रक्षा क्षेत्र ​में हुए सुधारों को बताएगी ​​ई-बुकलेट

रक्षा क्षेत्र ​में हुए सुधारों को बताएगी ​​ई-बुकलेट

नई दिल्ली​​। रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई सुधार और पहल की गई है। 2020 में ​​डिफेंस सेक्टर ​में किए गए प्रमुख सुधारों पर प्रकाश डालते हुए ​​​​’20 रिफॉर्म्स इन 2020′ शीर्षक से एक ई-बुकलेट जारी की गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ​ई-बुकलेट जारी करते इसे ​​देश में ​​रक्षा क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य पर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। यह पुस्तिका रक्षा ​​क्षेत्र को मजबूत और अधिक कुशल बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सक्षम नेतृत्व में सरकार के संकल्प का प्रतिबिंब है। ​उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ​​​​डिफेंस सेक्टर ​में किए गए सुधार आने वाले समय में ​​भारत को रक्षा क्षेत्र में वैश्विक शक्ति केंद्र बना देंगे​​।

रक्षा मंत्री ने कहा कि डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से सशस्त्र बलों में आधुनिकीकरण लाने के लिए 2020 में किए गए रक्षा सुधारों का इस ई-बुकलेट में उल्लेख किया गया है। यह सुधार प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल पर भी केंद्रित थे​।​ पुस्तिका में रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उद्योग के साथ सहयोग बढ़ाने, अधिक पारदर्शिता के साथ रक्षा अधिग्रहण में तेजी लाने, डिजिटल परिवर्तन, सीमा अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण, सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी, नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान एवं विकास में परिवर्तन, दूरदराज के स्थानों में एनसीसी का विस्तार और कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में नागरिक प्रशासन को सहायता देने के बारे में जानकारी दी गई है।​​

सीडीएस और एमडीए का गठन

​​भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति और सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) का निर्माण सरकार द्वारा लिए गए प्रमुख निर्णयों में से एक ​हैं​। सीडीएस का पद सशस्त्र बलों के बीच दक्षता और समन्वय बढ़ाने और दोहराव को कम करने के लिए बनाया गया ​है, जबकि बेहतर नागरिक-सैन्य एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए डीएमए की स्थापना की गई। जनरल बिपिन रावत को पहले सीडीएस के रूप में नियुक्त किया गया, जो सचिव, डीएमए की जिम्मेदारियों को भी पूरा करते हैं।

रक्षा​ उद्योग में ​’​आत्म​निर्भर भारत’​

रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए अगस्त, 2020 में 101 रक्षा वस्तुओं की एक सूची अधिसूचित की गई थी, जबकि सितम्बर, 2020 में नए सिरे से रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया-2020 शुरू की गई। 2020-21 में स्वदेशी रूप से निर्मित रक्षा उपकरणों के लिए 52,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया। अधिक दक्षता और उत्पादकता के लिए मई, 2020 में आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) के निगमीकरण को मंजूरी दी गई। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) ने मई, 2020 में कोविड-19 संकट के दौरान जरूरत को देखते हुए रिकॉर्ड समय में एक वेंटिलेटर विकसित किया। नवम्बर, 2020 में डीआरडीओ ने स्वदेश निर्मित ​​सतह से हवा में मार करने​ वाले ​पिनाका रॉकेट सिस्टम​ को ​​मध्यम दूरी और मध्यम ऊंचाई पर 45-60 किमी​.​ रेंज के परीक्षण को मंजूरी दी।​​​​

​रक्षा निर्यात में वृद्धि

​​निजी क्षेत्र के साथ बढ़ी हुई भागीदारी से रक्षा निर्यात में पर्याप्त वृद्धि हुई है। कुल रक्षा निर्यात का मूल्य 2014-15 में 1,941 करोड़ रुपये से बढ़कर 2019-20 में 9,116 करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा, भारत पहली बार रक्षा उपकरण निर्यातक देशों की सूची में शामिल हुआ, क्योंकि निर्यात 84 से अधिक देशों में विस्तारित हुआ।

​रक्षा अधिग्रहण में आधुनिकीकरण और पारदर्शिता ​बढ़ी ​

पिछले 10 वर्षों में आधुनिकीकरण ​पर सबसे अधिक जोर​ रहा और पिछले वर्ष की तुलना में 2020-21 ​के रक्षा बजट में 10 प्रतिशत की वृद्धि ​की गई। बढ़ी हुई पारदर्शिता के लिए नीतिगत सुधारों में सितंबर 2020 में नई रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया का शुभारंभ और अक्टूबर 2020 में डीआरडीओ खरीद नियमावली का संशोधन शामिल है।

रक्षा अधिग्रहण

​​जुलाई​,​ 2020 में पहले पांच राफेल लड़ाकू विमान भारत पहुंचे और तब से कई और​ राफेल फाइटर जेट भारत आकर भारतीय वायु सेना के ​बेड़े में शामिल हो चुके हैं, जिससे भारत की आसमान में मारक क्षमता ​बढ़ी है। ​कोविड​-19 ​की चुनौतियों के बावजूद​ फ्रांस ने समय पर विमानों की आपूर्ति की।​​

रक्षा अनुसंधान एवं विकास​ में सुधार ​

डीआरडीओ की पांच युवा वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं को 2020 में बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद में लॉन्च किया गया। डीआरडीओ ने डिजाइन और विकास में निजी क्षेत्र के साथ हाथ मिलाया है और उद्योग के डिजाइन,विकास और निर्माण के लिए 108 सिस्टम और सबसिस्टम की पहचान की है।

पहली बार रक्षा मंत्रालय के अनेक संगठन डिजिटल हो गए। महानिदेशालय गुणवत्ता आश्वासन (डीजीक्यूए) ने सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए मई 2020 में ऑनलाइन प्री-डिलिवरी निरीक्षण शुरू किया, जबकि सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने अगस्त 2020 में पहली बार डिजिटल सुनवाई शुरू की। रक्षा संपदा,कैंटीन स्टोर विभाग, छावनी में मौजूद सेवाएं,रक्षा मंत्रालय पेंशन और राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) ने भी तेजी से और पारदर्शी सेवाएं प्रदान करते हुए ऑनलाइन तरीके को अपनाया।

सीमा पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करना

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के भीतर प्रक्रियाओं और कार्य प्रवाहों में सुधार से कुछ मामलों में निर्धारित समय से पहले लक्ष्य प्राप्त किया जा सका। लेह-मनाली राजमार्ग पर रोहतांग में 10,000 फीट से ऊपर दुनिया की सबसे लंबी अटल सुरंग का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2020 में किया था। यह उत्तरी सीमाओं के लिए सभी मौसम में संपर्क प्रदान करती है। श्रीनगर-कारगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित जोजिला दर्रा को अप्रैल 2020 में निर्धारित समय से लगभग एक महीने पहले खोल दिया गया था।

सशस्त्र बलों में स्त्री शक्ति

2020 में रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कुछ ऐतिहासिक निर्णय लिए थे। भारतीय सेना के दस शाखाओं में शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान कर दिया गया, जबकि भारतीय नौसेना में पहली बार महिला पायलटों की शुरुआत की गई। शैक्षणिक सत्र 2020-21 से सभी सैनिक स्कूल छात्राओं के लिए खोल दिए गए।

एनसीसी में सुधार

15 अगस्त, 2020 को स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सुदूर इलाकों तक एनसीसी की पहुंच का विस्तार किया गया। सीमावर्ती और तटीय क्षेत्रों में 1,075 से अधिक स्कूलों/ कॉलेजों की पहचान की गई और नवंबर 2020 में नामांकन शुरू हुआ । एक अन्य फैसले में मई 2020 से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में रोजगार में एनसीसी कैडेटों को वरीयता देने का निर्णय लिया गया । एनसीसी कैडेटों के लिए युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम भत्ता 100 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 750 रुपये और देशों की संख्या 10 से बढ़ाकर 15 कर दी गई

कोविड-19 के दौरान नागरिक प्रशासन को सहायता

रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए संसाधन जुटाए हैं। सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (एएफएमएस) ने स्थिति से उबरने के लिए सभी प्रकार की आपातकालीन सहायता प्रदान की। उन्होंने डॉक्टरों, स्वास्थ्य पेशेवरों को जुटाया और देश भर में कई स्थानों पर क्वारंटाइन सुविधाएं स्थापित की हैं। डीआरडीओ ने राज्यों में कोविड रोगियों के इलाज के लिए कई अस्पतालों की स्थापना की है, निजी क्षेत्र को बड़े पैमाने पर वेंटिलेटर, ऑक्सीजन संयंत्र, दवाएं, परीक्षण किट और पीपीई किट के निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी संबंधी अनुभव प्रदान किया है।

सीमाओं से परे मदद

सशस्त्र बलों ने संकट में पड़ने वाले देशों को मदद का हाथ बढ़ाया। भारतीय नौसेना ने 2020-21 के दौरान आठ राहत मिशन शुरू किए। वंदे भारत मिशन के तहत ईरान, श्रीलंका और मालदीव से फंसे भारतीयों को निकालने के अलावा भारतीय नौसेना के जहाजों ने पांच देशों को दवाओं और डॉक्टरों सहित सहित 19 चिकित्सा राहत प्रदान की। आईएनएस ऐरावत ने प्राकृतिक आपदाओं से सूडान, जिबूती और इरिट्रिया को 270 मीट्रिक टन भोजन संबंधी सहायता प्रदान की। भारतीय तटरक्षक ने श्रीलंका के तट को बड़े तेल रिसाव से बचाने के लिए बचाव अभियान का नेतृत्व किया। भारतीय वायुसेना ने 2020-21 के दौरान 800 से अधिक राहत मिशनों को अंजाम दिया।

 

 

 

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