ईको-ब्रिक्स, कचरा एवं पॉलीथिन-प्लास्टिक प्रबंधन प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

प्लास्टिक-पॉलिथीन को इधर-उधर ना फेंके: धर्मेंद्र भारत

फिरोजाबाद। शुक्रवार सुबह शहर के सरस्वती शिशु मंदिर गौशाला में ईको-ब्रिक्स कचरा एवं पॉलीथिन-प्लास्टिक प्रबंधन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता का शुभारंभ आरएसएस विभाग प्रचारक धर्मेंद्र भारत ने किया। इस दौरान प्रतिभागियों को 20 मिनट के समय में अपने साथ लाई गई प्लास्टिक- पॉलिथीन को एक बोतल में भरना था। प्रतिभागियों ने वेस्ट प्लास्टिक-पॉलीथिनों को बोतलों में भरा।
प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार यीशु वर्मा,द्वितीय महफूज को एवं तीसरा पुरस्कार रेशमा को मिला। छात्र छात्राओं को इको ब्रिक कचरा एवं पॉलीथिन प्लास्टिक प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई। कोरोना के कारण प्रतिभागियों की संख्या सीमित रहीं।

विश्व में प्लास्टिक की समस्या दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। इसे सड़ने में हजारों साल का समय लग जाता है। जाहिर है कि पानी के लिए इस्तेमाल की जानी वाली बोतलों को लोग इधर-उधर फेंक देते हैं। लेकिन,वे शायद ही यह जानते होंगे कि इन्हें नष्ट होने में करीब 450 साल लग जाते हैं।

बता दें कि प्लास्टिक न सिर्फ हमारे पर्यावरण के लिए हानिकारक है,बल्कि यह हमारे पारिस्थतिकी तंत्र को भी नुकसान पहुंचाता है। इसे जलाने से जहरीली गैस उत्पन्न होती है। लेकिन, अब इस प्लास्टिक कचरे से निजात पाने के लिए लोगों ने एक नया तरीका खोज निकाला है। देश में कई स्थानों पर इन खाली बोतलों का इस्तेमाल निर्माण कार्यों में किया जा रहा है जो कि एक अच्छी पहल है।

इस मौके पर विभाग प्रचारक धर्मेंद्र भारत ने प्रतिभागियों से कहा कि हमें प्लास्टिक पॉलिथीन को ऐसे ही नहीं फेंकना चाहिए। क्योंकि जमीन के द्वारा पानी में इसके कण मिल जाते हैं। वह थायराइड,कैंसर,लीवर एवं अनेक भयानक बीमारियों का जनक बन रही हैं,क्योंकि भारत में प्लास्टिक का प्रयोग अनेक देशों की तुलना में बहुत कम हैं। परंतु, इसका निस्तारण अन्य देशों की तुलना में बहुत खराब हैं।

क्योंकि हम प्लास्टिक पॉलिथीन को ऐसे कचरे में फेंक देते हैं। वह धरती पर जाकर जानवरों एवं मानव को बीमार कर देती हैं,अत:आप प्लास्टिक का प्रयोग बंद नहीं कर सकते तो, उसको फेंके नहीं वरन,उसको किसी बोतल में दबा-दबा कर भर दें,जिससे वह धरती के भीतर नहीं जाएगी। साथ ही 1 लीटर की पानी की बोतल में लगभग 330 सौ ग्राम प्लास्टिक आ जाती हैं। जिससे करीब 100 वर्ग फीट के जगह को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं। इस अवसर पर विभाग कार्यवाह बृजेश,महानगर पर्यावरण प्रमुख प्रवीण अग्रवाल,प्रवीण शर्मा,पीयूष,सिद्धार्थ,प्रशांत,सौरभ,सजल,विजय कुमार,वर्मा प्रवेश कुमार आदि मौजूद रहें।