रचना संसार में अपना योगदान देने वाली लेखिका मैथिली लेखिका वीणा ठाकुर

रचना संसार में अपना योगदान देने वाली लेखिका मैथिली लेखिका वीणा ठाकुर

रचना संसार वृहद है। यह अधिक समृद्ध होता है,जब विभिन्न भाषाओं और बोलियों में लेखन और पठन-पाठन हो। रचनाकार इसमें महती भूमिका निभाता है। ऐसे ही रचना संसार में अपना योगदान देने वाली लेखिका है–वीणा ठाकुर। वे मैथिली भाषा में गद्य-पद्य की रचना करती हैं। वे साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित हैं। आइये,जनकनन्दनी के अंचल से आने वाली वीणा ठाकुर के रचना संसार की ओर दृष्टि डालते हैं।

वर्षों से संलग्न है साहित्य साधना में

साहित्य सृजन साधना है। व्यक्ति जीवन की आंच पर तपता है और उन अनुभूतियों को शब्दों के सांचे में ढालकर पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत करता है। लेखक अपने अनुभवों को,ठीक-ठीक पाठकों तक पहुंचा दे, तो सृजन का एक उद्देश्य सफल होता है। विविध विषयों को अपनी भाषा-बोली में जानने-समझने की उत्सुकता भी हम सब में होती है। लेखिका वीणा ठाकुर भी मैथिली और हिंदी भाषा में लिखती हैं। उन्हें बचपन से ही पठन-पाठन में रुचि थी। उन्होंने छठवीं कक्षा में ही रामचरितमानस पढ़ डाली थी। यहीं से उनका साहित्य सृजन की ओर झुकाव बढ़ा। बीते लगभग 45 वर्षों से वे साहित्य सृजन में संलग्न है। कथा संग्रह, समीक्षा,गीत इत्यादि विधाओं में डॉ.वीणा ठाकुर ने अपनी कलम चलाई है। उनकी रचनाओं में ग्रामीण परिवेश,आधुनिकता के बीच का द्वंद,परंपरा,साहित्य और संस्कृति के बिंदु दिखाई देते हैं।

विवाहोपरांत किया स्नातकोत्तर एवं पीएचडी

बिहार के मधुबनी जिले के एक छोटे से गांव में वीणा ठाकुर का जन्म हुआ। उनकी प्राथमिक शिक्षा सहरसा में हुई। पिता अर्थशास्त्र के प्राध्यापक थे। घर का माहौल अनुशासित था। वीणा कहती हैं कि – ” पिताजी को किताब पढ़ने का शौक था। मैं जब पांचवीं कक्षा में थी, तब से मेरी भी उपन्यासों की ओर रुचि बढ़ी। मैंने विमल मित्र का उपन्यास पढ़ा। इसके बाद पढ़ना मैंने जारी रखा।” वीणा ठाकुर का 15 वर्ष की उम्र में विवाह हो गया था। विवाह के बाद उन्होंने स्नातकोत्तर और पीएचडी किया। वे बेहद कम उम्र में लेक्चरर बन गईं थीं। विवाह के बाद भी परिवार के सहयोग से उन्होंने अनवरत साहित्य सृजन किया। वे दरभंगा के,ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के मैथिली विभाग की पूर्व अध्यक्ष भी हैं।

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हुईं

वीणा ठाकुर को उनके कथा से संग्रह परिणीता के लिए, साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। परिणीता, 12 कथाओं का संग्रह है। वीणा ठाकुर बताती हैं कि – ” परिणीता में जिन कथाओं को शामिल किया गया है, वे सभी आम आदमी के जीवन से जुड़ी हुईं हैं। बुजुर्गों की समस्याओं से लेकर प्रवासी भारतीय तक की परेशानी और उनके जीवन को लेकर कथा रची गई है। परिणीता में नई और पुरानी पीढ़ी के मध्य का अंतर भी प्रतिबिंबित होता है। ” डॉ. वीणा ठाकुर बिरला फाउंडेशन के प्रतिष्ठित सरस्वती सम्मान के लिए गठित, मैथिली भाषा समिति की संयोजिका भी हैं। वीणा ठाकुर की अन्य रचनाओं में उपन्यास भारती, कथा-संग्रह आलाप, समीक्षा मैथिली रामकाव्यक परम्परा,इतिहास दर्पण,वाणिनी,मैथिली गीत,हाट-बाजार इत्यादि प्रमुख है। इसके अतिरिक्त उन्होंने विद्यापति गीत रचनावली,मैथिली प्रबंध काव्य- उद्भव और विकास सहित दर्जनभर पुस्तकों व पत्रिकाओं का संपादन भी किया है।

रचनाओं में ग्रामीण परिदृश्य की झलक

ऐसा कहा जाता है कि भारत के प्राण गांवों में बसते हैं। डॉ. वीणा ठाकुर की रचनाओं में भी ग्रामीण अनुभूतियों की झलक दिखाई देती है। वीणा ठाकुर कहती हैं कि, ” लेखक की पृष्ठभूमि का असर उसके लेखन पर रहता ही है।मैं ग्रामीण क्षेत्र में पली-बढ़ी। वहीं मेरी शिक्षा हुई। यही कारण है कि मेरे लेखन में ग्रामीण परिदृश्य दिखाई देता है।” वीणा ठाकुर मानती हैं कि लेखकों में संवेदनशीलता का गुण होना सबसे जरूरी है। वे मैथिली साहित्य को लेकर प्रतिबद्ध है। वर्तमान में वे मैथिली साहित्य के समग्र इतिहास लेखन में जुटी हुईं हैं।

 

 

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