माँ गौरी का हुआ आगमन

माँ गौरी का हुआ आगमन

सवांददाता/ मीरा भायंदर

भगवान श्री गणेश जी के आगमन के बाद सभी को माता गौरी के आगमन का बेसब्री से इंतजार रहता हैं। इस पर्व में गौरी की दो मूर्तियों को घर लाया जाता है जिसकी पूजा लगातार तीन दिन चलती है। ऐसा माना जाता है कि इसकी पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और धन की कमी नहीं होती है। गणेश की बहनों को लेकर भी कई मान्यताएं है गौरी की मूर्तियों को भगवान गणेश की बहन समझा जाता है जबकि पश्चिम बंगाल में लक्ष्मी और सरस्वती को गणेश की बहने समझा जाता है। कहावते तो ये भी है कि लक्ष्मी और सरस्वती भगवान गणेश की दोनो पत्नियां रिद्धी और सिद्धी है।

भायंदर में देशमुख परिवार पीढ़ियों से गणपति और गौरी की स्थापना करते आया हैं। यह 105वां वर्ष है रविवार की सुबह पीढिय़ों से चली आ रही परंपरा के अनुसार लक्ष्मी के रूप में आई गौरी की स्थापना की गई। माँ गौरी को पारंपरिक गीत गाते हुए घर में लाया गया। माँ गौरी को सुंदर वस्त्रों और गहनों से श्रंगार करने के उपरांत महिलाओं ने सुंदर कपड़े पहने और फुगड़ी या कोई अन्य खेल खेलकर माँ गौरी का मनोरंजन किया।

भायंदर में कई परिवार पीढ़ियों से गौरी गणपति की स्थापना करते आ रहे हैं।

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