बिटकॉइन के तेजी से सरकार चिंतित, कमाई पर लगेगा कर 

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नई दिल्ली । दुनिया की पहली विकेंद्रीकृत आभासी डिजिटल मुद्रा बिटकॉइन की कीमत में हाल के दिनों में आई भारी उछाल ने सरकार चिंतितहै। अभी देश में इसको लेकर नियमन का अभाव है। यही वजह है कि सरकार अब आभासी मुद्रा को लेकर नीति बनाने और इसके कारोबार से होने वाली कमाई पर कर लगाने पर विचार कर रही है। बिटकॉइन कारोबार से संबंधित मुद्दों को देखने और इसके बारे में उपयुक्त स्पष्टीकरण जारी करने के लिए सरकार जल्दी ही एक समिति का भी गठन करेगी।

अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होने के कुछ समय के अंदर ही बिटकॉइन की कीमत 18,000 डॉलर के स्तर तक पहुंच गई। बिटकॉइन शिकागो बोर्ड वायदा एवं विकल्प एक्सचेंज (सीबीओई) पर सूचीबद्ध हुई। बहुत अधिक लोगों के इस्तेमाल करने के कारण एक्सचेंज की वेबसाइट तक ठप हो गई।  एक्सचेंजों का कहना है कि इसमें कारोबार एक अलग प्रणाली पर चलता रहा। 17 जनवरी के वायदा कारोबार में एक समय बिटकॉइन का भाव 17,750 डॉलर पहुंच गया था और अनियमित इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर यह बाद में 18,000 डॉलर तक पहुंच गया।

एक समिति इससे संबंधित सारे मुद्दों को देख सकती है। अभी इसके बारे में कोई दिशानिर्देश मौजूद नहीं हैं। समिति की सिफारिशों के बाद बिटकॉइन के बारे में सरकार का रुख साफ हो सकता है। दुनिया की पहली विकेंद्रीकृत डिजिटल मुद्रा की कीमत में इस साल 1200 फीसदी से अधिक का इजाफा हो चुका है और लोकप्रियता बढऩे से आने वाले महीनों में इसकी कीमत में और बढ़ोतरी की संभावना है। बिटकॉइन से मिलने वाले बेतहाशा रिटर्न से कर चोरी की आशंका ने कर विभाग को भी चिंता में डाल दिया है। हालांकि सरकार ने अभी तक इस पर लगने वाले कर के बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है लेकिन अधिकारियों का कहना है बिटकॉइन की बिक्री पर पूंजीगत लाभ कर लग सकता है।

एक वरिष्ठ कर अधिकारी ने कहा कि किसी तरह के जुर्माने से बचने के लिए यह जरूरी है कि बिटकॉइन की बिक्री से हुई कमाई का खुलासा रिटर्न में किया जाए। उन्होंने कहा, ‘किसी को भी बिटकॉइन कारोबार से हुई आय पर रिटर्न दाखिल करना चाहिए और 30 फीसदी के अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर का भुगतान करना चाहिए।’ अगर कोई 3 साल से कम समय तक बिटकॉइन अपने पास रखता है तो उस पर 30 फीसदी पूंजीगत लाभ कर और इससे अधिक अवधि के लिए 20 फीसदी कर लगेगा।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि बिटकॉइन से हुई कमाई का रिटर्न में खुलासा नहीं करने पर जुर्माना और ब्याज लग सकता है। आकलन के समय कम आय बताने या इसके बारे में गलत जानकारी देने पर 50 से 200 फीसदी तक जुर्माना लग सकता है। इसके अलावा सालाना 12 फीसदी का ब्याज भी लगाया जा सकता है।

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