जयंती विशेष : गणेश दामोदर सावरकर

जयंती विशेष : गणेश दामोदर सावरकर

प्रसिद्ध क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर के बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर का जन्म 1879 ई. में महाराष्ट्र राज्य के नासिक नगर के निकट भागपुर नामक स्थान पर हुआ था। नासिक में ही उनकी शिक्षा हुई। आरंभ में उनकी रुचि धर्म,योग, जप, तप आदि विषयों की ओर थी। विनायक दामोदर सावरकर के बारे में हम सब समय-समय पर काफी कुछ सुनते पढ़ते रहते हैं, लेकिन उनके बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर को उतनी पहचान नहीं मिल पाई है,जबकि गणेश दामोदर सावरकर का भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान किसी से कम नहीं है। उन्हें बाबाराव सावरकर के नाम से भी जाना जाता है।

युवाओं को बांटे थे हथियार

अंग्रेजी राज के खिलाफ सशस्त्र क्रांति और विद्रोह के जबरदस्त समर्थक बाबाराव के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने युवाओं को हथियार बांटकर उन्हें अंग्रेजी राज से लोहा लेने का संदेश दिया था। कहा जाता है कि बाबाराव ने 1904 में क्रांतिकारी संगठन अभिनव भारत सोसायटी की स्थापना भी की थी।

क्रांतिकारी जीवन

गणेश सावरकर यह बात समझते थे कि बलशाली ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध क्रांति करना एक-दो व्यक्तियों का काम नहीं है,उसके लिए प्रबल एवं कट्टर संगठन की आवश्यकता होगी। इस हेतु `मित्रमेला’ नामक संगठन की स्थापना की गई । उन्होंने आमसभा आयोजित कर राष्ट्रगुरु रामदास स्वामी,छत्रपति शिवाजी महाराज, नाना फडणवीस आदि महान पुरुषों की जयंतियां मनाना आरंभ किया,जिसने युवाओं में देशभक्ति जागृत करने में बहुत मदद की।

महाराष्ट्र में उस समय ‘अभिनव भारत’ नामक क्रांतिकारी दल काम कर रहा था। विनायक सावरकर इस दल से संबद्ध थे। वे जब इंग्लैण्ड चले गए तो उनका काम बाबा सावरकर ने अपने हाथों में ले लिया। वे विनायक की देशभक्त की रचनाएं और उनकी इंग्लैंड से भेजी सामग्री मुद्रित कराते,उसका वितरण करते और ‘अभिनव भारत’ के लिए धन एकत्र करते। यह कार्य ब्रिटिश सरकार को रास नहीं आ रहा था।

नासिक षडयंत्र कांड रहा चर्चित

1909 में नासिक के कलेक्टर एएमटी जैक्सन को अनंत कान्हेरे नामक क्रांतिकारी ने मौत के घाट उतार दिया था। इसे नासिक षडयंत्र के नाम से जाना गया और जांच के बाद अंग्रेजी अदालत ने माना कि इस कांड के पीछे बाबाराव सहित सावरकर बंधुओं का दिमाग था। 1909 में वे गिरफ्तार किए गए। देशद्रोह का मुकदमा चला और आजीवन कारावास की सजा देकर अंडमान भेज दिए गए। 1921 में वहां से भारत लाए गए और एक वर्ष साबरमती जेल में बंद रह कर 1922 में रिहा हो सके।

गणेश सावरकर,डॉ. हेडगेवार के संपर्क में रहे रहे,जिन्होंने 1925 में गणेश सावरकर ; मुंजे, परांजपे और तोलकर के साथ मिलकर आरएसएस की नींव रखी। गणेश सावरकर ने अपने पुराने संगठनों का इसमें विलय कर दिया था। यही नहीं, हेडगेवार के संगठन के तौर पर आरएसएस की ख्याति होने के बावजूद गणेश सावरकर ने हेडगेवार के संपर्कों को मजबूत करवाने में योगदान दिया। इसी का नतीजा है कि पश्चिम महाराष्ट्र में पुणे आरएसएस का मठ, गणेश की ही जी-तोड़ मेहनत से बना सका था।

कई पुस्तकों के गुप्त लेखक

गणेश दामोदर सावरकर ने अनेक पुस्तकें लिखीं। दुर्गानंद के छद्म नाम से उनकी पुस्तक ‘इंडिया एज ए नेशन’ सरकार ने जब्त कर ली थी। गणेश ने मराठी में एक निबंध लिखा था ‘राष्ट्र मीमांसा’, जो अंग्रेजी में गोलवलकर के नाम से ‘We or our Nationhood Defined’ शीर्षक से छपा था। हिन्दी के कट्टर समर्थक गणेश सावरकर का 1945 में देहांत हो गया।

 

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