मध्य प्रदेश में मिलावटखोरी को मिलेगी उम्रकैद की सजा,विधेयक 2021 को मिली मंजूरी

मध्य प्रदेश में मिलावटखोरी को मिलेगी उम्रकैद की सजा,विधेयक 2021 को मिली मंजूरी

मध्य प्रदेश।  शिवराज सिंह चौहान सरकार के मंत्रिमंडल ने शुक्रवार (फरवरी 27, 2021) को खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों को आजीवन कारावास देने के लिए दंड कानून (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2021 को मंजूरी दे दी। इसकी जानकारी राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दी। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों को अब कड़ी सजा दी जाएगी।

नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों को अब सख्त सजा दी जाएगी। इसको देखते हुए (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2021 को मंजूरी दी गई है। इसमें व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।” बता दें कि दिसंबर 2019 में मिलावट से पैदा होने वाले खतरों को लेकर भोपाल में जागरूकता रैली निकाली गई थी।

रैली में सभी आयु वर्ग के लोगों ने हिस्सा लिया था। यह रैली राजधानी के रोशनपुरा से लाल परेड तक निकाली गई थी। इसमें लोगों ने मिलावट के खिलाफ नारे लगाए थे और शुद्ध खाद्य उत्पादों की माँग की थी। जगह-जगह मिलावट को लेकर छापे मारे जाते हैं। पिछले दिनों शहद में मिलावट का मामला देश भर में चर्चा में छाया रहा था। बता दें कि देश भर में खाद्य पदार्थो में मिलावट का काम किया जाता है। इसकी रोकथाम के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहती है।

दरअसल, पहले मिलावट का आरोप सही साबित होने पर 6 महीने की सजा का ही प्रावधान था। 6 महीने की सजा को बढ़ाकर पहले तीन साल कर दिया गया था। अब इसे संशोधित करते हुए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान कर दिया गया है। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मिलावट को सबसे बड़ा अपराध बताया। उन्होंने कहा कि मिलावट से बड़ा कोई अपराध नहीं।

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री ने कहा कि मिलावटखोरी सीधे-सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ है। इसलिए सजा को और बढ़ाया गया है। इसके अलावा एक्सपायरी डेट वाली वस्तु बेचने पर भी सजा के प्रावधान को मंजूरी दी गई है। मिलावट पर कसावट अभियान से सरकार को उम्मीद है कि मिलावटखोरी पर नकेल कसने में सफलता मिलेगी।

Share

2 thoughts on “मध्य प्रदेश में मिलावटखोरी को मिलेगी उम्रकैद की सजा,विधेयक 2021 को मिली मंजूरी

Leave a Reply

Your email address will not be published.