फिरोजाबाद: 8 करोड़ से बन रहे नाले में गोलमाल

फिरोजाबाद: 8 करोड़ से बन रहे नाले में गोलमाल

फिरोजाबाद। सुहागनगरी में जल निगम सी.एंड.डी.एस आगरा द्वारा 8 करोड़ की लागत से बन रहे 1600 मीटर आरसीसी नाला निर्माण कार्य में गोलमाल सामने आया है।शहर की लेबर कॉलोनी वाल्मीकि बस्ती में तकरीबन 60 मीटर नाले का निर्माण कार्य ना करके ठेकेदार ने सरकार को लाखों रुपयों का चूना लगाने का चक्रव्यूह रच दिया। जबकि एचबीटीयू और डीएम द्वारा गठित टास्क फोर्स कमेटी ने नाले की गुणवत्ता को संतोषजनक पाकर हरी झंडी दे दी। वही पूर्व में नाले की गुणवत्ता को लेकर शिकोहाबाद विधायक मुकेश वर्मा ने सवाल उठाए थे। नाला छोड़ जाने को लेकर विभाग के अधिकारी सरकार से धनराशि ना मिलने की बात कह रहे हैं। वर्तमान में 1200 मीटर से अधिक नाले का निर्माण कार्य हो चुका है। यह टेंडर 8,410 करोड़ का है।नाला निर्माण कार्य मैसर्स श्रीटेक कंस्ट्रक्शन कंपनी के द्वारा किया जा रहा है।

सदर विधायक मनीष असीजा ने नाला निर्माण का प्रस्ताव दिया था।इस भ्रष्टाचार में नेता,अधिकारी और ठेकेदार की मिलीभगत होने की संभावना है। क्या नाला निर्माण में ठेकेदार के द्वारा सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है,बड़ा सवाल है? क्षेत्रीय लोग इस पर सवाल उठा रहे हैं? इस खेल में ठेकेदार के साथ अधिकारियों के भी शामिल होने की आशंका है।वहीं इस अनदेखी पर प्रस्तावक विधायक ने कोई आवाज नहीं उठाई। इस मामले की निष्पक्ष जांच होने पर कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

सी.एंड.डी.एस जल निगम आगरा द्वारा दो नालें नगर निगम क्षेत्र के लेबर कॉलोनी कलवर्ट से वाल्मीकि बस्ती तक 660 रनिंग मीटर आरसीसी नाले का 3.501करोड़ तथा रेलवे लाइन से लेबर कॉलोनी कलवर्ट तक 930 मीटर आरसीसी नाले का निर्माण 4.909 करोड़ों रुपए की धनराशि से 1600 मीटर नाले का निर्माण कार्य कराया जा रहा है जिसकी कुल लागत 8410 करोड़ रुपए है। नाला 2 मीटर चौड़ा है।विभाग को अबतक नगर विकास से करीब 3 करोड रुपए की धनराशि प्राप्त हो चुकी है। दूसरी किस्त सरकार की तरफ से रिलीज नहीं हुई है। वर्तमान में सी.एंड.डी.एस ने करीब 12 सौ मीटर से अधिक नाले का निर्माण कर दिया है। ठेकेदार ने लेबर कॉलोनी वाल्मीकि बस्ती से दतौजी करीब 60 मीटर नाला बनाया ही नहीं।इस जगह नाले को छोड़ दिया गया।विभाग के साइट इंजीनियर ने गोलमाल को अनदेखा कर आगे के हिस्से के नाले का निर्माण कार्य कर दिया।

पूर्व में शिकोहाबाद विधायक मुकेश शर्मा ने नाला निर्माण की लंबाई चौड़ाई और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए थे। इस पर डीएम फिरोजाबाद चंद्र विजय सिंह ने नाले की जांच कराने को तीन सदस्य टास्क फोर्स कमेटी का गठन किया था। जांच कमेटी में अवर अभियंता विष्णु स्वरूप,सहायक अभियंता महेश कुमार यादव तथा प्रधानाचार्य/नोडल अधिकारी हरिसिंह राजकीय पॉलिटेक्निक शामिल थे।जांच कमेटी ने नाले की गुणवत्ता को संतोषजनक पाकर हरी झंडी दे दी. जांच कमेटी की छूटे हुए नाले पर नजर नहीं गई जांच कमेटी ने किस आधार पर ठेकेदार को संतोषजनक निर्माण कार्य का सर्टिफिकेट दे दिया।दूसरी ओर,हरीकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय कानपुर( एचबीटीयू) की टीम ने नाले की गुणवत्ता को लेकर थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन किया।एचबीटीयू के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के हेड डॉ प्रदीप कुमार ने डाटा के हिसाब से नाले की क्वालिटी टेस्ट रिपोर्ट को हरी झंडी दे दी।यह भी नहीं देखा कि ठेकेदार में कई मीटर नाला छोड़ दिया है। स्थानीय बाशिंदों का कहना है कि जांच कमेटी ने कागजों पर जांच की है।

क्षेत्रीय लोगों का कहना है लेबर कॉलोनी झरना कच्चा नाला से बेस्ट क्लास वाल्मीकि बस्ती होकर नाला बह रहा है।इस नाले में कई स्थानों से हजारों गैलन लीटर पानी आता है।कुछ माह पहले विधायक मनीष असीजा ने नाला निर्माण को लेकर श्रीफल तोड़कर उद्घाटन किया था। बेस्ट क्लास वाल्मीकि बस्ती में नाले के बीचोबीच आरसीसी नाले का निर्माण कार्य कराया गया है।जिसकी की चौड़ाई कम है,साइड की दीवारें छोटी है।गुणवत्ता भी खराब है। नाले में ज्यादा पानी का बहाव आने पर उसके डूब जाने की संभावना है। नाला निर्माण में कई मोड़ है। अगर लंबाई नापी जाए,तो इसकी लंबाई भी कम बैठ सकती है।

क्षेत्रीय नाला को छोड़ जाने के सवाल पर सी.एंड.डी.एस जल निगम आगरा के प्रोजेक्ट मैनेजर टीपी शर्मा सरकार से शेष धनराशि ना आना तथा वाटर डायवर्जन की बात कह रहे हैं।स्थानीय बाशिंदों का कहना है जब सरकार से अगली किस्त ही नहीं आई तो फिर लेबर कॉलोनी वाल्मीकि बस्ती के पास 60 मीटर नाला छोड़कर शेष 1200 मीटर से अधिक नाला ठेकेदार ने कैसे बना दिया? क्या जनता की आंखों में धूल झोंक कर सरकारी धन को ठेकेदार के द्वारा गोलमाल करने की मंशा थी? इस मामले में विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली भी जांच के दायरे में है।

लोगों का कहना है नाला के डाटा में नाले की चौड़ाई कम रखी गई है जिससे कि सरिया,आरसीसी,सीमेंट इत्यादि ठेकेदार को कम लगाना पड़े।बताते चलें कि जब नाला बनाया जाता है तो उसका मानक डाटा के हिसाब से तय होता है।डाटा के आधार पर ही नाला का निर्माण कर कराया जाता है।क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि नाला निर्माण में बड़ा भ्रष्टाचार होने की संभावना है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस मामले में संज्ञान लेकर उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए। नेता,अधिकारी और ठेकेदार मिलकर सरकारी धन का दुरुपयोग करने में लगे हैं।

“अधिकारी,उत्तर प्रदेश के योगी सरकार को  बदनाम करने में लगे हुए हैं।अधिकारी और ठेकेदार की मंशा ठीक नहीं है। नाले की चौड़ाई कम है। बरसात में नाले में पानी का फ्लो बहुत अधिक रहता है और यह नाला और चौड़ा बनना चाहिए था। नाले की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है। अधिकारी -ठेकेदार पैसा नहीं खाएंगे। नाले में पूरा पैसा लग जाएगा तो नाला चौड़ा बनता।बीच में नाला क्यों छोड़ा गया है,इसकी जांच कराई जानी चाहिए। जनता के पैसे का दुरुपयोग अगर अधिकारी और ठेकेदार करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।निष्पक्ष जांच हो जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”-मुकेश वर्मा,शिकोहाबाद विधायक ।

“नाला बीच में से क्यों छोड़ा गया है। उसकी जांच होनी चाहिए”- नूतन राठौर,महापौर फिरोजाबाद।

“सरकार से पैसा ना आने के कारण नाला बीच में छोड़ा गया है। वाटर डायवर्जन के बाद नाला बन पाएगा,जहां नाला छूटा हुआ है।”- प्रोजेक्ट मैनेजर टीपी शर्मा,सी.एंड.डी.एस जल निगम,आगरा। 

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