नगर निगम: मानक बोर्ड पर लंबाई चौड़ाई अंकित ना होने से मिलता है गोलमाल का मौका

नगर निगम: मानक बोर्ड पर लंबाई चौड़ाई अंकित ना होने से मिलता है गोलमाल का मौका

-निर्माण कार्यों में बड़े स्तर पर चल रही है धांधली 

फिरोजाबाद।  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार फिरोजाबाद नगर निगम को शहर में विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपए की धनराशि आवंटित कर रही है,लेकिन निगम के अफसर,नेता और ठेकेदार मिलकर विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपए की धनराशि को तड़ीपार करने में लगे हुए है। नगर निगम के द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों में बड़े स्तर पर धांधली चल रही है। इस समय विकास कार्यों के मानक बोर्ड मनमानी के माध्यम बन गए हैं। निगम में कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। जिसकी जितनी हैसियत है उसको उतना परसेंटेज जाता है।

उदाहरण,करीब 2 माह पूर्व नगर निगम द्वारा वार्ड नंबर-48 लेबर कॉलोनी में बिहार बस्ती में रईसुद्दीन की दुकान से पप्पू गैस तक एवं संगीता देवी,आमिद खां व शकील की गलियों में नाली तथा सीसी सडक़ का निर्माण कार्य किया गया था। यह टेंडर 950130 लाख रुपए का हुआ।मानक बोर्ड पर लंबाई चौड़ाई अंकित नहीं की गई थी इस संबंध में जब समय भास्कर ने खबर प्रकाशित की,तब जाकर नगर निगम के अधिकारियों ने उक्त बोर्ड पर लंबाई चौड़ाई अंकित करवाई थी।मानक बोर्ड पर सडक़ की लम्बाई 180 मीटर दशाई गई थी,जबकि नगर निगम के ऐस्टीमेट में लम्बाई 160 मीटर थी। सडक़ 160 मीटर से कुछ कम ही बनी। तथा सडक़ की चौड़ाई भी निर्धारित लम्बाई से थोड़ा कम थी।

शहर के विभिन्न वार्डो में नगर निगम द्वारा करोड़ों रुपए की धनराशि से निर्माण कार्य कराए जा रहें हैं। नगर निगम द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों में ठेकेदार मानक के विपरीत कार्य कर मनमानी कर रहे हैं वही निगम के अधिकारी मानकों की अनदेखी कर चुप्पी साधे बैठे हैं।मानक बोर्ड पर लंबाई चौड़ाई अंकित ना होने से नगर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों को गोलमाल का मौका मिलता है।प्रस्ताव में जितनी लंबाई चौड़ाई निर्धारित होती है,ठेकेदारों के द्वारा उससे कम ही सड़क,टोल इत्यादि का निर्माण कार्य किया जा रहा है। निर्माण कार्य मानकों के विपरीत कर ठेकेदारों के द्वारा लाखों रुपए बचाए जा रहे हैं। बगैर मौके पर जाए एमबी (कार्य का आकलन) कैसे हो जाता है? बहुत सारे कामों पर अवर अभियंता साइट जाते ही नहीं हैं और निर्माण कार्य को हरी झंडी मिल जाती है।उल्टा सीधा निर्माण कार्य करने के बाद ठेकेदारों को पेमेंट हो जाते हैं।

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