तनिष्क के विवादित विज्ञापन पर Tweet कर के बुरे फंसे जावेद अख्तर

नई दिल्ली। जूलरी ब्रांड तनिष्क ने सोशल मीडिया पर जनता की भारी नाराजगी और ट्रोल होने के बाद अपने Inter-faith family विज्ञापन को मंगलवार के दिन हटाने का फैसला लेते हुए उसे वापस ले लिया। ट्विटर समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अब भी इस विज्ञापन को लेकर बातें जारी हैं। जहां कुछ लोगों ने कंपनी के इस विज्ञापन को ‘लव जिहाद’ और ‘नकली धर्मनिरपेक्षता’ को बढ़ावा देने वाला बताया वहीं अब गीतकार जावेद अख्तर ने इस विज्ञापन को लेकर ऐसी बात कह दी है कि वह जमकर ट्रोल हो रहे हैं।

दरअसल एक यूजर ने इस विज्ञापन की एक तस्वीर शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘वह तनिष्क विज्ञापन: जब आप एक ईमानदार बातचीत करने से इनकार करते हैं, तो एक ऐसी प्रतिक्रिया आपको मिलती है, जो काफी आश्चर्यजनक हो सकती है। महज नाराजगी से कोई मदद नहीं होने वाली है, संरचनात्मक मुद्दों को प्राप्त करने और उन्हें हल करने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।’

इस ट्वीट के जवाब में जावेद अख्तर ने लिखा है, ‘चाहे फिल्म हो, विज्ञापन या वास्तविक जीवन सभी जगह एक इंटर रिलीजियस शादी हमेशा ही कुछ लोगों को परेशान करती है, जिनमें हमेशा ही लड़की पक्ष का आक्रोश सामने आता है या इससे संबंधित होता है, यह आक्रोश इस विश्वास पर आधारित है कि महिलाएं अपनी संपत्ति की तरह हैं। नाराज लोग दुल्हे और उसके परिवार को किसी गांव के पशु चोर रूप में देखते हैं।’

इस ट्वीट के बाद से जावेद अख्तर लगाातर लोगों की नाराजगी का शिकार बने हुए हैं। लोग उनसे यहां लव जिहाद और मुस्लिम संवेदनाओं के बारे में बात कर रह हैं। लोग उन्हें इस मामले में चुप रहने की सलाह दे रहे हैं।

विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
हंगामा मचने के बाद कंपनी ने इस विज्ञापन को हटा लिया लेकिन इसके बाद अपने आपको सेक्युलर कहने वाले लोग ये मांग करने लगे कि इस विज्ञापन को दोबारा वापस लाया जाए और कंपनी का इस तरह दबाव में आना ठीक नहीं है। इसलिए आज हम इस बात का विश्लेषण करेंगे कि इस तरह की स्टोरी लाइन के साथ विज्ञापन बनाना धर्मनिरपेक्षता है या लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचने के बाद इसे वापस ले लेना असल में सच्ची धर्मनिरपेक्षता है। लेकिन सबसे पहले ये समझिए कि इस विवाद की शुरुआत कहां से हुई।

सोशल मीडिया पर विरोध
भारत का एक मशहूर जूलरी ब्रांड है जिसका नाम है- तनिष्क, ये टाटा ग्रुप की एक कंपनी है। इस कंपनी ने पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन जारी किया था। इस विज्ञापन में एक हिंदू महिला को दिखाया गया है जो एक मुस्लिम परिवार की बहू है। इस विज्ञापन में गोदभराई की रस्म के कुछ दृश्य हैं जिनमें दिखाया गया है कि कैसे इस महिला की मुस्लिम सास अपनी बहू के धर्म यानी हिंदू धर्म का सम्मान करती है और फिर हिंदू रीति रिवाज़ से गोद भराई की रस्म अदा की जाती है। कुल मिलाकर इस विज्ञापन को देखकर ऐसा लगता है कि इसमें दिखाया गया है, मुस्लिम परिवार बहुत सेक्युलर और सभी धर्मों का सम्मान करने वाला है।

लेकिन इस कंपनी को अपना ये विज्ञापन तब वापस लेना पड़ा जब सोशल मीडिया पर इस विज्ञापन का विरोध शुरू हो गया। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं उनका कहना है कि ये विज्ञापन लव जेहाद को बढ़ावा देता है। लोगों का ये भी आरोप है कि हर बार फिल्मों और विज्ञापनों में एक हिंदू महिला का ही मुस्लिम पुरुष के साथ विवाह क्यों दिखाया जाता है, इसका उल्टा क्यों नहीं दिखाया जाता? यानी कभी किसी विज्ञापन या फिल्म में एक मुस्लिम महिला की शादी एक हिंदू पुरुष से होती हुई क्यों नहीं दिखाई जाती? । एजेंसी