अब विदेशियों के मुंह में भी घुलेगी बिहार की मगही पान

अब विदेशियों के मुंह में भी घुलेगी बिहार की मगही पान

बिहार।भारत विविधताओं से भरा हुआ है। यहां हर राज्य अपने आप में खास है। हर राज्य की अपनी एक पहचान है। बनारसी पान तो आपने खूब सुना होगा,लेकिन बिहार की मशहूर मगही पान का स्वाद,पान के दिवाने भला कैसे भूल सकते हैं। इसी मगही पान को एपीडा के सहयोग से अब विदेश निर्यात करने की भी तैयारी चल रही है।

जीआई टैग उत्पादों का होगा निर्यात

दरअसल कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) व बिहार कृषि विश्वविद्यालय,सबौर के बीच टाई अप होने जा रहा है। इसमें जीआई टैग प्राप्त उत्पाद मखाना,जर्दालु आम,कतरनी चावल,लीची एवं मगही पान का एक्सपोर्ट करने का प्लान है। विदेशों में निर्यात करने के लिए कुछ क्वालिटी टेस्ट की जरूरत होती है। टेस्ट में उत्पाद के ओके होने के बाद ही उसका निर्यात किया जा सकता है। जाहिर है पान उत्पादक किसानों को अब ज्यादा मुनाफा होगा।

मगही पान के पत्ते का साल्मोनेला टेस्ट जरूरी

पान अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. एसएन दास ने एपीडा के डीजीएम स्मिधा गुप्ता से बातचीत हुई। इस दौरान मगही पान के पत्ते को निर्यात करने संबंधी विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि विदेशों में निर्यात करने के लिये मगही पान के पत्ते की साल्मोनेला टेस्ट आवश्यक है। यह टेस्ट गुड़गांव में होता है। गुड़गांव की फेयर लेबोरेटरी में इसकी जांच होगी। टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद ही मगही पान के पत्ते को विदेशों में निर्यात किया जा सकेगा। एपीडा के डीजीएम स्मिधा गुप्ता ने कोलकाता के एएम एक्सपोर्टर से पान अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. एसएन दास ने बातचीत करायी है।

सेफ्टी सर्टिफिकेट मिलना जरूरी

इंग्लैंड,अमेरिका,फ्रांस व अरब देशों में निर्यात एएम एक्सपोर्टर ने मगही पान के पत्ते का टेस्ट रिपोर्ट सही आने पर उसे विदेशों में एक्सपोर्ट करने का आश्वासन दिया है। एक्सपोर्टर ने पान अनुसंधान केंद्र ने नालंदा के इस्लामपुर आकर मगही पान उत्पादक किसानों से मिलने की बात कही है। माइक्रो बायोलॉजिकल टेस्ट में सेफ्टी सर्टिफिकेट मिलने के बाद मगही पान के पत्ते को इंग्लैंड,अमेरिका, फ्रांस व अरब देशों में निर्यात किया जायेगा। इससे मगही पान उत्पादक किसानों को काफी लाभ होगा।

केंद्र के प्रभारी डॉ.एसएन दास ने मगही पान उत्पादक किसानों के हित में यह कार्य करने के लिये बिहार कृषि विश्वविद्यालय,सबौर के वाइस चांसलर डॉ.आर.के.सोहाने के प्रयास की प्रशंसा की। हालांकि अब सब कुछ माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट पर निर्भर करता है।

मगही पान उत्पादक किसानों को होगा लाभ

टेस्ट रिपोर्ट ठीक आयी तो मगही पान के पत्ते का निर्यात शुरू हो जायेगा। डॉ. एसएन दास ने बताया कि मगही पान के पत्ते के निर्यात होने से इसके उत्पादक किसानों के दिन बहुरेंगे। उन्हें बनारस ले जाकर मगही पान के पत्ते को औने-पौने दाम पर नहीं बेचना पड़ेगा। किसानों को समय पर भुगतान होगा और अधिक लाभ प्राप्त होगा। अभी पान उत्पादक किसान बनारस ले जाकर मगही पान बेचते हैं।

जीआई टैग है मगही पान

नालंदा के अलावा नवादा, गया एवं औरंगाबाद जिलों के हजारों किसान मगही पान की खेती करते हैं। पान के पत्ते की मार्केटिंग की सही व्यवस्था नहीं होने से किसानों को काफी नुकसान होता है। निर्यात होने से किसानों को फायदा होगा। बता दें कि बिहार की कुछ बेहद नामचीन पहचानों में मशहूर मगही पान भी है। इसे जीआई टैग प्राप्त है।

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