एंटनी ब्लिंकेन होंगे अमेरिका के विदेश मंत्री 

बाइडेन अपनी सरकार के गठन की तैयारियां शुरू कर चुके हैं। मंगलवार को बाइडेन ने अपने मंत्रिमंडल की घोषणा कर दी। बाइडेन ने विदेश मंत्री का कार्यभार एंटनी ब्लिंकेन को सौंपा है।जो बाइडेन ने मंगलवार को अपने कैबिनेट की घोषणा कर दी। बाइडेन के पुराने सहयोगी एंटनी ब्लिंकेन को विदेश मंत्री या सेक्रटरी ऑफ स्टेट बनाया गया है।बाइडेन की टीम में उनके कई सहयोगी ओबामा टीम के सदस्य थे। इनमें ही एक नाम है 58 साल के एंटनी ब्लिंकेन का,जो ओबामा के मंत्रिमंडल में उप विदेश मंत्री,उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर कार्यरत थे।अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2020 में ब्लिंकेन बाइडेन के राष्ट्रपति मिशन के लिए विदेश नीति सलाहकार भी हैं।

एंटनी ब्लिंकेन के विदेश मंत्री बनने के बाद अमेरिका के साथ भारत और चीन के संबंधों में बदलाव आ सकता है।हालांकि भारत और चीन दोनों ही देश उनके विदेश मंत्री बनने से बेहतर रिश्तों की उम्मीद लगा रहे हैं। भारत और अमेरिका के संबंध पहले से ही बेहतर स्थिति में हैं।भारत को लेकर बाइडेन की नीति क्या होगी,आने वाले समय में पता चलेगा। वहीं अमेरिका और चीन के बीच रिश्ते हमेशा से ही तनावपूर्ण रहे हैं। खासकर ट्रंप कार्यकाल में दोनों देशों के बीच रिश्ते बिगड़ते ही चले गए।

9 जुलाई को उन्होंने वॉशिंगटन डीसी के हडसन इंस्टीट्यूट में कहा था कि भारत के साथ रिश्तों को और मजबूत करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।ये इंडो-पैसिफिक के भविष्य के लिए अहम होगा।बड़ी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा।उन्होंने कहा कि ये रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक प्रशासन की सफलता पर निर्भर करता है। क्लिंटन प्रशासन और बुश प्रशासन के बाद अब ओबामा-बाइडेन प्रशासन की बारी है। ब्लिंकेन ने ओबामा प्रशासन के दौरान भारत को ‘मुख्य रक्षा सहयोगी’ बनाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ओबामा-बाइडेन प्रशासन के दौरान पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों के सहयोग से दोनों देशों के बीच डिफेंस टेक्नोलॉजी और व्यापार में प्रगति हुई।

ब्लिंकेन ने कहा कि हम भारत को पेरिस जलवायु समझौते पर साथ लाने में सफल हुए।यह चुनौतीपूर्ण था लेकिन तत्कालीन उपराष्ट्रपति बाइडेन भारत में सहयोगियों को समझाने में सफल रहे। उन्होंने स्वीकार किया कि हम भारत के बिना ग्लोबल चुनौतियों का सामना नहीं कर सकते। इसके बाद 15 अगस्त को ब्लिंकेन ने इंडो-यूएस संबंधों पर एक पैनल में हिस्सा लिया था और कहा था कि बाइडेन प्रशासन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट्स में भारत की मुख्य भूमिका की वकालत करेगा और यूनाइटेड नेशनस सेक्युरिटी काउंसिल में सीट दिलवाने में मदद करेगा।

चीन पर टिप्पणी करते हुए ब्लिंकेन ने कहा था कि भारत और अमेरिका के सामने चीन की चुनौती है। इसमें एलएसी पर भारत के प्रति चीन का आक्रामक रवैया भी शामिल है। उन्होंने कहा कि हमें भारत के साथ मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा. पाकिस्तान का नाम लिए बिना ब्लिंकेन ने सीमापार से आतंकवाद को लेकर कहा था कि हम भारत के रक्षा क्षेत्र को मजबूत करेंगे।दक्षिण एशिया या कहीं भी आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।ब्लिंकेन ने 2006 में बाइडेन के दिए बयान का जिक्र करते हुए कहा कि बाइडेन ने 2020 के लिए अपने विजन के सवाल पर कहा था कि, ‘मेरा सपना है कि 2020 में भारत और अमेरिका सबसे करीबी देश हों।’ ब्लिकेन और बाइडेन प्रशासन लंबे समय से भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कर रहा है।