अगर बीमारियों से बचना है तो बदलते रहे खाने का तेल

अगर बीमारियों से बचना है तो बदलते रहे खाने का तेल

हेल्थ डेस्क । हम लोग जिस क्षेत्र में रहते हैं वहां पर पाए जाने वाली वनस्पति जैसे सरसों,नारियल, तिल, सोया, मूंगफली, सूरजमुखी व अन्य से अपने खाने के लिए तेल प्राप्त करते हैं। जैसे उत्तर भारत की बात करें यहां पर अधिकतर लोग सरसों के तेल में अपना खाना बनाते हैं।  वहीं कुछ लोग तिल के तेल का भी प्रयोग करते हैं।

 दक्षिण भारत की बात करें तो यहां पर नारियल तेल का प्रयोग लगभग हर व्यंजन को बनाने के लिए होता है। लेकिन अगर हम लोगों को स्वस्थ रहना है एवं बीमारियों से अपना बचाव करना है तो अपने खाने वाले तेल को समय समय पर बदल कर उनका सेवन करें । हार्ट  जनरल में प्रकाशित शोध के मुताबिक एक ही तेल का लगातार इस्तेमाल नहीं करना चाहिए बल्कि थोड़े-थोड़े समय पर तेल बदलते रहना चाहिए। इस से दिल की बीमारी, मोटापा और शुगर जैसे रोगों की संभावना काफी कम हो जाती है।

बार बार गर्म ना करें खाने का तेल-

शरीर के लिए ट्रांस वसा बेहद नुकसानदायक होती है।  यह वसा भी हमारे शरीर में तेल के जरिए पहुंचती है । दरअसल तेल को अगर बार-बार बहुत तेज गर्म किया जाता है तो उसका रसायनिक प्रकार बदल जाता है और उसमें ट्रांसलेटेड फेट पैदा हो जाते। तेल को 180 से 200 डिग्री सेंटीग्रेड पर गर्म नहीं करना चाहिए इससे उसके रासायनिक प्रक्रिया बदल जाती है।

तेल को बार-बार गर्म करने से ट्रांसफर से बनती है।  उससे शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल बढ़ते हैं और गुड कोलेस्ट्रॉल एचडीएल कम होते हैं। इनमें ऐसे रसायन होते हैं जो दिल की नदियों को ब्लॉक कर देते हैं।  अगर आपके शरीर की मात्रा से 1 फ़ीसदी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर दिल का दौरा भी पड़ने की आशंका लगभग 2% तक बढ़ जाती है। इसी तरह डायबिटीज रक्तचाप स्ट्रोक आदि की आशंका भी बढ़ जाती है।

अक्सर हम लोगों को बताया जाता है कि जैतून का तेल बहुत अच्छा होता है लेकिन क्या आप जानते हैं।  जैतून के तेल को तेज गरम नहीं करना चाहिए । तेज गर्म करने से वह नुकसानदायक अवस्था में पहुंच जाता है । इसी तरह मक्खन एवं जी को भी 200 डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक गर्म नहीं करना चाहिए और आप अपने जीवन में इन बातों का ध्यान रखेंगे तो एक स्वस्थ दिनचर्या हमेशा आपके साथ रहेगी।

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