अनेक तरह की खेत और बागवानी फसलें हुईं विकसित

अनेक तरह की खेत और बागवानी फसलें हुईं विकसित

नई दिल्ली। पिछले 3 वर्षों,2018 से 2020 तक और चालू वर्ष के दौरान, 69 खेत फसलों की 1017 किस्में और 58 बागवानी फसलों की 206 किस्में विकसित की गई हैं। संसद में एक लिखित प्रश्न का जवाब देते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने यह जानकारी सदन के पटल पर रखी। उन्होंने आगे कहा ये नतीजे बताते हैं कि देश में कृषि में अनुसंधान पर खास जोर दिया जा रहा है।

आईसीएआर कर रह है अनुसंधान
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तत्वावधान में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (एनएआरएस) जिसमें आईसीएआर संस्थान और अन्य राज्य/केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय शामिल हैं। ये संस्थान खेतों और बागवानी की नई,ज्यादा उपज देने वाली और जैविक/अजैविक तनाव सहिष्णु फसलें और किस्मों के विकास में शामिल हैं। पिछले 3 वर्षों (2018-2020) और चालू वर्ष के दौरान,69 खेत फसलों की 1017 किस्में और 58 बागवानी फसलों की 206 किस्में विकसित की गई हैं।

आईसीएआर के मजबूत नेटवर्क का मिल रहा है सहयोग
आईसीएआर के पास विभिन्न आईसीएआर संस्थानों द्वारा समन्वित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं (एआईसीआरपी)/अखिल भारतीय नेटवर्क परियोजनाओं (एआईएनपी) का एक मजबूत नेटवर्क है,जो विभिन्न केंद्रीय और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर संस्थानों में नई फसल और किस्मों के विकास के लिए काम कर रहे हैं। इसमें खेत और बागवानी फसलें मुख्य तौर पर शामिल हैं। वर्तमान में,देश भर में 1,017 स्थानों पर 50 एसएयू/सीएयू/डीयू और 55 आईसीएआर संस्थानों के माध्यम से खेत और बागवानी फसलों के 44 एआईसीआरपी/एआईएनपी काम कर रहे हैं।

इतने रुपये किए जा चुके हैं जारी
आईसीएआर ने इन शोध संस्थानों/विश्वविद्यालयों के लिए 2018-19 से 2021-22 के दौरान 3340.32 करोड़ रुपये जारी किए और इनमें से 2020-21 तक 2420.32 करोड़ रुपये का उपयोग किया जा चुका है।

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