प्रेम और सौन्दर्य से जुड़ी हरियाली तीज, महिलाएं क्यों साल भर करती हैं हरियाली तीज का इंतजार?

नई दिल्ली। भारत तीज-त्यौहारों वाला देश है यहां हर सप्ताह लगभग नौ त्यौहार मनाये जाते हैं। हिंदुस्तान की पावन मिट्टी का कण-कण ईश्वरीय चेतना से ओत-प्रोत है। यहां घंटे, मिनट, सेकेंड ही नहीं बल्कि पल और घटी तक का ध्यान रख कर तिथियों की गणना होती है।

हिंदू धर्म होने के साथ-साथ जीवन जीने की कला है, विज्ञान है, जहां चैत्र से लेकर फाल्गुन तक की हर तिथि बेहद खास है। इसका सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व भी होता है।

पवित्र सावन महीने के शुक्ल पक्ष में आज की तिथि तृतीया को हरियाली तीज  कहा जाता है। सावन की बारिश में यूं तो चारों ओर हरियाली छाई रहती है और भारतीय महिलाओं को सावन का महीना खूब पसंद आता है। भला ऐसे मनमोहक वातावरण में पति की लंबी उम्र का वरदान मिले और परिवार का सौभाग्य भी चमक जाए तो इसे सोने पे सुहागा ही कहा जाएगा।

हरियाली तीज के दिन वनस्पति, नदियों और जल के देवता की भी पूजा की जाती है। मनचाहा वर भी माता प्रदान करतीं हैं इसीलिए भी इसे हरियाली तीज कहा जाता है। ये त्यौहार उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान में खासतौर पर मनाया जाता है।

प्रकृति ने भारत भूमि को कई वरदान दिए हैं। वेद और पुराण भारत के तीज त्यहारों की पुष्टि करते हैं। कई त्यौहार दंत कथाओं से जुड़े हैं और मान्यताओं को पूरा करने के लिए अपने देश में व्रत और तपस्या का विधान है। भारतीय महिलाओं की तपस्या कई रूपों में 12 महीने चला करती है तो भला सावन इससे कैसे अछूता रह सकता है।

सनातन हिंदू धर्म में हरियाली तीज का विशेष महत्‍व है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के रूप में हरियाली तीज की मान्यता है जिसे महिलाएं पूरे धूम-धाम से मनाती हैं। इस व्रत को करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है इसीलिए हरियाली तीज के शुभ अवसर पर महिलाएं 16 श्रृंगार कर पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं।

आज हरे कपड़े पहनने का विशेष महत्व होता है। महिलाएं पूजन के बाद सावन के गानों पर झूला झूलती हैं। सावन के महीने में सुहागनों को हरियाली तीज का इंतजार होता है क्योंकि हरियाली तीज प्रकृति के साथ खुद के प्रेम और सौन्दर्य से जुड़ी है। एजेंसी