साल नया, निवेश वही – एसआइपी

Neil Parikh, Chairman and CEO, PPFAS MF

मुंबई । बाज़ार के लिए 2018 दिलचस्प साल था. इस साल कुछ ऐसे आश्चर्य सामने आये जिनका अनुमान था और कुछ ऐसे भी आये जिनके विषय में किसी ने सोचा नहीं था. इन सभी को मिलाकर बाज़ार में 2017 के उल्लेखनीय दौर की तुलना में बाज़ार में बिलकुल अस्थिरता बनी रही. इक्विटीज पर कम रिटर्न अनुमान के अनुसार ही था, जैसा कि वर्ष की शुरुआत बाज़ार, विशेषकर स्माल और मिड कैप क्षेत्र में उलट-पुलट के साथ हुयी थी. इक्विटीज पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी), कच्चे तेल, और रुपये की अस्थिरता, राज्यों में चुनाव, अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, एनबीएफसी में लिक्विडिटी का संकट, ऋणात्मक एफआइआइ (विदेशी संस्थागत निवेशक) प्रवाह और सख्त लिक्विडिटी के कारण वैश्विक मंदी – इन सभी के मिले-जुले असर से बाज़ार में अस्त-व्यस्तता के हालात बने रहे. बाज़ार में धन पैदा करने के नजरिये से यह एक मुश्किल साल था.

 

ऐसे में 2019 का साल कैसा होगा? सच कहें तो कोई नहीं जानता. हमें अचानक दंग कर देने वाले कुछ अप्रत्याशित आश्चर्य सामने आयेंगे. इस साल इक्विटी निवेशकों के लिए अच्छी चीज यह है कि शुरुआती मूल्यांकन पिछले साल के उसी समय की तुलना में ज्यादा सही प्रतीत होते हैं. अगर कोई इक्विटीज की संपदा श्रेणी में कमजोर हैं तो उनके लिए इक्विटीज संचित करने का यह एक अच्छा साल होगा.

 

मेरा मानना है कि बाज़ार में पिछले साल की तुलना में इस साल और भी ज्यादा अस्थिरता हो सकती है. पिछले साल हमें परेशान करने वाली कुछ समस्याएं, जैसे कि व्यापार युद्ध और तेल तथा रुपये की अस्थिरता बाज़ारों के लिए अनिश्चितता पैदा करती रहेगी. साल की पहली छमाही में आम चुनाव से बाज़ार के अस्थिर रहने की संभावना है. इससे बाज़ार में प्रवेश के अच्छे रास्ते उपलब्ध हो सकते हैं और निवेशकों को उच्चतर अस्थिरता का फायदा उठाना चाहिए. इससे लाभ उठाने के लिए इक्विटी फंड्स में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स (एसआइपी) एक अनुशासित विधि है.

 

लेकिन 2019 में देखने वाली सबसे महत्वपूर्ण चीज यह थी कि ज्यादा सख्त लिक्विडिटी के कारण वैश्विक मंदी के प्रति बाज़ार की प्रतिक्रिया कैसी होती है. 2008 से यूएस, यूरोप और जापान द्वारा वित्तीय संकट को दूर करने के लिए वित्तीय तंत्र में खरबों डॉलर लिक्विडिटी डाली गयी. सस्ती मुद्रा और न्यून ब्याज दरों के लगभग एक दशक के बाद अब हालात बदल रहे हैं. व्यवस्था में धन डालने के बदले केन्द्रीय बैंक्स अब व्यवस्था से धन निकाल रहे हैं. सख्त लिक्विडिटी और उच्चतर ब्याज दरों के इस परिदृश्य में इक्विटी का मूल्यांकन कैसे जारी रह पाता है, सब कुछ इसी पर निर्भर करेगा. बेशक ऐसे अवसर होंगे जिनका लाभ निवेशक उठा सकेंगे.

 

हम एक अनिश्चित दुनिया में रह रहे हैं. निवेशकों के लिए सबसे अच्छा होगा कि वे अपनी आस्ति आवंटन योजना पर अडिग बने रहे. अगर आपके आर्थिक लक्ष्य में अभी पांच साल से अधिक समय है, तब आवंटन का बड़ा हिस्सा इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लगाया जाना चाहिए, और बेहतर होगा कि यह एसआइपी की मदद से करें. पांच साले से कम का कोई लक्ष्य हो तो बांड्स और डेट फंड्स आपके लिए सबसे बढ़िया रहेंगे. अत्यंत अल्पकालिक ज़रूरतों, जैसे कि 18 महीने से कम के मामले में लिक्विड फंड्स उपयोगी हो सकता है.

आपका निवेश सुखद हो ……

लेखक : नील पराग पारीख, चेयरमैन एवं सीईओ, पीपीएफएएस म्यूचुअल फंड

अस्वीकरण : ये लेखक के निजी विचार हैं.

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