हरियाणा का लड़का लाया कश्मीरी दुल्हन

haryana

हरियाणा ।  भारतीय जनता पार्टी के विधायक मोहन लाल बड़ौली के बेटे की बारात जम्मू कश्मीर जाने वाली है. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद ये वहां पर होने वाली पहली शादी है. जब मुख्यमंत्री को इस शादी के बारे में पता चला तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल शनिवार के दिन राई के विधायक मोहनलाल बरौली के घर उनके दोनों बेटों की शादी की मुबारकबाद देने के लिए गए. विद्यायक मोहनलाल के घर जाते ही मुख्यमंत्री ने कहा की उस दूल्हे से मिलवाओ जो कश्मीर बारात लेकर जाने वाला है. जब दूल्हा संदीप मुख्यमंत्री के सामने आया तो मुख्यमंत्री ने उसे मुबारकबाद दी. मुख्यमंत्री ने विधायक मोहनलाल बड़ौली उनके दोनों बच्चों के रिश्ते के बारे में बात की तो विधायक ने उन्हें बताया कि उनका बेटा संदीप कौशिक छोटूराम साइंस एवं तकनीकी विश्वविद्यालय मुरथल में बीटेक का स्टूडेंट था।

उसके साथ कश्मीरी पंडित सैरीशा रैना भी बीटेक की पढ़ाई कर रही थी. जहाँ कॉलेज में पड़ने के दौरान दोनों के बीच प्यार हो गया और अब दोनों एक दूसरे के साथ शादी करने जा रहे हैं. हम आपको बता दें कि इस शादी को लेकर दूल्हा दुल्हन के परिवार वाले बहुत खुश हैं।

भले ही संदीप और रैना एक ही कॉलेज से पढ़ाई कर रहे थे पर उन दोनों के डिपार्टमेंट अलग-अलग थे.संदीप केमिकल से बीटेक कर रहे थे और रैना ने बायोटेक से बीटेक किया है. रैना 2014 में यूनिवर्सिटी टॉपर भी रह चुकी हैं. उसी दौरान इन दोनों के बीच जान पहचान हुई थी और उनकी फैमिली भी एक दूसरे को अच्छे से जानती थी. अब यही जान पहचान रिश्तेदारी में बदलने जा रही है. संदीप का दावा है कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने के बाद वहां से प्रदेश में होने वाली उनकी पहली शादी है।

जब जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू था तब भी वहां की लड़की की शादी दूसरे राज्य में हो सकती थी. लेकिन शादी के बाद लड़की का अधिकारिक रूप से फैमिली के साथ नाम नहीं जोड़ा जा सकता था. इसलिए लड़की के मायके से सभी प्रकार के हक खत्म हो जाते थे. इस तरह की शादी होने के बाद सिर्फ मौखिक रूप से ही लड़की के परिवार से रिश्ता रहता था.

शैरिसा रैना अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं. संदीप और शैरिसा के लिए अनुच्छेद 370 का हटना बहुत ही खुशी देने वाला फैसला है. विधायक मोहनलाल बरौली के बेटे संदीप का कहना है कि उनकी और रैना की पढ़ाई के समय उन दोनों के बीच सिर्फ जान पहचान थी। एजेंसी

 

more recommended stories