90 फीसदी लोग नहीं करते सीट बेल्ट का इस्तेमाल

नई दिल्ली। देश में 90 फीसदी से अधिक लोग यात्री वाहनों में रियर सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करते हैं और इस सीट बेल्ट के उपयोग को अनिवार्य बनाने वाले कानून के बारे में भी मात्र 27.7 प्रतिशत लोग ही जानते हैं। यात्री वाहन बनाने वाली कंपनी निसान इंडिया और सेवलाइफ फाउंडेशन की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

मोटर वाहन कानून 1988 के तहत बनाए गए केन्द्रीय मोटर वाहन नियम में ऑटोमोबाइल कंपनियों को वाहनों में ड्राइवर, फ्रंट यात्री सीट के साथ ही ड्राइवर के पीछे की सीट पर बेल्ट लगाने को अनिवार्य बनाया गया है। केन्द्रीय मोटर वाहन नियम की धारा 138 (3) में इस रियर सीट बेल्ट के उपयोग का भी अनिवार्य बनाया गया है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरू जैसे बड़े शहरों में 98.2 प्रतिशत लोग रियर सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करते हैं जबकि लखनऊ, जयपुर और कोलकता में कोई भी व्यक्ति इस बेल्ट का उपयोग नहीं करता है।

यात्री वाहन मालिकों में से 70.5 प्रतिशत को यह पता है कि उनके वाहन में रियर सीट बेल्ट है और उनमें से मात्र 7 प्रतिशत ही इसका नियमित तौर पर उपयोग करते हैं। वाहन बैठने के दौरान रियर सीट बेल्ट लगाने को अनिवार्य बनाए जाने के बारे में जहां 27.7 प्रतिशत लोग जानते हैं वहीं 37.8 प्रतिशत लोगों को इस कानून के बारे में जानकारी नहीं है।

हालांकि सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से 23.9 प्रतिशत लोग रियर सीट बेल्ट को लेकर जागरूक नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार इसमें शामिल ऐसे लोग जो अपने बच्चों को पिछली सीट पर बैठते हैं उनमें से 77 फीसदी का कहना था कि वे इस सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करते हैं।

रिपोर्ट में कहा कि गया है रियर सीट बेल्ट के उपयोग में बढोतरी नहीं होने का एक प्रमुख कारण इस संबंध में बने कानून का कमजोर क्रियान्वयन है। सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से 91 फीसदी ने कहा है कि रियर सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करने पर पुलिस ने कभी भी उन्हें नहीं रोका है। -एजेंसी

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