मीरा-भायंदर में नेत्रविहीन बच्चों के लिए होगी ब्रेल लिपी की सुविधा

मीरा-भायंदर में नेत्रविहीन बच्चों के लिए होगी ब्रेल लिपी की सुविधा

पंकज दुबे/मीरा-भायंदर

मीरा-भायंदर शहर में अब नेत्रविहीन बच्चों के लिए, ब्रेल लिपी की सुविधा उपलब्ध होगी, जहाँ नेत्रविहीन बच्चों के लिए अब किताबें, संगणक, और पढ़ाने के लिए ट्रेनर जैसी मूलभूत सुविधाएँ होगी। प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण उप महापौर हसमुख गहलोत की निधि से किया जा रहा है।

उप-महापौर हसमुख गहलोत ने महापौर ज्योत्सना हसनाले के प्रति अपना आभार व्यक्त किया और कहा की ब्रेल लिपी भी शहर के विकास का एक भाग है, इससे शिक्षा से वंचित लोगों को अब शहर के बाहर नहीं जाना पड़ेगा, सारी सुविधाएँ हमारे शहर में ही उपलब्ध हो जायेंगी।

ब्रेल पद्धति एक तरह की लिपि है, जिसको विश्व भर में नेत्रविहीन लोगों को पढ़ने और लिखने में मदद करता है। इस पद्धिति को छूकर व्यवहार में लाया जाता है, इस पद्धति का आविष्कार 1821 में एक नेत्रहीन फ्रांसीसी लेखक लुई ब्रेल ने किया था। यह लिपी अलग-अलग अक्षरों, संख्याओं और विराम चिन्हों को दर्शाते हैं, इस लिपी के प्रत्येक आयताकार सेल में 6 बिन्दु यानि डॉट्स होते हैं, जो थोड़े-थोड़े उभरे होते हैं, यह दो पंक्तियों में बनी होती हैं, इस आकार में अलग-अलग 64 अक्षरों को बनाया जा सकता है, सेल की बांई पंक्ति में उपर से नीचे 1, 2, 3 बने होते हैं, इसी तरह दांईं ओर 4, 5, 6, बनी होती हैं, एक डॉट की औसतन ऊंचाई ०.०२ इंच होती है।

Share