भाजपा में उम्मीदवारी को लेकर संशय अब भी जारी

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भायंदर/शैलेंद्र पांडे/मुंबई –

जैसे जैसे दिन नज़दीक आ रहे है वैसे वैसे मीरा भायंदर के राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार भी गर्म हो रहा है। जहाँ एक ओर काँग्रेस की ओर से मुजफ्फर हुसैन मैदान में पूरे दम खम से उतर चुके हुए है वही भाजपा में अभी भी अटकलों का अंत होता नही दिख रहा है। विद्यमान विधायक नरेंद्र मेहता या फिर पूर्व महापौर गीता जैन। पर एक बात तो तय है कि दोनों ही प्रत्याशियों में से कोई भी अपने कदम पीछे नही खीचेगा।
सोशल मीडिया बना मेहता का सबसे बड़ा रोंढ़ा
2014 और 2019 के चुनाव में सबसे बड़ा अंतर सोशल मीडिया का भी है, उस वक्त कुछ प्रोफ़ेशनल जीस चीज़ को अंजाम देते थे वहीं आज हर व्यक्ति पूरे ज़ोर शोर से अपनी आवाज़ जनता तक पहुचाने में सक्षम है और पहुँचा भी रहा है।
खबरें आज सिर्फ समाचार पत्रों को खरीदकर पढ़नेवालों तक ही सीमित नही है बल्कि समाचार पत्र और स्वयं पत्रकार भी अपनी खबरों को सोशल साइट्स के ज़रिए लोगो के बीच पहुँचा रहे है। खबरों का विष्लेषण हो रहा है और लोग अपनी राय रख रहे है। नवभारतटाइम्स के पत्रकार अमित तिवारी बेबाकी से अपनी खबरों को फेसबुक के माध्यम से जनता के बीच रखकर उसपर संवाद साधने की कोशिश करते है। आपका समय के अनिल नौटियाल की कुछ खबरें राज्यीय स्तर पर नोटिस की गयी। उदहारण बहुत है।
आर टी आई कार्यकर्ता कृष्णा गुप्ता और दिलीप जंगम मेहता के विरोध में अपनी बातों को जनता तक पहुचाने में सफल हुए है। सोशल साइट्स के कारणों से ही सांसद मनोज तिवारी का कार्यक्रम पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया मेहता के लिए एक रोड़े की तरह काम कर रहा है, भले ही वो इस बात से सहमत हो या न हो। पत्रकार धीरज परब के द्वारा एफआईआर का विषय हो या फिर एमबी लाइव के दीप काकड़े की सात दिन के बच्चे को बेघर किये जाने की कहानी हो, जिसे कई हज़ारो ने देखा, सड़क, ट्रेन से लेकर घरों में इसी की चर्चा हो रही है। और ये सभी ख़बरे मेहता के विपक्ष में होने से से कही न कही उनकी राह मुश्किल कर रहा है।
आनेवाले चुनाव में हार जीत चाहे जिसकी हो। लेकिन सोशल मीडिया की ये जंग जीतना भी उतना ही ज़रूरी हो गया है।

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