भक्ति के आगे कमजोर दिखा कोरोना वाइरस

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आगरा। एक मंदिर में एक ही भगवान होने चाहिए पर आजकल सभी भगवानो की मूर्ति लगाने की होड़ लगी हुई है अपने दिल में एक भगवान को बिठाइये सभी को नहीं किन्तु सम्मान सबका कीजिये। ये कहना था बम्बई वाली बगीची स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर चल रही श्रीमद भागवतकथा ज्ञान यज्ञ में व्यासपीठ से आचार्य सुभाषचंद्र शास्त्री का। कथा मे दूसरे दिन शनिवार को वराह अवतार,सती चरित्र व शिव विवाह की कथा का वर्णन किया गया ।

कोरोना वाइरस के चलते भागवत कथा सुनने के लिए पुरुषो की अपेक्षा महिला श्रोताओ की संख्या अधिक देखने को मिली। महिला व पुरुषो में भक्ति का उत्साह इतना अधिक है भक्तो पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। भागवत कथा का आयोजन 19 मार्च तक दोपहर 1 से शाम 5 बजे तक किया जायेगा।

सुभाषचंद्र शास्त्री कहा कि राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता का स्वयंवर रचाया। सीता से विवाह की ख्वाहिश में बड़े-बडे महारथियों ने शिव धनुष तोडऩे का प्रयास किया,लेकिन वे तिलभर हिला भी नहीं सके। इससे राजा जनक ने निराश होकर पृथ्वी वीरों से खाली होने की बात भरी राजसभा में कही। जिसे सुनकर लक्ष्मण क्रोधित हो गए। ऐसे में गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान राम ने एक पल धनुष उठाया और तोड़ दिया।

इस प्रसंग को सुनकर पूरा मंदिर प्रांगण जय श्री राम के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। कथा के मुख्य यजमान जगदीश प्रसाद चतुर्वेदी व ह्रदेश चतुर्वेदी रहे। रविवार को जड़भरत दक्ष प्रजापति,प्रह्लाद चरित्र,नरसिंह अवतार व नरकलोक का वर्णन किया जायेगा। इस अवसर पर प्रमुख रूप से महंत प्रेमप्रकाश गौड़,डॉ0 एनके चतुर्वेदी,राकेश यादव,अशोक शर्मा,डॉ0 शिशिर चतुर्वेदी,डॉ0 एनके यादव,डॉ0 कुसुम चतुर्वेदी,शोभा यादव,निशांत चतुर्वेदी,सपना,तृप्ति आदि मौजूद रहे ।

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