डायबिटीज़ का होता है इन अंगों पर असर,कैसे करें बचाव,जानें

हाई ब्लड शुगर लेवल को हम डायबिटीज़ यानी मधुमेह के नाम से जानते हैं। अगर इसकी जांच न की जाए,तो इससे त्वचा और आंखों से जुड़ी आम परेशानियों से लेकर ब्रेन स्ट्रोक और नर्वस सिस्टम से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता हैं।

डायबिटीज़ किस तरह शरीर पर असर डालता है?

दरअसल, डायबिटीज़ एक तरह से चयापचय (मेटाबॉलिक) में ख़राबी की अवस्था हैं। ख़ून में हाई ब्लड शुगर लेवल (हाइपरग्लाइसीमिया) के साथ ही इंसुलिन (इंसुलिन प्रतिरोध की वजह से) की मौजूदगी से दूसरी चीज़ों पर असर पड़ता है जो आखिरकार शरीर को अलग-अलग तरीकों से नुकसान पहुंचाते हैं। ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करके इन नुकसान से बचा जा सकता हैं या इन्हें ज़्यादा से ज़्यादा समय तक दूर रखा जा सकता हैं।

डायबिटीज़ का असर शरीर के किन हिस्सों पर पड़ता है?

1. आंख
हाइपरग्लाइसीमिया होने पर शुरुआत में नज़रें धुंधली हो सकती है और अगर इस पर ध्यान न दिया जाए,तो आगे चलकर कैटरेक्ट (मोतियाबिंद) होने के आसार होते हैं. आंख को प्रभावित करने वाली इस गंभीर स्थिति को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं. इसमें आंखों के रेटिना ख़राब होने लगते हैं और कुछ गंभीर मामलों में आंखों की पूरी रोशनी भी जा सकती हैं। टाइप 2 डायबिटीज़ से प्रभावित 20% से 40% लोगों में डायबिटिक रेटिनोपैथी की शिकायत होती हैं।

इलाज और बचाव:
अगर आप नियमित तौर पर आंखों की जांच करवाते हैं,तो ज़्यादातर समस्याओं का पता एकदम शुरूआत में ही लग सकता है. इसका इलाज फ़ोटोकोएगुलेशन या सर्ज़री से किया जाता हैं। आंखों से जुड़ी तकलीफ़ों से बचने के लिए शुगर लेवल का संतुलन और ब्लड प्रेशर का सही प्रबंधन ज़रूरी हैं।

2. त्वचा
डायबिटीज़ में स्किन इंफ़ेक्शन यानी त्वचा से जुड़ा संक्रमण होना काफ़ी आम है, जिसे सबसे ज़्यादा अनदेखा किया जाता है. डायबिटीज़ से प्रभावित 30% लोगों में त्वचा संक्रमण (बैक्टीरियल/फ़ंगल)(2) होता है जिसमें शुष्क त्वचा,स्किन टैग्स (त्वचा में उभार) और काले चकत्ते पड़ना (जिसे हम सेबोरिक केरेटोसिस के नाम से भी जानते हैं) शामिल हैं।

इलाज और बचाव: नहाते समय त्वचा में किसी भी तरह के बदलाव पर ध्यान दें और शुरुआत में ही इसके इलाज के लिए डॉक्टर से मिलें. लंबे समय से डायबिटीज़ होने की वजह से आपके हाथों-पैरों की संवेदनशीलता कम होने लगती हैं, इसलिए इसे अनदेखा न करें और जांच ज़रूर कराएं।ब्लड शुगर पर ध्यान देने और सफ़ाई बरतने से त्वचा संबंधी समस्या से लंबे समय तक बचा जा सकता हैं।

3. किडनी
किडनी से जुड़ी बीमारियों के पीछे डायबिटीज़ मुख्य वजह है, खास तौर पर किडनी के फ़ेल होने के मामलों में टाइप 2 डायबिटीज़ से प्रभावित 7% लोगों में डायबिटीज़ की पहचान होने से पहले ही किडनी की बीमारी के शुरुआत का पता चल जाता हैं।हाई कोलेस्ट्रॉल,हाई ट्राइग्लिसराइड और लो एचडीएल को इनके पीछे खास तौर पर ज़िम्मेदार पाया गया हैं।

इलाज और बचाव:
नियमित जांच (जैसे कि, प्रोटीन के लिए पेशाब की जांच) से शुरुआत में ही इसकी पहचान करने में मदद मिलती हैं। अच्छे खान-पान और एक्सरसाइज़ से कोलेस्ट्रॉल के लेवल (लिपिड प्रोफ़ाइल) को सही किया जा सकता हैं।अगर आप स्मोकिंग (धूम्रपान) से बचते हैं,तो किडनी में ख़ून के फ़्लो को सही बनाए रखने में मदद मिलती हैं।

4. ह्रदय और खून की नसें
हाइपरग्लाइसिमिया के साथ ही,मधुमेह ग्रस्त लोगों में हाई कोलेस्ट्रॉल या हाई ब्लड प्रेशर होने की संभावना होती हैं।ऐसे में ख़ून की नसें सख्त़ हो सकती हैं,जिससे हार्ट अटैक (दिल का दौरा) या दिल से जुड़ी दूसरी तकलीफ़ें या स्ट्रोक हो सकता हैं। जिन्हें डायबिटीज़ नहीं उनके मुक़ाबले डायबिटीज़ वाले लोगों में स्ट्रोक का ख़तरा ज़्यादा होता हैं। पैरों और नर्व्स में खून का फ़्लो कम होने से नरवर सिस्टम पर असर पड़ता हैं।

इलाज और बचाव:आप कई तरीकों से ह्रदय से जुड़ी परेशानियों और स्ट्रोक के ख़तरे को कम कर सकते हैं,जैसे अच्छी तरह ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करके,धूम्रपान से बचकर,शराब पीने में ज़्यादा से ज़्यादा कमी लाकर,सेहतमंद खान-पान से,एक्सरसाइज़ और ब्लड प्रेशर लेवल को अच्छी तरह मैनेज करके।