दीपावली पूजन मुहूर्त 2020 : ठहर जाएंगी मां घर में,स्थिर लग्न में करें लक्ष्मी जी की पूजा

महालक्ष्मी पूजन स्थिर लग्न में अति उत्तम रहता है। इससे स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। वृषभ,सिंह,वृश्चिक व कुंभ स्थिर लग्न होती है। इस वर्ष के स्थिर लग्न मुहूर्त निम्न है-

स्थिर लग्नानुसार

प्रात:काल- 7.12 से 9.29 तक (वृश्चिक लग्न)

अपराह्न- 1.19 से 2.50 तक (कुंभ लग्न)

सायंकाल- 5.54 से 7.50 तक (वृषभ लग्न)

मध्यरात्रि- 12.22 से 2.39 तक (सिंह लग्न)

चौघड़िया अनुसार

दिवसकालीन

प्रात:- 7.55 से 9.18 (शुभ)

मध्याह्न- 1.00 से 2.49 (लाभ)

मध्याह्न- 2.49 से 4.11 (अमृत)

सायंकालीन

सायं- 5.34 से 7.12 बजे तक (लाभ)

सायं- 8.49 से 10.26 बजे तक (शुभ)

रात्रि- 10.26 से 12.00 तक (अमृत)

सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त

प्रात:- 7.55 से 9.18 तक

सायं- 5.54 से 7.12 तक

मध्याह्न- 1.19 से 2.50 तक

कब क्या करें?

स्नान- प्रातःकाल

देवपूजन- स्नान के उपरांत

पितर पूजन- दोपहर

ब्राह्मण भोजन- दोपहर

महालक्ष्मी पूजन– प्रदोषकाल में

दीपदान- प्रदोषकाल में

मशाल दर्शन- सायंकाल

दीपमाला प्रज्वलन- सायंकाल

रोली,मौली,पान,सुपारी,अक्षत,धूप,घी का दीपक,तेल का दीपक,खील,बताशे,श्रीयंत्र,शंख (दक्षिणावर्ती हो तो अतिउत्तम), घंटी,चंदन,जलपात्र,कलश,लक्ष्मी-गणेश-सरस्वतीजी का चित्र या विग्रह) पंचामृत,गंगाजल,सिन्दूर,नैवेद्य,इत्र,जनेऊ, श्वेतार्क पुष्प,कमल का पुष्प,वस्त्र,कुमकुम,पुष्पमाला,फल,कर्पूर,नारियल,इलायची,दूर्वा।

बाईं ओर रखें-

जलपात्र,घंटी,धूप,तेल का दीपक।

दाईं ओर रखें-

घी का दीपक,जल से भरा शंख।

सामने रखें-

चंदन,रोली,पुष्प,अक्षत व नैवेद्य।

तत्पश्चात विधिवत पूजन करें।