73 सालों में कैसे सुपरपॉवर बना इजरायल

73 सालों में कैसे सुपरपॉवर बना इजरायल

इजरायल आज अपनी आजादी और स्थापना की 73वीं वर्षगांठ मना रहा है। इजरायल और भारत को थोड़े अंतराल पर ही आजादी मिली थी।उसका क्षेत्रफल हरियाणा या मणिपुर जैसे राज्यों से भी कम ही होगा लेकिन इसके बाद भी आज वो ना केवल पूरी तरह आत्मनिर्भर है बल्कि सुपरपॉवर भी। इजरायल की यहां तक पहुंचने की कहानी काफी कुछ सीखने का मौका भी देती है।

पहले विश्व युद्ध के पहले फ़लस्तीन ऑटोमन साम्राज्य का एक ज़िला था।पहले विश्व युद्ध में ऑटोमन साम्राज्य को ब्रिटेन और उसके सहयोगियों से हार का सामना करना पड़ा।इसके बाद वो ब्रिटेन के कंट्रोल में आ गया।हालांकि ये काफी जटिल स्थिति थी। इस इलाक़े में अरबी रहते थे और लंबे समय यहूदी ऐतिहासिक आधार पर इस इलाके पर अपना दावा करते थे और यहां रहना चाहते थे।

यहूदियों का कहना था कि इस इलाक़े से उनका हजारों सालों से ऐतिहासिक और धार्मिक संबंध रहा है। 20वीं शताब्दी की शुरुआत में हज़ारों यहूदी दुनियाभर से इसराइल बनने से पहले इस इलाक़े में आने लगे। ये ऐसा समय था जब यहुदियों को यूरोप और रूस में यातनाएं सहनी पड़ रही थीं। नाज़ियों ने जब 40 के दशक में यहूदियों पर घोर अत्याचार किया तो उनका बड़े पैमाने पर जर्मनी से इस इलाके में पलायन हुआ।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन ने फ़ैसला किया कि अब फ़लस्तीनी इलाक़े पर संयुक्त राष्ट्र निर्णय करे कि क्या करना है।अब तक यहूदी जोर-शोर से इस इलाके को उनका राष्ट्र बनाने की मांग करने लगे थे। संयुक्त राष्ट्र ने फ़लस्तीन को दो देशों में बांटने का सुझाव दिया। एक अरब और दूसरा यहूदियों के लिए। अरबियों ने इसे खारिज कर दिया लेकिन यहूदी नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए इजरायल की घोषणा कर दी।अमेरिका ने तुरंत इजरायल को मान्यता दे दी।

इसके बाद युद्ध हुआ।लेकिन आखिरकार धीरे धीरे एक देश के रूप में इसराइल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलती गई।हालांकि ये इतना आसान तो वाकई नहीं था। इसराइल पूर्वी भूमध्य सागर के आख़िरी छोर पर स्थित है। इसका दक्षिणी छोर लाल सागर तक है। पश्चिम में यह मिस्र से लगता है और पूर्व में जॉर्डन से।लेबनान इसके उत्तर में है और सीरिया उत्तर-पूर्व में।

इजरायल की आबादी 85 लाख के आसपास है। यहां ना तो ज्यादा खनिज संपदा थी और ना ही उर्वर मिट्टी थी। ना तेल और ना ही अनुकूल हालात लेकिन जिस तरह यहुदियों ने इस देश को बदलकर रख दिया और धीरे धीरे हर क्षेत्र में बेहतर बनाया,उसकी मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है। चाहे बात कृषि की हो या फिर साइंस रिसर्च की या फिर सैन्य क्षमता की-इजरायल ने हर किसी को जबरदस्त तरीके से प्रभावित किया।

तब इजरायल ने अमेरिका में संतरा, केरोसीन स्टोव और नकली दांत बेचने की कोशिश की,तब दुनिया में कहा जाता था कि ये देश कभी अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाएगा। लेकिन आज वो हाईटेक सुपरपॉवर है।सबसे ज्यादा आधुनिक हथियार बेचता है।दुनिया की दवाइयों के बहुत से पेटेंट उसके पास हैं।वो हर तरह की रिसर्च में बहुत आगे है वो अपनी जीडीपी का 4.5 फीसदी खर्च शोध पर करता है।उसने अपने देश में हर सेक्टर में ऐसा सिस्टम तैयार किया,जिसे मिसाल माना जाता है।

इजरायल में हर नागरिक के लिए सेना में सेवा देना ज़रूरी है।चाहे महिला हो या पुरुष-उसे सेना में सेवा देनी ही होती है। इजरायल के तकरीबन सारे ही नेता और प्रधानमंत्री सेना में काम करके ही सत्ता में आए।इसलिए वो सभी इजरायल की सामरिक ताकत पर हमेशा ध्यान भी देते रहे।पश्चिम के देश मध्य-पूर्व में एक ठिकाने के रूप में इसराइल को सबसे सुरक्षित देश मानते हैं।

1989 में इजरायल ने अंतरिक्ष में पहला जासूसी उपग्रह छोड़ा.। इसके साथ ही वो आठ देशों के ख़ास समूह में शामिल हो गया,जिनके पास स्वतंत्र रूप से उपग्रह प्रक्षेपण की क्षमता है। शुरुआत में कहा जा रहा था कि इजरायल शायद ही इस क्लब में शामिल हो पाए। अब तो वो उपग्रह प्रक्षेपण के मामले में काफ़ी आगे निकल चुका है।कहा जाता है कि दुनिया भर में इजरायल के जासूसी उपग्रह का कोई जवाब नहीं।

फिलहाल इजरायल के पास अपने खुद के विकसित किए हुए टैंक,सैन्य सिस्टम,मिसाइल्स और लड़ाकू विमान हैं,जिनकी मांग दुनियाभर में है।यहां तक भारत भी उससे बड़े स्तर सैन्य साजोसामान खरीदता है. मेडिकल सेक्टर में वो जो उपकरण बनाता है, वो भी बेजोड़ हैं।पूरी दुनिया में इजरायल, हांगकांग और दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था को सबसे स्थिर माना जाता है।ऐसा शून्य मंहगाई दर और बेरोज़गारी में भारी कमी के आधार पर कहा जाता है।इजरायल की कुल जीडीपी 318.7 अरब डॉलर है।आर्थिक विकास दर 04 फीसदी के आसपास।इजरायल ने भी 70 के दशक में ही परमाणु हथियार विकसित कर लिए थे। वॉशिंगटन स्थित संस्था आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार इजरायल के पास कुल 80 परमाणु हथियार हैं।तकनीक क्षमता में अब उसका लोहा पूरी दुनिया मानती है।

 

 

 

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