंधन से तुलना करने का कोई औचित्य नहीं है।

‘क्वाड’ हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त और समावेशी व्यवस्था का समर्थक
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पायने ने कहा कि क्वाड देश हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में भावी व्यवस्था में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन ‘आसियान’ को बहुत महत्व देते हैं। हम आसियान की केन्द्रीय भूमिका के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि क्वाड हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त और समावेशी व्यवस्था का समर्थक है। पायने ने अफगानिस्तान के घटनाक्रम के संबंध में कहा कि पिछले दो दशकों के दौरान महिला सशक्तिकरण की दिशा में हुई उपलब्धियों को गंवाना नहीं चाहिए। अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की यह जिम्मेदारी है कि वह अफगानिस्तान में पहले जैसे हालात कायम न होने दें।

 

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