दुनिया में कहां-कहां तैयार हो रही हैं नाक से दी जाने वाली वैक्‍सीन,जानें

 दुनिया में कहां-कहां तैयार हो रही हैं नाक से दी जाने वाली वैक्‍सीन,जानें

भारत के सीरम इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर अमेरिकी कंपनी कोडाजेनिक्स इंट्रानेज़ल वैक्सीन COVI-VAC पर काम कर रही है।यह सिंगल डोज वाली वाली कोविड-19 रोधी वैक्सीन होगी।कोरोना की दूसरी लहर के बीच देशभर में चौथे चरण का ​टीकाकरण चल रहा है। एक मई से शुरू हुए इस चरण में 18 से 44 वर्ष की उम्र के लोगों को भी वैक्सीन लगाई जा रही है।देश में पहले 2 वैक्सीन उपलब्ध थी,भारत बायोटेक की Covaxin और सीरम इंस्टिट्यूट की Covieshield,अब रूस की Sputnik V Vaccine वैक्सीन भी आ चुकी है।कंपनी इसके लाइट वर्जन पर भी काम कर रही है।भारत में जायडस कैडिला कंपनी की वैक्सीन Zycov-D को भी जल्द मंजूरी दी जा सकती है।

एक ओर बच्चों के लिए वैक्सीन पर भी काम चल रहा है तो दूसरी ओर नाक से दी जानेवाली वैक्सीन पर भी कई कंपनियां काम कर रही है।कहा जा रहा है कि यह वैक्सीन कोरोना से जंग में एक और बड़ा हथियार साबित होगी।लेकिन सवाल यही है कि यह वैक्सीन आखिर कबतक आएगी। 5 मई को WHO द्वारा दी जानकारी के मुताबिक कुल 7 इंट्रानेजल वैक्सीन पर काम जारी है। इनका क्लिनिकल ट्रायल यूके,यूएस,भारत,चीन जैसे देशों में जारी है।

दुनियाभर की कंपनियां नाक से दी जानी नेजल स्प्रे वैक्सीन पर काम कर रही है।नाक से दी जाने वाली वैक्सीन ज्यादा प्रभावी मानी जा रही है और यह गेमचेंजर साबित हो सकती है।नाक से वैक्सीन दिए जाने के कई फायदे हैं,पहला ये कि इससे सुइयों यानी सीरिंज की जरूरत खत्म हो जाएगी,जिससे इंजरी और इन्फेक्शन जैसे खतरे नहीं रहेंगे।इसके अलावा इन वैक्सीन को एडमिनिस्टर करना भी आसान होता है।इनमें से कई नेजल वैक्सीन का बच्चों के लिए भी ट्रायल किया जा रहा है. सफलता मिली तो यह बड़ी राहत होगी।

नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने हाल ही में बताया था कि अगले 5 महीनों के बीच 216 करोड़ वैक्सीन डोज उपलब्ध कराई जाएंगी और दिसंबर तक भारत बायोटेक अपनी नेजल वैक्सीन (नाक से दी जाने वाली वैक्सीन) के 10 करोड़ डोज बना सकती है।वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल जारी है।कोवैक्सीन बनाने वाली स्वदेशी वैक्सीन कंपनी भारत बायोटेक का कहना है कि उनकी नेज़ल वैक्सीन BBV154 वायरस की एंट्री पर हमारे इम्यून सिस्टम के जरिए रिस्पॉन्स दिलाने में कामयाब होगी।इससे संक्रमण का खतरा कम रहेगा. साथ ही कंपनी ने कहा है कि ये वैक्सीन बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए कारगर साबित हो सकती है।भारत बायोटेक का कहना है कि इस नेज़ल वैक्सीन का उत्पादन भी ज्यादा तेजी से बढ़ाया जा सकता है।

भारत के सीरम इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर अमेरिकी कंपनी कोडाजेनिक्स इंट्रानेज़ल वैक्सीन COVI-VAC पर काम कर रही है।यह सिंगल डोज वाली वाली कोविड-19 रोधी वैक्सीन होगी। वैक्सीन का पहले चरण का क्लिनिकल ट्रायल जारी है। कंपनी का कहना है कि ये वैक्सीन कोविड-19 के कई स्ट्रेन के खिलाफ इम्यूनिटी देने के लिए तैयार की जा रही है।

इस इंट्रानेज़ल वैक्सीन में कोविड का ही कमजोर किया वायरस शामिल किया जाता है। कोडाजेनिक्स के मुताबिक इस वैक्सीन से ज्यादा लंबे समय तक सेलुलर इम्यूनिटी हासिल होगी।ऑल्टइम्यून नाम की कंपनी एडकोविड नाम की वैक्सीन बना रही है जो नाक के जरिए दी जाएगी।यह वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल के पहले चरण में है। फरवरी में ही कंपनी ने वैक्सीन के पहले चरण के क्लिनिकल ट्रायल की शुरुआत की है।कंपनी का कहना है कि साल 2021 की दूसरी तिमाही तक इस ट्रायल के नतीजे आ सकते हैं।

ऑल्टइम्यून कंपनी के मुताबिक इस वैक्सीन का उत्पादन ज्यादा तेजी से बढ़ाया जा सकेगा।कंपनी का कहना है कि क्योंकि नाक में ही वायरस रिपॉजिटरी बनाता है इसलिए मांस में सुई के जरिए वैक्सीन देने से ज्यादा प्रभावी होगा नाक के जरिए दी जाने वाली वैक्सीन होगी।नेजल वैक्सीन पर फिनलैंड की कंपनी रोकोटे लैबोरेट्रीज भी काम कर रही है।यह एक इंट्रानेज़ल वैक्सीन होगी। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्राइवेट इन्वेस्टर्स और निवेश को लेकर कंपनी फिलहाल कुछ दिक्कतों में चल रही है।

कनाडा स्थित कंपनी सैनोटाइज ने डेवलप किया है और ब्रिटेन में किए गए दूसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल सफल भी रहे है।कंपनी के को-फाउंडर और CSO क्रिस मिलर ने हमारी सहयोगी वेबसाइट मनी9 के साथ ई-मेल वार्ता में बताया है कि कंपनी अब भारत में एंट्री के लिए पार्टनर तलाश रही है।

यूके में हुए टेस्ट में ये 79 कोरोना पॉजिटिव मामलों में ये पाया गया कि सैनोटाइज का इलाज कोविड-19 के शुरुआती इलाज में कारगर रहा। 24 घंटों के अंदर ये वायरल लोड को 95 फीसदी घटाने में कारगर हुआ तो वहीं 72 घंटों में 99 फीसदी घटाने में सफल रहा।कंपनी का कहना है कि ये कोरोना के अलग-अलग वेरिएंट पर कारगर है, जिसमें यूके वेरिएंट भी शामिल हैं।

मिलर कहते हैं कि कोरोना संक्रमण के संपर्क में आने के बाद असरदार है–ठीक जैसे सैनेटाइजर हाथ या सामान पर से कोरोना वायरस को खत्म करता है वैसे ही ये दवा नाक में ही वायरस का खात्मा करती है जिससे उसे पूरे शरीर में संक्रमण फैलाने का मौका ही ना मिले।

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