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सबरीमाला मंदिर में आरिफ मोहम्मद को देखकर कट्टरपंथी मुस्लिमों का हुआ हाजमा खराब

केरल। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सबरीमाला मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की। हिन्दुओं ने जहाँ इसका स्वागत किया है, वहीं कई कट्टरपंथी मुस्लिमों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन पर निशाना साधा। ‘वोक मुस्लिम’ नामक ट्विटर हैंडल ने लिखा कि आरिफ मोहम्मद खान एक ‘गंगा-जमुनी’ मुस्लिम नहीं, बल्कि एक मौकापरस्त है, जिसने फायदों और सत्ता के लिए अपने ईमान व रूह को बेच डाला।

ज़िआउद्दीन अहमद ने लिखा, “ये सेक्युलरिज्म नहीं है, ये उच्च-स्तर का दोहरा रवैया है। आप अपना काम करो और मैं अपना काम करूँगा, कानून के तहत – ये है सेक्युलरिज्म।” वहीं शम्स उर्रहमान अल्हावै ने लिखा कि ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ का ये मतलब नहीं है कि कोई मुस्लिम मंदिर में जाए या हिन्दू मस्जिद में जाए। वहीं आसिफ डॉक्टर नामक हैंडल ने पूछा कि क्या किसी हिन्दू नेता ने आज तक नमाज पढ़ी है?

वहीं एक ‘शो मर्सी’ नामक ट्विटर हैंडल ने इसे क़यामत की निशानी बताया। नसरुल्लाह नामक यूजर ने कहा कि ये आदमी (आरिफ मोहम्मद खान) हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुण गाते रहते हैं। वहीं शरीक नामक व्यक्ति ने स्पष्ट किया कि आरिफ उत्तर प्रदेश के मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व नहीं करते। एक ऐसे ही ट्विटर हैंडल ने आशंका जताई कि कई ऐसे RSS के लोग हैं जो मुस्लिम नाम रख कर मुस्लिमों को बदनाम कर रहे हैं।

आरिफ मोहम्मद खान के खिलाफ सोशल मीडिया पर कट्टरपंथियों ने उगला ज़हर
वहीं हिन्दुओं में से अधिकतर ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि अगर वो विधि-विधान के साथ चीजें नियमानुसार कर रहे हैं तो कोई दिक्कत नहीं है। कुछ लोगों ने पूछा कि सबरीमाला मंदिर में जाने से पहले उपवास करना होता है और माँसाहार नहीं करना होता है, तो क्या उन्होंने इसका पालन किया? कई हिन्दुओं ने आशंका जताई कि जल्द ही आरिफ मोहम्मद खान के खिलाफ फतवा जारी हो सकता है, क्योंकि उन्होंने कट्टरपंथियों के हिसाब से ‘कुफ्र’ किया है।

वहीं ‘ऐसी-तैसी डेमोक्रेसी’ पेज पर शाइस्ता कुरैशी ने लिखा, “हम तो बचपन से आरिफ मोहम्मद खान को सिर्फ़ मुसलमान नाम वाला हिंदू मानते हैं। ऐसे लोग ना कभी मुसलमान थे और ना रहेंगे। कुरान में ऐसे लोगों को ही ‘मुनाफ़िक़ीन’ (दोगला) कहा गया है। ये तब भी गुमराह करते थे कौम को, ये आज भी गुमराह कर रहे हैं। हम तो इन पर शुरू से थूकते है, थूकते रहेंगे।” इसी तरह कई अन्य ने भी उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।

बता दें कि 70 वर्षीय आरिफ मोहम्मद खान 80 के दशक में केंद्रीय मंत्री हुआ करते थे। लेकिन शाहबानो मामले में जब राजीव गाँधी ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट कर मुस्लिम तुष्टिकरण को एजेंडा बनाया, तब उन्होंने कॉन्ग्रेस छोड़ दी। मात्र 26 की उम्र में बुलंदशहर के सियाना से विधायक बने थे। वो 1980 में कानपुर से पहली बार सांसद बने। 1884, 89 और 98 में उन्होंने बहराइच लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया। सितम्बर 2019 से वो केरल के राज्यपाल हैं।

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