दवा उत्पादन के लिए कच्चा माल और सप्लाई चेन कितने जरूरी ? 

दवा उत्पादन के लिए कच्चा माल और सप्लाई चेन कितने जरूरी ? 

नई दिल्ली। भारत अपने आदर्श वाक्य ‘वसुधैव कुटुंबकम’ में विश्वास करता है और इसने कोरोना काल में इसे साबित भी किया है। करीब 133 करोड़ की आबादी वाला देश भारत आज कोरोना के इलाज में प्रयोग होने वाली जरूरी सामग्री अपने देश के अलावा दुनिया के कई देशों तक पहुंचा रहा है। वैक्सीन मैत्री इसका उदाहरण है। भारत वैक्सीन के अलावा सस्ती दवा,चिकित्सा उपकरण और पीपी कीट का उत्पादन करता है तथा इन्हें कम दामों पर विकासशील देशों को उपलब्ध कराता है।

बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की ओर से आयोजित विश्व कोविड-19 शिखर वार्ता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने पूरी दुनिया के सामने भी वैक्सीन मैत्री को लेकर अपनी बात रखी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कभी मदद से पीछे नहीं हटेगा,बशर्ते उसे जरूरी कच्चा माल दूसरे देशों से सप्लाई होता रहे।

दरअसल,पीएम मोदी ने कहा कि भारत में नई वैक्सीन विकसित करने का काम चल रहा है, जिससे वैक्सीन उत्पादन क्षमता में और बढ़ोतरी होगी। जैसे-जैसे भारत का वैक्सीन उत्पादन बढ़ेगा,दुनिया के अन्य देशों को वैक्सीन की आपूर्ति बढ़ेगी। इसके साथ ही उन्होंने साफ कहा कि इसके लिए यह सुनिश्चित होना चाहिए कि भारत के औषधि उद्योग की कच्चे माल की जरूरतों की आपूर्ति होती रहे।दुनिया के छोटे और विकासशील देशों की मदद के लिए चलाए जा रहे वैक्सीन मैत्री के लिए कच्चा माल बहुत जरूरी है।

भारत अकेले कर सकता है पूरी दुनिया को वैक्सीन की आपूर्ति

दरअसल फार्मास्यूटिकल में भारत विश्व का पावर हाउस है। दुनिया में 70 प्रतिशत दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग भारत करता है। कोविड19 के दौर में भी एक तरफ जहां अभी भी दुनियाभर में वैक्सीन पर शोध चल रहा है,दूसरी ओर दुनिया के तमाम बड़े-छोटे देश वैक्सीन के लिए भारत की ओर आशान्वित है। भारत पूरी दुनिया को वैक्सीन उपलब्ध करा सकता है,भारत की इस क्षमता से खुद माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स भी इत्तेफाक रखते हैं। कोरोना के शुरुआत दौर में ही उन्होंने कहा था कि भारत का फार्मास्यूटिकल उद्योग न केवल अपने देश के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए कोरोना वैक्सीन का उत्पादन करने की क्षमता रखता है।

भारत के पास कई दवा और वैक्सीन कंपनियां हैं, जो पूरी दुनिया के लिए काफी विशाल आपूर्तिकर्ता हैं। भारत में किसी भी देश से ज्यादा वैक्सीन बनाई जाती है। इसमें सीरम इंस्टीट्यूट सबसे बड़ा नाम है। इसके अलावा बायो ई, भारत बायोटेक और जायडस कैडिला जैसी कई अन्य कंपनियों पर कहा कि ये कंपनियां देश में कोरोना वैक्सीन के निर्माण में मदद करने के लिए काम कर रही हैं।

भारत में कोविड वैक्सीनेशन की शुरुआत दुनिया के कई देशों के बाद शुरू हुई। भारत में वैक्सीनेशन कार्यक्रम इस साल की शुरुआत यानि 16 जनवरी से हुई और उसके ठीक पांच दिन बाद विश्व बंधुत्व की भावना और ‘एक धरती, एक स्वास्थ्य’ के मंत्र को अपनाते हुए भारत ने वैक्सीन मैत्री की शुरुआत कर दी। तब से लेकर अब तक भारत ने 96 देशों और संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों को वैक्सीन की आपूर्ति कर चुका है। आंकड़ों के मुताबिक भारत 6 करोड़ 63 लाख से ज्यादा वैक्सीन की सप्लाई दूसरे देशों में कर चुका है। जबकि भारत के 80 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। यानि साफ है कि भारत खुद के साथ ही दुनिया को भी वैक्सीन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

उत्पादन और आपूर्ति के लिए कच्चे माल जरूरी

दुनिया के कई देशों में कोरोना की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। भारत में भी संभावना जताई जा रही है। ऐसे में भारत अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझता है और वैक्सीन उत्पादन क्षमता में वृद्धि कर रहा है। इसके साथ ही भारत ने आने वाले महीने में एक बार फिर वैक्सीन मैत्री की शुरुआत करने जा रहा है। इस पहल में भारत के साथ सीईपीआई और डब्ल्यूएचओ भी हैं।

भारत की वैक्सीन क्षमता को की अन्य देश भी पहचानते हैं,इसलिए जून में हुए जी-7 बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी भारत की वैक्सीन निर्माता कंपनियों के सामने कच्चे माल की उपलब्धता में आ रही कठिनाई का जिक्र किया। मैक्रों ने कहा कि भारत में बड़े पैमाने पर वैक्सीन का उत्पादन करने के लिए जरूरी है कि कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित हो।

30 देशों में पाया जाता है कच्चा माल

भारत के वैक्सीन निर्माताओं के लिए कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता जरूरी है। वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वैक्सीन बनाने वाली कंपनी को वैक्सीन बनाने में करीब 9 हजार विभिन्न सामग्रियों का उपयोग करना होता है। ये सामग्रियां लगभग 30 देशों के 300 आपूर्तिकर्ताओं से प्राप्त की जाती हैं। इनमें से न्यूक्लिक एसिड,अमीनो एसिड फिनोल,एसाइक्लिक एमाइड,लेसिथिन और स्टेरोल आदि कई कच्चे माल की जरूरत होती है। ऐसा नहीं है कि भारत अन्य विकल्पों को नहीं तलाश रहा है,लेकिन कोरोना काल में तमाम तरह की कठिनाई और कच्चे माल की बढ़ती मांग की वजह से कई देश आपूर्ति समय पर नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि अमेरिका और यूरोप के कई देशों के पास कच्चा माल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं। ऐसे में सभी देशों को मिलकर भारत के साथ खड़ा होना होगा। तभी कोरोना के संकट से आजादी मिल सकेगी।

सप्लाई चेन को करना होगा मजबूत

कुछ दिन पहले डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने कहा था कि महामारी के दौरान वैक्सीन की अफोर्डेबिलिटी और संचय करने की क्षमता ने ‘नैतिक पतन’ को करीब ला दिया है। अमीर देश अपनी पूरी आबादी की तुलना में कई गुना अधिक वैक्सीन सुरक्षित कर चुके हैं। हालांकि भारत के संदर्भ में ऐसा नहीं है। भारत डब्ल्यूएचओ के साथ मिलकर वैक्सीन मैत्री और कोवैक्स की पहल कर रहा है। जिससे दूसरे देशों को भी वैक्सीन मिल सके। लेकिन वैक्सीन उत्पादन के लिए जरूरी है कि भारत को कच्चे माल की उपलब्धता प्राथिकता के आधार पर हो। इसके लिए एक मजबूत सप्लाई चेन की जरूरत है, जिससे दुनिया के उन देशों तक भी वैक्सीन पहुंचा सके जहां अभी तक एक डोज भी नहीं पहुंची है।
कही न कहीं दुनिया की अर्थव्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए आवागमन बहुत जरूरी है और इसके लिए वैक्सीनेशन। भारत पूरी दुनिया को वैक्सीन देने की क्षमता रखता है। इसलिए अर्थव्यवस्था के साथ वैश्विक महामारी के संकट से उबरने में भारत दुनिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

एक नजर डालते हैं विश्व में भारत के फार्मास्युटिकल निर्यात पर

>विश्व में 20% जेनेरिक दवाइयों के निर्यात का हिस्सा भारत के पास है

>10,500 से अधिक औद्योगिक केंद्रों के मजबूत नेटवर्क के साथ 3,000 से अधिक फार्मा कंपनियों का घर है

>दुनिया में सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक देश भारत है

>टीकों के मामले में वैश्विक मांग का 62% आपूर्ति करता है

>एशिया में चौथा सबसे बड़ा चिकित्सा उपकरण बाजार है

>भारत के कुल वैश्विक उत्पादन का 12% अमेरिकी बाजार में जाता है

>भारत में विनिर्माण की लागत अमेरिका की तुलना में लगभग 33% कम है

>2019-20 से, भारत के फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट्स की कीमत 20.59 बिलियन डॉलर थी, तो वहीं 2020-21 में फार्मास्युटिकल निर्यात बाजार का कारोबार 24.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जिसमें 18.1 प्रतिशत (वर्ष-दर-वर्ष) की वृद्धि देखी गई।

Share