मूलचंद अस्पताल में गोह दिखने से मचा हड़कंप,वाइल्डलाइफ एसओएस ने किया रेस्क्यू

आगरा आगरा के नेशनल हाईवे 2 पर स्थित मूलचंद मेडिसिटी में फायर सेफ्टी स्टैंडपाइप पर तीन फुट लंबी गोह दिखने से सभी भयभीत हो उठे। गोह को वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने सफलतापूर्वक पकड़ा l कुछ घंटों की चिकित्सकिये निगरानी के बाद, गोह को वापस जंगल में छोड़ दिया गया।

मूलचंद मेडिसिटी में मरीजों और उपस्थित कर्मचारियों के लिए रविवार की शाम सामान्य से काफी अलग रही, जब उन्होंने अस्पताल परिसर में तीन फुट लंबी गोह को देखा। गोह अस्पताल की इमारत की पहली मंजिल पर बने फायर एग्जिट की फायर सेफ्टी स्टैंडपाइप के ऊपर बैठी थी।

वाइल्डलाइफ एसओएस को उनके 24 घंटे के बचाव हेल्पलाइन (+ 91-9917109666) पर इस घटना की खबर मिलते ही वन्यजीव संरक्षण संस्था से दो-सदस्यीय रेस्क्यू टीम तुरंत स्थान पर पहुची। गोह से जुड़े बचाव अभियान अक्सर संवेदनशील होते हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है की बचाव अभियान के दौरान मौजूद लोग उससे उचित दूरी पर रहें। सफलतापूर्वक पकड़ने के बाद वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने तीन फुट लंबी गोह को वापस जंगल में छोड़ दिया।

अस्पताल में कार्यरत, बिलिंग एक्ज़ीक्यूटिव, शुभम शर्मा ने बताया,
“फायर सेफ्टी सिस्टम पर बैठी इतनी बड़ी छिपकली को देखना हमारे लिए काफी डरावना द्रश्य था। हम वाइल्डलाइफ एसओएस टीम की तुरंत प्रतिक्रिया के लिए उनके आभारी हैं। ”

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “हमें खुशी है कि अस्पताल ने हमारी टीम को इस घटना की जानकारी दी। लोगों का वन्यजीवों के प्रति यह अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण हमारे इरादों को और मज़बूत करेगा। गोह ज्यादातर आक्रामक नहीं होती, लेकिन उकसाने या गलत तरीके से पकड़ने पर वह प्रतिशोध में अपने मजबूत पंजों से घायल भी कर सकती हैं। ”

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एम.वी ने कहा, कि”लोगों में यह धारणा है कि मॉनिटर लिजार्ड (गोह) जहरीली और आक्रामक होती हैं, लेकिन वास्तव में, ऐसा कुछ भी नहीं है, गोह ज़हरीली नहीं होती और मनुष्यों से दूर रहना ही पसंद करती हैं। हालांकि, इनके पास नहीं जाना ही सबसे उचित विकल्प है, क्योंकि अगर इन्हें निकलने का रास्ता नहीं दिया जाए, तो हमले की संभावना बढ़ जाती है। ”

बंगाल मॉनिटर या कॉमन इंडियन मॉनिटर भारत में पाए जाने वाले चार मॉनिटर लिज़ार्ड की प्रजातियों में से एक है, और यह सभी भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची 1 के तहत संरक्षित हैं एवं इनके शरीर के अंगों के आयात या निर्यात पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा हुआ है।

वाइल्डलाइफ एसओएस ने सिकंदरा स्थित प्रिंटिंग प्रेस- ज्ञान डिजिटल ग्राफिक्स से एक कोबरा को भी पकड़ा। इसके बाद आगरा के बिचपुरी रोड स्थित शिवालिक पब्लिक स्कूल से 5 फुट लंबे अजगर को भी बचाया।