ई-नाम पर अपनी उपज को बेच सकते हैं किसान

ई-नाम पर अपनी उपज को बेच सकते हैं किसान

नई दिल्ली।केंद्र सरकार द्वारा किसानों के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें ऐसी ही एक पहल है ई-नाम। इसका पूरा नाम है राष्ट्रीय कृषि मार्केट(नैशनल ऐग्रिकल्चर मार्केट)। यह एक ऑनलाइन ट्रैडिंग मार्केट है,जहां पर देश के किसान अपनी उपज को बिना किसी बिचोलिए की मदद से बेच सकते हैं। यह सरकार द्वारा उठाया गया,अपनी तरह का पहला कदम है। यह प्लेटफॉर्म न सिर्फ किसानों के लिए मददगार है,अपितु खरीददार और व्यापारियों के लिए भी इस प्लेटफॉर्म ने कई मुश्किलें हल कर दी हैं। अब उन्हें अपनी मनपसंद की उपज एक ही जगह मिल जाती है। इस प्लेटफॉर्म ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने के लिए आसान अवसर मुहैया करवायें हैं।

2016 में शुरू की गई थी पहल

जैसा कि हम सभी जानते हैं, प्रधानमंत्री द्वारा किसानों की आय दुगुनी करने का वादा किया है। आय को दुगुना करने के क्रम में 14 अप्रैल 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ई-नाम(E-NAM) का शुभारंभ किया था। इसका मुख्य उद्देश्य देशभर के किसानों के लिए देशव्यापी लेवल पर एक बाजार का निर्माण करना है,जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिल सके। सरकार का दावा है कि 2022 तक किसानों की आय निश्चित रूप से बढ़ेगी यदि वे राष्ट्रीय कृषि बाजार के माध्यम से कृषि उत्पादों के अच्छे मूल्य प्राप्त करते हैं।

अबतक 1.73 करोड़ किसान हो चुके हैं पंजीकृत

शुरुआत में किसानों द्वारा इसको लेकर कम उत्साह देखने को मिला इसी के चलते शुरुआती कुछ वर्षों में इस प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में किसान नहीं आए। बाद जैसे-जैसे उन्हें इससे होने वाले लाभ का पता चला , उसके बाद बड़ी संख्या में किसानों ने अपनी उपस्थिति इस प्लेटफॉर्म पर दर्ज कराई। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में 1.73 करोड़ किसान और व्यापारी इस प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड हो चुके हैं। ये संख्या पिछले कुछ समय में काफी तीव्रगति से बढ़ रही है।

ई-नाम से जुड़ीं 1 हजार एपीएमसी

केंद्र सरकार ने पिछले साल तीन कृषि कानून पास किए थे,जिसमें एपीएमसी मंडियों के बाहर भी व्यापारियों को उपज खरीदने की अनुमति दी गई थी। दूसरे शब्दों में इस कानून को एक देश,एक कृषि कानून भी कहा गया। इसके बाद ई-नाम प्लेटफॉर्म का कवरेज बढ़कर 1,000 मंडियों तक हो गया है।

लघु एवं सीमांत किसानों के लिए पेंशन की योजना

इसके अलावा केंद्र सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करते हुए पेन्शन का प्रबंध किया है। केंद्र सरकर ने प्रधानमंत्री मानधन योजना के अंतर्गत 60 वर्ष के होने पर लघु एवं सीमांत किसानों को 3 हजार रुपए प्रति माह पेंशन दी जाएगी। इस योजना में किसान के अंशदान के बराबर अंशदान केंद्र सरकार देती हैं। इस योजना के अंतर्गत के मई 2021 तक 21 लाख किसान पंजीकृत हो चुके हैं।

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