महबूबा मुफ्ती ने फिर उगला जहर, दिया देशद्रोही बयान

नई दिल्ली। पीडीपी की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने आज राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को लेकर बहुत ही भड़काऊ बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि जब तक जम्मू-कश्मीर का पुराना झंडा वापस नहीं होगा, वह तिरंगा नहीं उठाएंगी। गौरतलब है कि महबूबा हाल ही में पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट से छूटकर 14 महीने की नजरबंदी के बाद हिरासत से बाहर आई हैं; और जब से वह आर्टिकल-370 की वापसी के बाद फिर से जम्मू-कश्मीर की राजनीति में सक्रिय हुई हैं, अपने पुराने सियासी ट्रैक पर वापस लौटती दिखाई पड़ रही हैं। खास बात ये है कि इस समय उनका कट्टर विरोधी अब्दुल्ला परिवार भी उनके साथ खड़ा हुआ है, जिन्हें प्रदेश को मिले विशेष दर्जा खत्म होने से अजीब सी छटपटाहट महसूस हो रही है।

पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती ने आज कहा है कि, ‘मेरा झंडा ये है (टेबल पर रखे हुए जम्मू-कश्मीर के झंडे की ओर इशारा करते हुए)। जब यह झंडा वापस आएगा, हम वह झंडा (राष्ट्रीय ध्वज) भी उठाएंगे। जब तक हमें हमारा अपना झंडा वापस नहीं मिल जाता, हम कोई दूसरा झंडा नहीं उठाएंगे…..इस झंडे ने उस झंडे के साथ हमारे संबंधों को जाली बना दिया है।’महबूबा यहीं नहीं रुकीं और कहा, ‘इस देश के झंडे के साथ हमारा संबंध इस झंडे (जम्मू-कश्मीर के झंडे से) से आजाद नहीं है। जब यह झंडा हमारे हाथ में आएगा, हम वह झंडा (तिरंगा) भी उठाएंगे।’ बता दें कि जम्मू-कश्मीर से पिछले साल 5 अगस्त को आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से वहां के सिविल सचिवालय से जम्मू-कश्मीर का झंडा हटा लिया गया था, जो कि पहले वहां तिरंगे के साथ-साथ फहराया जाता था।

गौरतलब है कि आर्टिकल 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को अपना अलग झंडा रखने की भी इजाजत मिली हुई थी। यह झंडा लाल रंग का होता था, जिसमें सफेद रंग की तीन सीधी लाइनें और एक सफेद हल होता था। लेकिन, केंद्र सरकार के फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर के बाकी सरकारी दफ्तरों से भी जम्मू-कश्मीर का पुराना झंडा हटा लिया गया था। उस झंडे को जम्मू-कश्मीर की राज्य संविधान सभा ने 7 जून, 1952 को स्वीकार किया था। इसमें तीन लाइनें वहां के तीनों इलाकों जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का संकेत देती थीं। एजेंसी