जानिए वह कौन है ? जिसने पूरी इटली में कोरोना वायरस फैला दिया..

लोम्बार्डी में अंतिम संस्कार के लिए मृतक वेटिंग लिस्ट में हैं
इटली। इटली में कोरोना वायरस से अब तक करीब 6,077 मौतें हो चुकी है.इसके साथ ही उस पहले शख्स की पहचान हो चुकी है,जिससे संक्रमण देशभर में फैला.माना जा रहा है कि उस अकेले शख्स से कोरोना का संक्रमण लगभग 200 लोगों तक फैला.चीन के वुहान को छोडऩे के बाद कोरोना वायरस ने इटली के लोम्बार्डी शहर को अपना गढ़ बना लिया है. यहां लगातार नए मामले आ रहे हैं.

हालात इतने खराब हैं कि इस शहर में अंतिम संस्कार के लिए मृतक वेटिंग लिस्ट में हैं. कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या 63,927 पहुंचने के साथ ही लोम्बार्डी में अस्पतालों का बंदोबस्त ठीक करने की मुहिम चल पड़ी. माना जा रहा है कि इसी शहर में रहने वाले एक शख्स से पूरा देश संक्रमित हुआ.उससे संक्रमण इतनी तेजी से फैला कि उसे पेशेंट 1 भी कहा जा रहा है.38 साल के उस शख्स को पेशेंट 1 के नाम से जाना जा रहा है.

इटली की ही तरह दक्षिण कोरिया में भी एक मरीज को पेशेंट 31 माना जा रहा है. इस महिला मरीज की पहचान गुप्त रखने के लिए उसे पेशेंट 31 नाम दिया गया है.ये मरीज एक चर्च से ताल्लुक रखती है और सरकार मान रही है कि इसी मरीज से चर्च आए बहुत से लोगों में कोरोना फैला.सरकार के एक अनुमान के अनुसार उस महिला से लगभग 5 हजार लोगों में बीमारी फैली.

इटली के पीएम ने कोरोना वायरस के लिए हुई एक प्रेस वार्ता में एक अस्पताल को कोरोना संक्रमण के लिए दोषी ठहराते हुए कहा कि उस अस्पताल ने 2 बार पेशेंट 1 को वापस घर लौटा दिया था,जबकि बीमार शख्स बुखार होने पर खुद अस्पताल पहुंचा था.पीएम ने कहा कि जब चीन की हालत पूरी दुनिया में खबर बन चुकी थी,तब अस्पताल प्रशासन को सचेत रहना चाहिए था और बुखार या सांस की तकलीफ लेकर आए उस मरीज को लौटाना नहीं चाहिए था.

प्रेस वार्ता के दौरान पीएम ने अस्पताल का नाम नहीं लिया और न ही उस शख्स का नाम जाहिर किया गया है.हालांकि उसे पेशेंट 1 भी कहा जा रहा है, जो प्रचलित इटालियन नाम है. पेशेंट 1 अब भी मिलान के एक अस्पताल में गंभीर हालात में है. काफी मिलनसार रह चुके इस मरीज ने बीमारी के दौरान बहुत लोगों से मुलाकात की, स्पोर्ट में भाग लिया और दफ्तर के काम से भी आया-गया.

सर्दी-बुखार की शिकायत लेकर 14 फरवरी को वो लोम्बार्डी के एक अस्पताल पहुंचा.वहां पर फ्लू बताते हुए पैरासिटामोल देकर उसे बिना किसी जांच के घर भेज दिया गया. 2 दिनों बाद भी बुखार में फर्क न दिखने पर 16 फरवरी को वो दोबारा उसी अस्पताल में पहुंचा लेकिन डॉक्टरों ने उसे दोबारा लौटा दिया.तीसरी बार 19 फरवरी को हालत गंभीर होने पर उसे अस्पताल में भर्ती किया गया.उसे सांस लेने में तकलीफ थी,बुखार था और गले में तेज दर्द था.तब जाकर जांच हुई,जिसमें उसे कोरोना पॉजिटिव पाया गया.

इस दौरान संक्रमण उस शख्स से उसकी पत्नी में पहुंचा,जो गर्भवती है.मरीज का एक दोस्त जो उसके साथ सुबह दौडऩे जाया करता,वो भी पॉजिटिव हो चुका है. तीन बुजुर्ग जिनसे वो बार में लगभग रोजाना मिलता था,वे भी पॉजिटिव हैं.इनके अलावा अस्पताल के 8 लोग,जो भी इसके संपर्क में आए,सारे कोरोना वायरस से संक्रमित हैं.इनमें से एक मरीज की मौत भी हो चुकी है.मरीज को लेकर अस्पताल ने इतनी लापरवाही दिखाई कि तीसरी बार जाने और भर्ती करने के बाद कोरोना संक्रमित दिखने के बाद भी उसे लगभग 36 घंटे तक आइसोलेशन में नहीं रखा गया. यही वो 36 घंटे थे,जिसमें डॉक्टर और दूसरे मरीजों के साथ अस्पताल आने वाले लोग एक के बाद एक संक्रमित होते गए.