टैक्स संबंधी समझौते में शामिल हुआ भारत

टैक्स संबंधी समझौते में शामिल हुआ भारत

नई दिल्ली। विश्व की अर्थव्यवस्था बहुत तेजी के साथ बदल रही है। इस उथल-पुथल भरे दौर में करवट लेती वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ कदम बढ़ाना बहुत मुश्किल है। इससे सामंजस्य बिठाना और साथ ही विकास के मानदंडों को बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे माहौल में विकसित और विकासशील देशों के बीच आपसी संवाद और बेहतर तालमेल होना बेहद अहम है और इसमें G-20 जैसे वैश्विक आर्थिक मंच महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही सामंजस्य स्थापित करने के लिए ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी – आर्थिक सहयोग और विकास संगठन)/जी-20 के भारत सहित कई सदस्यों ने 1 जुलाई को एक अहम घोषणापत्र को स्वीकृति दी।

अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण के कारण उत्पन्न हुई टैक्स चुनौतियों का समाधान करना है उद्देश्य

इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण के कारण उत्पन्न हुई टैक्स चुनौतियों का समाधान करना था। बता दें, बहुराष्ट्रीय कंपनियां और उद्योग अपनी लाभ राशि को ज्यादा टैक्स लेने वाले देशों से निकाल कर उसे कम टैक्स लेने वाले देशों में स्थानांतरित कर देते हैं। इस तरह ज्यादा टैक्स वाले देशों के“टैक्स आधार” का “क्षरण” हो जाता है। इस घोषणापत्र के प्रस्तावित समाधान के दो मुख्य बिंदु हैं–

लाभ के अतिरिक्त हिस्से को देश-विशेष के बाजार में डाल दिया जाए
न्यूनतम कर,जो कर नियमों के अधीन हो

लाभ को साझा करने और कर नियमों के दायरे से संबंधित कुछ अन्य अहम मुद्दे भी हैं, जिनका समाधान किया जाना बाकी है। इसके अलावा प्रस्ताव का तकनीकी विवरण भी आने वाले महीनों में तैयार किया जाएगा। उम्मीद है कि अक्टूबर तक इन समाधानों पर सहमति बन जाएगी।

क्या है ओईसीडी

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो बेहतर जीवन के लिए बेहतर नीतियां बनाने के लिए काम करता है। इसका लक्ष्य उन नीतियों को आकार देना है जो सभी के लिए समृद्धि, समानता,अवसर और कल्याण को बढ़ावा दें। यह सरकारों,नीति निर्माताओं और नागरिकों के साथ,साक्ष्य-आधारित अंतर्राष्ट्रीय मानकों को स्थापित करने और सामाजिक,आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों की एक श्रृंखला के समाधान खोजने पर काम करता है।

भारत के सिद्धांतों पर किया जा रहा है अमल

भारत हमेशा से बाजार में ज्यादा से ज्यादा लाभ को साझा करने और लाभ का निवेश करने संबंधित घटकों पर विचार करने का पक्षधर रहा है। भारत ने सीमा-पार लाभ स्थानांतरित करने के मुद्दे को शुरुआत से गंभीरता से हल करने पर जोर दिया है। भारत का मानना है कि टैक्स नियमों को ऐसा बनाया जाए जो व्यक्तियों को नागरिक न होते भी दो देशों के बीच होने वाली टैक्स संधि के लाभों तक परोक्ष रूप से पहुंचने से रोक सके। समाधान निकालने के लिए भारत के इन्हीं सिद्धांतों पर अमल किया जा रहा है।

भारत चाहता है अक्टूबर तक समाधान

भारत आम सहमति से ऐसा समाधान निकालने के हक में है, जिसे लागू करना और पालन करना सरल हो। इसके साथ ही समाधान अर्थपूर्ण होना चाहिए और देशों के बाजारों की आय सतत होनी चाहिए। खासतौर से विकासशील तथा उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह बहुत जरूरी है। भारत इस संबंध में अक्टूबर तक समाधान चाहता है और समाधान के दोनों बिन्दुओं के हवाले से आम सहमति के आधार पर उनके क्रियान्वयन के लिए तैयार है। इस दिशा में वह अंतर्राष्ट्रीय टैक्स एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक योगदान करने के लिए भी राजी है।

 

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