2,200 साल पहले आचार्य चाणक्य ने जान लिया था ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का महत्व : राजनाथ सिंह

2,200 साल पहले आचार्य चाणक्य ने जान लिया था ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का महत्व : राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को आयोजित एक व्याख्यान के दौरान ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषय पर अपने सम्बोधन के दौरान देश की सुरक्षा से जुड़ी कई अहम बातें कही। संबोधन के दौरान उन्होंने बताया कि “भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को व्यापक दृष्टि से यदि किसी ने पहली बार देखा तो करीब 2200 साल पहले आचार्य चाणक्य ने देखा था।” अपने संबोधन के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ और ‘आंतकवाद’ जैसे मसलों पर अपने विचार प्रकट किए।

शुरुआत में उन्होंने कहा, सबसे पहले मैं स्वर्गीय बलराम दास टंडन जी की स्मृति को नमन करता हूं जिन्होंने अपने जीवनकाल में इस देश का बहुत ही कठिन समय देखा। उन्होंने देश के विभाजन की विभीषिका को बहुत करीब से देखा। वह दौर, नफरत और हिंसा का ऐसा दौर था जिसे हम चाह कर भी नहीं भूल सकते। आगे जोड़ते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, आज इतने वर्षों बाद भी उसकी पीड़ा देश में महसूस की जाती है। इसलिए 1947 में हुए देश के विभाजन के बाद जो लोग हिंसा और नरसंहार के शिकार हुए, उनकी स्मृति में इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने, हर साल 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

बलराम दास टंडन जी के जीवन की दूसरी बड़ी घटना,जिसका उन पर बड़ा प्रभाव पड़ा वो था 1965 में हुआ भारत-पाकिस्तान युद्ध,जिसमें हर भारतवासी ने खुद को उस लड़ाई से जोड़ लिया था। उन दिनों वे अमृतसर में थे और वह इलाका उन दिनों काफी सक्रिय था। पंजाब में आतंकवाद की दस्तक ने उनकी जिंदगी पर काफी गहरा प्रभाव डाला। उस समय उन्होंने जान जोखिम में डालकर आतंकवाद का विरोध किया और सामाजिक ताने-बाने में बिखराव न आए इसकी भी चिंता उन्होंने की। वे जानते थे कि आतंकवाद इस देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। लोकतांत्रिक परम्पराओं में उनका गहरा विश्वास था। वे 2014 में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल नियुक्त हुए,उस भूमिका में उन्होंने हमेशा संवैधानिक परम्पराओं को निभाया। उनके कार्य व्यवहार या आचरण पर कभी कोई उंगली तक नहीं उठा पाया।

रक्षा मंत्री ने कहा,भारत के इतिहास में राष्ट्रीय सुरक्षा को एक व्यापक दृष्टि से यदि किसी ने पहली बार देखा तो आज से करीब 2200 साल पहले आचार्य चाणक्य ने देखा। राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर जिस तरह के विचार उन्होंने अपनी पुस्तक ‘अर्थशास्त्र’ में रखे हैं वे आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने पहले रहे है। राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रहना हर सरकार की पहली आवश्यकता ही नहीं बल्कि उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता भी होती है। जब हम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की बात करते हैं तो सबसे पहले बात सीमाओं की सुरक्षा की आती है क्योंकि यदि सीमाएं सुरक्षित नही होंगी तो राष्ट्र भी सुरक्षित नही होगा।

पिछले लगभग 75 साल में Land और Maritime Boundaries पर हमें बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। मगर हमारी सेनाओं और सुरक्षा बलों ने, मिलकर, हर चुनौती का न केवल डटकर सामना किया है बल्कि उन पर विजय भी हासिल की है। जब से भारत आजाद हुआ है,कई भारत विरोधी ताकतों की यह लगातार कोशिश रही है कि या तो सीमाओं पर, या फिर सीमाओं के रास्ते से भारत के भीतर अस्थिरता का माहौल बनाया जाए। पाकिस्तान की जमीन से इसके लिए बड़े पैमाने पर लगातार कोशिश की गई है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, 1965 में और 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच दो युद्ध हुए जिनमें पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा। इन युद्धों में मिली पराजय ने पूरी तरह यह साबित कर दिया कि भारत के साथ वे Full Scale War करने की स्थिति में नही है। भारत के साथ सीधे युद्ध न करने की अक्षमता ने पाकिस्तान को दो नीतियों पर काम करने के लिए मजबूर किया। एक तो उन्होंने एटमी रास्ता खोजने की दिशा में कदम बढ़ाए और दूसरी तरफ भारत को ‘Death of thousand cuts’ देने की नीति पर काम प्रारंभ किया।

आतंकवाद के मुद्दे पर रक्षा मंत्री ने कहा, आतंकवाद के सहारे पंजाब में हिंसा का जो दौर चलाया गया उसका खात्मा बहुत बड़ी कीमत देकर हुआ है। अब जम्मू और कश्मीर में इस आतंकवाद को रोकने की दिशा में पिछले सात साल से सेना और सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई चल रही है। मेरा मानना है कि कश्मीर में बचा खुचा आतंकवाद भी समाप्त होकर रहेगा। यह विश्वास मुझे इसलिए है क्योंकि धारा 370 और 35A के चलते वहां अलगाववादी ताकतों को जो मजबूती मिलती थी, वह अब खत्म हो गई है। आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सुरक्षा बलों के रिस्पॉन्स में पिछले सात साल में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वह बदलाव है सेना और सुरक्षा बलों के बढ़े हुए मनोबल और उनकी कार्रवाई के बदले हुए तौर-तरीकों का। चूंकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर हम न राजनीति करते है और न होने देते है इसलिए भारतीय सेना और सुरक्षा बलों में यह भरोसा पैदा हुआ है कि राष्ट्र रक्षा के कर्तव्य पालन में उन्हें खुली छूट रहेगी।

रक्षा मंत्री ने कहा, इससे सेना और सुरक्षा बलों का आत्मविश्वास और मनोबल कितना ऊंचा हुआ है, इसका अनुमान आप इसी बात से लगा सकते है कि पिछले सात साल में भारत के Hinterland में एक भी बड़ी आतंकवादी घटना उन्होंने नहीं होने दी है। आज भारत आतंकवाद के खिलाफ देश की सीमाओं के भीतर तो कार्रवाई कर ही रहा है, साथ ही जरूरत पड़ने पर सीमा पार जाकर भी आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने का काम हमारी सेना के बहादुर जवानों ने किया है। चाहे उरी की घटना के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राईक हो या पुलवामा की घटना के बाद की गई बालाकोट एयर स्ट्राईक्स हो, भारतीय सेना ने आतंकवाद के खिलाफ ऐसी कठोर कार्रवाई की है जिसकी मिसाल कम से कम आजाद भारत के इतिहास में नहीं मिलती है।

राजनाथ सिंह ने कहा, हाल के कुछ वर्षों में पाकिस्तान ने सीमा पर सीजफायर उल्लंघन बढ़ा दिए थे मगर भारतीय सुरक्षा बलों से उन्हें हमेशा मुहंतोड़ जवाब ही मिला है। अब पाकिस्तान को समझ आने लगा है कि इन सीजफायर उल्लंघन से भी उन्हें कोई खास लाभ नही मिलने वाला है। पिछले दिनों फरवरी में भारत-पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच एक Ceasefire agreement हुआ है। इसलिए हम भी वेट एंड वॉच की मुद्रा में है, क्योंकि जो Trust Deficit है वह दोनों देशों के बीच एक बड़ी समस्या है। फिर भी पिछले कुछ दिनों से सीमा पर सीजफायर उल्लंघन नहीं हुआ है।

रक्षा मंत्री ने कहा यह सच है कि लम्बे समय से चीन के साथ सीमा को लेकर एक परशेप्सनल डिफरेंस है। इसके बावजूद कुछ ऐसे समझौते हैं, प्रॉटोकोल्स हैं जिनका पालन करते हुए दोनों देशों की सेनाएं पैट्रोलिंग करती है। पिछले साल पूर्वी लद्दाख में जो विवाद पैदा हुआ उसका कारण था कि चीन की सेनाओं ने Agreed Protocols को नजरअंदाज किया था। चीनी सेना PLA को Unilateral तरीके से LAC पर Action करने की इजाजत हम किसी भी सूरत में नहीं दे सकते। और न दे रहे हैं। न कभी देंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सेनाओं को यह स्पष्ट बता रखा है कि LAC पर किसी भी एकतरफा कार्रवाई को नजरअंदाज नही किया जाना चाहिए। गलवान में उस दिन भारतीय सेना ने यही किया और पूरी बहादुरी से PLA के सैनिकों का मुकाबला करते हुए उन्हें पीछे जाने पर मजबूर किया।

उन्होंने कहा, गलवान की घटना को एक वर्ष बीत चुका है, मगर जिस शौर्य, पराक्रम और साथ में संयम का परिचय भारतीय सेना ने दिया है वह अतुलनीय है और आने वाली पीढ़ियां भी उन जांबाज सैनिकों पर गर्व करेंगी। मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में हम भारत की सीमा, उसके सम्मान और स्वाभिमान से समझौता नहीं करेंगे।

सीमाओं की पवित्रता को हम कतई भंग नही होने देंगे। इसके बावजूद विपक्ष के कुछ नेताओं द्वारा देश में सेना के पराक्रम को लेकर सवाल खड़े किए गए। जबकि सच्चाई यह है कि भारतीय सेना ने इस बार शौर्य और पराक्रम तो दिखाया ही है साथ ही जहां संयम की आवश्यकता थी, वहां संयम का भी परिचय दिया है। सेना की ट्रेनिंग होती है कि दुश्मन की हरकत को देखते ही ट्रिगर दबा देना मगर भारतीय सेना ने बड़ी Maturity के साथ काम करते हुए साहस और संयम दोनों का प्रदर्शन किया है। इसके लिए भारतीय सेनाओं की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है।

रक्षा मंत्री ने कहा, पिछले साल रोहतांग में अटल टनल का उद्घाटन किया गया। यह प्रोजेक्ट लम्बे समय से लटका था। हमारी सरकार ने 26 सालों का काम 06 साल में करके दिखाया है। जितने High Altitude पर यह टनल बना है, उतने High Altitude पर इतना बड़ा विश्व में कहीं भी कोई दूसरा Tunnel नहीं है। आज Border Roads Organisation बड़ी तेजी से सीमावर्ती इलाकों में सड़कों, पुलों और अन्य Infrastructure Projects का निर्माण कर रहा है। लद्दाख को All Weather Connectivity तो दी ही जा रही है साथ ही कई Alternative Roads पर भी काम शुरू हो गया है।

रक्षा मंत्री ने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा में Border Infrastructure की मजबूती बहुत जरूरी है। जो भारतीय नागरिक सीमावर्ती इलाकों में रहते है उन्हें भी इसका लाभ होता है। सीमाओं पर रहने वाले नागरिक हमारे लिए Strategic Asset है। उनके हितों को ध्यान में रखते हुए भी Border Infrastructure मजबूत करना जरूरी है। लद्दाख के साथ-साथ North East में भी काफी Infrastructure Projects पर काम चल रहा है। यह सब देश में सिर्फ एक Infra Projects भर नहीं है बल्कि National Security Grid का अहम हिस्सा है। एक समय था जब North East का पूरा इलाका Insurgency की चपेट में था। पिछले 7 साल में North East में शांति का एक नया दौर आया है। बड़ी संख्या में Insurgents या तो मारे गए है या तो मुख्यधारा में शामिल हो गए। आप पूर्वोत्तर के राज्यों में जाएं तो आपको पूरी तस्वीर बदली हुई नजर आएगी।

उन्होंने कहा, मैं तो यहां तक कहना चाहूंगा कि मोदीजी के प्रधानमंत्री काल की सबसे बड़ी Strategic Victory North East में शांति की बहाली है| मुझे इस बात का व्यक्तिगत रूप से भी संतोष है कि इन सात वर्षों में पांच साल मुझे भी गृहमंत्री के रूप में इस Peace Process से जुड़ने का मौका मिला। पूर्वोत्तर भारत में Insurgency की समस्या पर जहां हमने काबू पाया है, वहीं पिछले सात साल में वामपंथी उग्रवाद पर भी नियंत्रण पाने में हमें सफलता हासिल हुई है।

रक्षा मंत्री ने बताया कि, साल 2014 में जब हमारी सरकार बनी थी तो देश के करीब 160 जिले नक्सलवाद की समस्या से जूझ भी रहे थे। जबकि साल 2019 में ऐसे नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर लगभग 50 के आसपास ही रह गई थी। सही मायनों में उनमें से भी अस्सी फीसदी घटनाएं केवल 8-10 जिलों में ही हो रही थी। राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भारत की सेनाएं सरहदों और सागर की सुरक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। सरकार की तरफ से उन्हें पूरा Support और Encouragement है। Modern Technology और Weaponry के साथ उनको लैस करना हमारी प्राथमिकता है।

रक्षा मंत्री ने कहा, आज वायु सेना के पास राफेल जैसे युद्धक विमान आ चुके हैं और अब भारत की संप्रभुता, अखण्डता, सीमा सुरक्षा के लिए किसी भी चुनौती का जवाब देने की हमारी ताकत काफी बढ़ चुकी है। राष्ट्रीय सुरक्षा का ताना बाना तभी मजबूत होगा जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरों पर निर्भर न रहे। रक्षा बजट में भारतीय कंपनियों से सामान खरीदने के लिए अलग से भी बजट की व्यवस्था है।

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