नेपाल की आर्मी अब करेगी बिजनेस

नेपाल। नेपाल की सेना अब कॉर्पोरेट आर्मी बनने जा रही है। यानी वो सेना जो मुनाफे वाली बिजनेस में पैसे लगाकर उससे पैसे कमाया करेगी। खबरों के मुताबिक सेना में इस बदलाव के लिए एक ड्राफ्ट भी दिया जा चुका है। हालांकि इसके बाद ही सेना को कॉर्पोरेट में बदलने की पेशकश का देश में ही विरोध शुरू हो चुका है।

माना जा रहा है कि नेपाल की आर्मी का ये कदम पाकिस्तान आर्मी से प्रेरित है। वहां की सेना ने अपने निवेश से उद्योगों का बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया है।इसमें सबसे बड़ा उद्योग रीयल एस्टेट का है। सेना डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी के नाम से कमर्शियल और रिहायशी इमारतें बना रही है,जो देश के सभी बड़े शहरों में है।

साल 2016 में ही पाकिस्तानी सेना ने 50 कमर्शियल काम ले रखे थे, जिसमें आर्मी वेलफेयर फंड के पैसे लगाए जा रहे थे।केवल सेना के किए जा रहे इस कारोबार की कीमत लगभग 20 बिलियन डॉलर थी। ये साल 2016 की वैल्यू है,जो अब तक चौगुनी हो चुकी है। यही वजह है कि पाकिस्तान भले ही गरीबी से जूझ रहा है लेकिन वहां की सेना काफी अमीर है। यहां तक कि सारे राजनैतिक बदलाव वहां सेना की मर्जी से ही होते हैं।

असल में नेपाल में काफी सारे बदलाव चीन या फिर उसके मित्र देश पाकिस्तान की तर्ज पर हो रहे हैं।बता दें कि पाकिस्तान आर्मी काफी समय से कॉर्पोरेट सेना बनी हुई है,जो मुनाफा कमाने वाले 50 से भी ज्यादा उद्योगों में निवेश करती है।यही काम अब नेपाली सेना के लिए भी सोचा जा रहा है.काठमांडू पोस्‍ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेशनल डिफेंस फोर्स ने एक ड्राफ्ट पेश किया है ताकि नेपाली आर्मी एक्‍ट को बदला जा सके।इसके तहत सेना ने अपने फंड को अलग-अलग बिजनेस में लगाने के लिए सलाह भी मांगी है.ऐसे में सेना एक तरह से इनवेस्टर बन जाएगी जो उद्योगों में पैसे लगाते हैं।

इसके लिए नेपाल की सेना कई सालों से कोशिश भी कर रही थी। बता दें कि नेपाल आर्मी एक्ट 2006 के मुताबिक सेना बड़े-बड़े प्रोजेक्ट जैसे हाइड्रोपावर या बैंकिंग सेक्टर में पैसे नहीं लगा सकती है।इसी एक्ट को बदलने के लिए सेना के अधिकारी सालों से जोर लगा रहे थे ताकि सेना के जरिए ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके। फिलहाल नेपाल की सेना मेडिकल कॉलेजों,स्कूल,पेट्रोल पंप और बोतलबंद पानी की कंपनियों पर पैसे लगा रही है। इससे उतना मुनाफा नहीं हो पा रहा।

साल 2019 में काठमांडू पोस्ट ने सेना के फंड पर खुलासा करते हुए बताया था कि नेपाल आर्मी वेलफेयर फंड के पास 38.57 बिलियन रुपए अलग-अलग बैंकों में जमा हैं। साथ ही सेना का इनवेस्टमेंट लगभग साढ़े 5 बिलियन का है।अब बैंकों में रखे ढेर सारे पैसों को नेपाली सेना किसी फायदेवाले सेक्टर में लगाना चाहती है। जैसे हाइड्रोपावर जैसे बड़े प्रोजेक्ट में पैसे लगाने पर उससे काफी मुनाफा हो सकता है,जो बैंकों में पैसे रखने से बेहतर है। यही मानते हुए सेना एक्ट में संशोधन की बात कर रही है।

दूसरी ओर नेपाल के भीतर सेना के इस प्रस्ताव का जोरों से विरोध हो रहा है।रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सेना सीमाओं की रक्षा के काम से ज्यादा बिजनेस में इनवॉल्व हो जाएगी। इस बारे में नेपाल के सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ गेजा शर्मा वागले कहते हैं कि ये काफी डरावना है. सेना जितना ज्यादा नॉन-मिलिटरी कामों में जुड़ती जाएगी,उतना ही ये सुरक्षा मामले में कमजोर पड़ती जाएगी. प्राथमिक जिम्मेदारी को छोड़ उद्योगों के काम लेने की वजह से नेपाल की सेना पहले से ही आम लोगों और विपक्षी पार्टियों के निशाने पर रही है।

कुछ सालों पहले काठमांडू-तराई एक्सप्रेस वे के काम में भी सेना के निवेश पर काफी आलोचना हुई थी लेकिन अब ये पूरी तरह से कॉर्पोरेट की तरह बनने की बात कर रही है। यहां तक कि एक्ट में संशोधन से पहले से ही ये बिजली विभाग से संपर्क कर चुकी है और अपने पैसों के निवेश की बात भी कर चुकी है।एजेंसी