ऐसे करें मलेरिया से बचाव,सतर्कता जरूरी

ऐसे करें मलेरिया से बचाव,सतर्कता जरूरी

कई महीने कोरोना की मार झेलने के बाद, जहां अब वायरस का संक्रमण कम हो गया है। वहीं मॉनसून के साथ ही सामान्य सर्दी फ्लू के अलावा मलेरिया के भी मरीज आने लगे हैं। ऐसे में लोगों अधिक सावधान रहने की जरूरत है।मलेरिया पैरासाइट से होने वाला रोग, जिसका संक्रमण संक्रमित एनाफिलीज मादा मच्छर के काटने से व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करता है। संक्रमित मच्छर के काटने से 10 से 15 दिन की अवधि में व्यक्ति में मलेरिया के लक्षण नजर आने लगते हैं। मलेरिया के लक्षण और बचाव के बारे में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुनील एम रहेजा ने महत्वपूर्ण जानकारी दी।

मलेरिया के लक्षण

>तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द
> कंपकपी
>खून की कमी या एनीमिया
>उल्टी
>पेट में दर्द
>जिगर और तिल्ली पर प्रभाव
>बेहोशी
>पेशाब न आना

बच्चों में मलेरिया गंभीर होने पर उसमें कई अन्य लक्षण भी आ सकते हैं। बच्चे को अत्यधिक एनीमिया हो सकता है। सांस लेने में परेशानी हो सकती है या फिर सेरेब्रल मलेरिया भी हो सकता है। वयस्कों में अगर मलेरिया बिगड़ जाए, तो व्यक्ति की स्थिति गंभीर हो सकती है और उसके शरीर के अंग काम करना बंद कर सकते हैं।

मलेरिया से बचाव

>मच्छरदानी में सोए
>घर की खिड़की और दरवाजे पर जाली लगवाएं
>पूरी बाजू के कपड़े पहने
>शरीर को ढक कर रखें
>मच्छर भगाने वाली दवा का प्रयोग करें
>घर के आस-पास पानी इकट्ठा न होने दें
>मच्छरों का मारने वाले रासायनिक दवाएं पानी में डालें
>घर में मच्छरों को मारने वाली दवाएं डाले

मलेरिया की जल्द पहचान और इलाज जरूरी है। लेकिन कभी भी खुद से किसी भी तरह की दवा का सेवन न करें। हमेशा डॉक्टर के कहने के बाद जांच कराएं और दवा लें। डॉ. रहेजा ने कहा कि अभी तक मलेरिया की कोई वैक्सीन नहीं आई है, जिससे पहले ही लगवा कर बचा जा सके। इसलिए इससे बचाव बहुत आवश्यक है।

2030 तक मलेरिया को खत्म करने का लक्ष्य

भारत सरकार ने 2030 तक मलेरिया को खत्म करने के लिए एक योजना का अनावरण किया है। मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 11 फरवरी, 2016 को नेशनल फ्रेमवर्क फॉर मलेरिया एलिमिनेशन (NFME) 2016-20 लॉन्च किया गया। इसके अलावा सरकार ने मलेरिया उन्मूलन (2017-2020) के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना का मसौदा तैयार किया, जिसमें देश को मलेरिया के केस के आधार पर चार श्रेणियों – श्रेणी 0 से श्रेणी 3 में स्तरीकृत किया गया है और इसके आधार पर मलेरिया नियंत्रण और रोकथाम को मजबूत किया जा रहा है। सामुदायिक स्तर पर शीघ्र निदान और शीघ्र उपचार के लिए ASHAs के साथ रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) और एंटीमरल दवाओं की उपलब्धता।

कोरोना में चुनौतियां बढ़ी

कोरोना वायरस काल में अन्य बीमारी को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग सक्रिय है। ऐसे में बरसात के मौसम में मच्छर जनित रोग सबसे ज्यादा फैलते हैं, जिनसे सिर्फ कोई एक बीमारी नहीं बल्कि कई संक्रामक बीमारी फैलने का भी खतरा रहता है। कोविड के दौर में चुनौती ज्यादा है क्योंकि मच्छर से काटने से होने वाली बीमारी के लक्षण भी कोरोना के लक्षण जैसे ही हैं।

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