आधुनिक युद्धपोतों के लिए महिंद्रा डिफेंस बनाएगी IADS

आधुनिक युद्धपोतों के लिए महिंद्रा डिफेंस बनाएगी IADS

भारतीय नौसेना के आधुनिक युद्धपोतों के लिए इंटीग्रेटेड एंटी सबमरीन वारफेयर डिफेंस (IADS) भारतीय कंपनी महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड (एमडीएस) बनाएगी। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को इसके लिए कंपनी के साथ 1,349.95 करोड़ रुपये का करार किया है। महिंद्रा डिफेंस भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए 14 IADS सिस्टम की आपूर्ति करेगा। ‘खरीदें और बनाएं (भारतीय)’ श्रेणी के तहत किये गए इस अनुबंध से ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को बढ़ावा मिलेगा और नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता बढ़ेगी।

महिंद्रा डिफेंस के साथ 1,349.95 करोड़ रुपये का अनुबंध

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इंटीग्रेटेड एंटी सबमरीन वारफेयर डिफेंस सूट के निर्माण के लिए भारतीय कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा समूह की फर्म महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड (MDS) के साथ 1,349.95 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया है। भारतीय फर्म के साथ इस अनुबंध से भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा। साथ ही प्रौद्योगिकी विकास और उत्पादन में स्वदेशी रक्षा उद्योग को एक बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

एंटी सबमरीन वारफेयर की खासियत

>यह प्रणाली भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता को बढ़ाएगी।

>इंटीग्रेटेड एंटी सबमरीन वारफेयर डिफेंस (IADS) पानी के नीचे का उपकरण है, जो नवीनतम तकनीक का उपयोग करता है।

>पानी के नीचे के खतरों से युद्धपोतों का पता लगाने और उनकी रक्षा करने के लिए डिजाइन किया गया है।

>दुश्मन की पनडुब्बियों और टॉरपीडो का विस्तारित रेंज में पता लगाने के साथ-साथ दुश्मन की पनडुब्बियों से दागे गए टॉरपीडो को डाइवर्ट करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

>यह एक बहुमुखी प्रणाली है, जो सभी प्रकार के युद्धपोतों-छोटे,मध्यम और बड़े से संचालन में सक्षम है।

>पानी में सेंसर की जटिल सरणी निगरानी करती है और आवश्यक कार्रवाई को सक्षम करने के लिए सिग्नल प्रोसेसिंग और विश्लेषण के लिए इनपुट प्रदान करती है।

भारत को रक्षा हार्डवेयर निर्माण का केंद्र बनाने पर जोर

महिंद्रा एंड महिंद्रा ने एक बयान में कहा कि MDS ने रक्षा मंत्रालय (MOD) का वह खुला टेंडर हासिल कर लिया, जिसमें अपनी क्षमता साबित करने के लिए समुद्र में विस्तृत परीक्षणों के माध्यम से सिस्टम लगाए गए थे।

महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड के अध्यक्ष एसपी शुक्ला ने कहा कि रक्षा मंत्रालय का निजी क्षेत्र के साथ यह पहला बड़ा अनुबंध था जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल की सफलता का प्रतीक है। 2014 में सत्ता संभालने के बाद से केंद्र सरकार ने भारत को रक्षा हार्डवेयर निर्माण का केंद्र बनाने पर जोर दिया है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार भारत दुनिया के शीर्ष रक्षा हार्डवेयर खरीददारों में से एक है। रक्षा मंत्रालय ने सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ाने के अपने संकल्प को प्रदर्शित करना जारी रखा है। साथ ही स्वदेशी रक्षा उद्योग के माध्यम से कई उपकरणों को शामिल करने के साथ उन्नत प्रौद्योगिकियों में ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनने का संकल्प दिखाया है।

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